देहरादून: साइबर ठगी के पैसों को पार्क करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल होने वाले म्यूल अकाउंट्स के खिलाफ उत्तराखण्ड एसटीएफ ने बड़ी छापेमारी की है।
ऑपरेशन प्रहार के तहत एसटीएफ की टीमों ने राज्य में संचालित 15 संदिग्ध म्यूल बैंक खातों पर कानूनी कार्यवाही की तथा 80 से अधिक अन्य म्यूल खातों का सत्यापन किया। जांच में पाया गया कि इन खातों के माध्यम से साइबर अपराधी आम लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे थे।
एक खाते में अकेले ₹1.53 करोड़ की ठगी से जुड़ी 28 शिकायतें दर्ज हैं। एसटीएफ ने डिजिटल साक्ष्यों, बैंक रिकॉर्ड और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर इस गिरोह का भंडाफोड़ किया

दो प्रमुख एजेंट गिरफ्तार
जांच के दौरान साइबर ठगी के लिए म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले गिरोह के दो प्रमुख सदस्यों को हिरासत में लिया गया है।
1. दानिश अंसारी (29 वर्ष), पुत्र नौशाद अंसारी, मूल निवासी देवबंद (उत्तर प्रदेश), वर्तमान निवासी कण्डोली, देहरादून।
2. अंकित एन्थोनी (32 वर्ष), पुत्र स्व. सुरेश एन्थोनी, निवासी राजीव नगर, तरली कण्डोली, देहरादून।
बरामदगी
• 2 मोबाइल फोन
• 3 पासबुक (उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक)
• 4 सिम कार्ड एवं फेक आईडी
मामला दर्ज
साइबर पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा संख्या 26/2026 धारा 318(4), 61(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा धारा 66(D) आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया है।
कैसे काम करता था गिरोह?
अपराधी सोशल मीडिया और कॉल के जरिए लोगों को “घर बैठे कमाई”, “कमीशन”, “नौकरी” या अन्य लालच देकर उनके बैंक खाते खरीदते या किराए पर लेते थे। बाद में इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। कुछ लोगों ने लालच में अपने खाते, ATM कार्ड, पासबुक, सिम कार्ड और नेट बैंकिंग डिटेल्स अपराधियों को सौंप दीं।
बॉक्स
एसटीएफ की अपील
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ, अजय सिंह ने जनता से अपील की है:
• अपना बैंक खाता कभी भी किसी को किराए पर न दें या इस्तेमाल करने न दें।
• अनजान व्यक्ति को अपना आधार, PAN, पासबुक या नेट बैंकिंग डिटेल्स न साझा करें।
• कमीशन या आसान कमाई के लालच में न फंसें।
• संदेह होने पर तुरंत बैंक और पुलिस को सूचित करें।
शिकायत कहाँ करें?
• साइबर क्राइम हेल्पलाइन: 1930
• ऑनलाइन: www.cybercrime.gov.in
• चाक्षु पोर्टल (संचार साथी वेबसाइट)
एसटीएफ ने राज्य में लगभग 2200 संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान की है और सत्यापन का अभियान तेज कर दिया है। 12 टीमें लगातार इस पर काम कर रही हैं।
