राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून के तत्वावधान में दिनांक 09 मई 2026 को प्रातः 10.00 बजे से सायं 05.00 बजे तक जिला मुख्यालय देहरादून, बाह्य न्यायालय ऋषिकेश, विकासनगर, डोईवाला, मसूरी एवं चकराता के न्यायालयों में वर्ष 2026 की द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। इस लोक अदालत में मोटर दुर्घटना क्लेम, सिविल मामले, पारिवारिक मामलें, चैक बाउन्स से सम्बंधित मामलें, शमनीय प्रकृति के आपराधिक मामलें तथा अन्य प्रकृति के मामले लगाये गये थे। इस लोक अदालत में जनपद देहरादून में फौजदारी के शमनीय प्रकृति के 251 मामलें, चैक सम्बंधी 515 मामले, धन वसूली सम्बंधी 17 मामले, मोटर दुर्घटना क्लेम ट्राईबनल के 14 मामले पारिवारिक विवाद सम्बंधी 105 मामले, पब्लिक यूटिलिटी सर्विस सम्बंधी 26 मानले, मोटर वाहन अधिनियम के अन्तर्गत शमनीय अपराधों के 4835 मामलें, उपभोक्ता फोरम सम्बंधी 12 एवं अन्य सिविल प्रकृति के 34 मामलों, आर्बिट्रेशन सम्बंधी के 9 मामले, अन्य समझौते योग्य 26 मामले सहित कुल 5844 मामलों का निस्तारण किया गया तथा 13,36,35,816/- रू० की धनराशि पर समझौता हुआ।
साथ ही बाहय न्यायालय, विकासनगर के न्यायिक अधिकारियों द्वारा लोक अदालत में कुल 978 मामलों का आपसी राजीनामे के आधार पर निस्तारण किया गया, जिसमें कुल 22,67,653/-रू० की धनराशि पर समझौता किया गया तथा बाह्य न्यायालय ऋषिकेश के न्यायिक अधिकारियों द्वारा लोक अदालत में कुल 537 मामलों का निस्तारण कर कुल 2,31,40,051/- रुपये की धनराशि पर समझौता किया गया। बाह्य न्यायालय डोईवाला द्वारा 242 मामलों का निस्तारण कर कुल 22,80,000/- रूपये की धनराशि पर समझौता किया गया। बाह्य न्यायालय मसूरी द्वारा 56 मामलों का निस्तारण कर कुल 47,55,492/- रूपये की धनराशि पर समझौता किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून की सचिव एवं वरिष्ठ सिविल जज श्रीमती सीमा डुंगराकोटी द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालतें न्याय प्रणाली की गरिमा को सुदृढ़ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लोक अदालतों के माध्यम से आपसी सहमति सौहार्द एवं संवाद की भावना को प्रोत्साहन मिलता है, जिससे समाज में शांति, भाईचारे एवं सामंजस्यपूर्ण वातावरण का निर्माण होता है। उन्होंने बताया कि लोक अदालतें आमजन को सरल, सुलभ एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराने का एक सशक्त एवं प्रभावी माध्यम है। लोक अदालतों में पारित किए गए निर्णय अंतिम एवं बाध्यकारी होते हैं तथा प्रकरणों के निस्तारण उपरांत पक्षकारों को उनके द्वाना जमा किया गया न्याय शुल्क भी वापस किया जाता है।
इस राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न बैंकों व अन्य संस्थानों द्वारा प्री-लिटिगेशन स्तर के मामले भी निस्तारित किये गये। उक्त लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन स्तर के कुल 3236 गामलों का सफल निस्तारण किया गया तथा 2,18,40,185/- की धनराशि पर पक्षकारों के मध्य समझौता हुआ।
सचिय/सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून।
