Homeराज्य समाचारउत्तराखंडजलवायु अनुकूल आजीविका मॉडल से सशक्त होंगे उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्र

जलवायु अनुकूल आजीविका मॉडल से सशक्त होंगे उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्र

ग्रामीण आजीविका को जलवायु परिवर्तन के अनुरूप बनाने पर मंथन

वनाग्नि की रोकथाम और ग्रामीण आजीविका के लिए कार्बन फाइनेंस पर जोर

आज दिनांक 13 अक्टूबर 2026 को राज्य पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशालय तथा GIZ इंडिया के सौजन्य से जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य में ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने एवं जलवायु.अनुकूल आजीविका मॉडल के विस्तार के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन होटल फेयरफील्ड, देहरादून में किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड शासन के वन एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री सी. रविशंकर तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की उप सचिव डॉ. रुचिका दराल उपस्थित रहीं। कार्यशाला में निदेशक, पर्यावरण श्री एसण.पी. सुबुद्धि भी उपस्थित रहे।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन के साथ.साथ जलवायु.अनुकूल आजीविका मॉडल विकसित करना तथा उनका व्यापक स्तर पर विस्तार करना था। इस दौरान जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण समुदायों की आजीविका को अधिक टिकाऊ, सुदृढ़ एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाने की रणनीतियों पर चर्चा की गई।
कार्यशाला का शुभारंभ निदेशक, पर्यावरण श्री एस.पी. सुबुद्धि द्वारा अतिथियों एवं प्रतिभागियों के स्वागत तथा कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालने के साथ किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागोंए संस्थानों एवं संबंधित परियोजनाओं के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में श्री वैभव कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक द्वारा वनाग्नि की रोकथाम के लिए कार्बन फाइनेंस की भूमिका एवं संभावनाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की गई। उन्होंने बताया कि कार्बन फाइनेंस के माध्यम से वन संरक्षण, वनाग्नि की रोकथाम तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने से संबंधित प्रयासों को वित्तीय सहयोग प्रदान करने की संभावनाएँ विकसित की जा सकती हैं। उन्होंने वन क्षेत्रों के संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा जलवायु.अनुकूल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में कार्बन फाइनेंस के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला में मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर चर्चा की गई।
जलवायु-अनुकूल आजीविका मॉडल का विस्तार: उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में जलवायु-अनुकूल आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।
ग्रामीण आजीविका का संवर्धन: कृषि, बागवानी, पशुपालन, बीज उत्पादन तथा अन्य ग्रामीण आजीविका गतिविधियों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने पर चर्चा की गई।

वनाग्नि की रोकथाम एवं कार्बन फाइनेंस: वन क्षेत्रों के संरक्षण, वनाग्नि के जोखिम को कम करने तथा कार्बन फाइनेंस के माध्यम से संरक्षण संबंधी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया।

परियोजना की कार्ययोजना एवं क्रियान्वयन: संबंधित विभागों एवं संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करने, परियोजना की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक कदमों पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यशाला के दौरान जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करनेए ग्रामीण समुदायों की आजीविका के अवसरों को बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के सतत उपयोग को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही, जलवायु.अनुकूल आजीविका मॉडल को अपनाने तथा वन एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए विभिन्न विभागों एवं संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
कार्यक्रम में संबंधित विभागों, संस्थानों तथा परियोजनाओं के प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप आजीविका के नए अवसर विकसित करने एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास को बढ़ावा देने के संबंध में चर्चा की।
कार्यशाला का समापन जलवायु.अनुकूल आजीविका मॉडल को प्रोत्साहित करने, ग्रामीण समुदायों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने, वनाग्नि की रोकथाम तथा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

Static 1
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

STAY CONNECTED

123FansLike
234FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest News