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नगर आयुक्त की सख्ती: 18 अनुबंधित वाहन हटेंगे, निगम को डेढ़ करोड़ की बचत

खर्चों पर नगर आयुक्त का शिकंजा, 31 में से 18 वाहन हटाने के निर्देश
नगर निगम में खर्चों पर लगेगी लगाम, सालाना डेढ़ करोड़ रुपये बचाने की तैयारी

31 में से 18 वाहन हटाने का फैसला, प्रशासनिक खर्चों पर लगाम लगाकर जनहित के कार्यों के लिए संसाधन बचाने पर जोर

देहरादून। नगर निगम देहरादून में अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाने के लिए नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय ने सख्त रुख अपनाया है। निगम में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के उपयोग के लिए अनुबंध पर संचालित 31 वाहनों में से 18 वाहनों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इस निर्णय से नगर निगम को सालाना लगभग डेढ़ करोड़ रुपये तक की बचत होने की संभावना है। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक खर्चों की समीक्षा कर अनावश्यक व्यय में कटौती की जाएगी, ताकि सार्वजनिक धन का सदुपयोग सुनिश्चित करने के साथ ही शहर की स्वच्छता, सफाई व्यवस्था, जनसुविधाओं और विकास कार्यों के लिए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके।

नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय की अध्यक्षता में मंगलवार को नगर निगम परिसर में आयोजित बैठक में अनुबंधित वाहनों की व्यवस्था और उन पर होने वाले खर्च की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान वाहनों की आवश्यकता एवं उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए उनकी संख्या कम करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत वर्तमान में संचालित 31 अनुबंधित वाहनों में से 18 वाहनों को हटाया जाएगा। इस कदम से निगम के नियमित प्रशासनिक खर्च में कमी आएगी और वित्तीय संसाधनों पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार कम करने में मदद मिलेगी।

नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय ने कहा कि नगर निगम की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और किफायती बनाने के लिए प्रशासनिक व्यय की नियमित समीक्षा जरूरी है। सार्वजनिक धन का उपयोग पूरी जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। जिन मदों में अनावश्यक खर्च को कम करने की गुंजाइश है, वहां ठोस कदम उठाए जाने आवश्यक हैं। अनुबंधित वाहनों की संख्या घटाने का निर्णय इसी दिशा में उठाया गया कदम है।

उन्होंने कहा कि इस निर्णय से होने वाली संभावित बचत नगर निगम के वित्तीय प्रबंधन को मजबूती प्रदान करेगी। उपलब्ध बजट का उपयोग शहर की आवश्यकताओं और जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देते हुए किया जा सकेगा। नगर निगम का उद्देश्य केवल खर्चों में कटौती करना ही नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम लाभ शहर और नागरिकों तक पहुंचाना भी है।

नगर आयुक्त ने आगे कहा कि निगम में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए विभिन्न व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है। अनावश्यक व्यय पर नियंत्रण, प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार और बजट का बेहतर प्रबंधन समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि नगर निगम के संसाधनों का उपयोग पारदर्शी, जिम्मेदार और जनहित के अनुरूप हो।

बैठक में उप नगर आयुक्त तनवीर मारवाह, मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आनंद शुक्ला सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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