रक्तदान कर संविधान दिवस सेलिब्रेशन एक अनुकरणीय उदाहरण- ले0 ज0 नागेन्द्र सिंह
देहरादून 26 नवम्बर। उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज देहरादून में आज संविधान दिवस 2025 को श्रद्धा, सम्मान, संकल्प व त्याग के साथ मनाया गया। आईएमए के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नागेन्द्र सिंह इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। छात्रों द्वारा जहाँ एक ओर संविधान निर्माताओं को अपनी श्रद्धांजलि दी गई वहीं दूसरी ओर अपना रक्तदान कर न केवल अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन किया बल्कि संविधान दिवस 2025 को अपने लिए अविस्मरणीय बना दिया। कार्यक्रम संचालन विधिक सहायता केन्द्र द्वारा किया गया जबकि एनसीसी, एनएसएस सहित विश्वविद्यालय के छात्रों ने कार्यक्रम मे बढ़चढ़ कर भागीदारी की।
विश्वविद्यालय के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र जोशी द्वारा लेफ्टिनेंट जनरल नागेन्द्र सिंह का पुष्पगुच्छ देकर सम्मान किया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। वरिष्ठ सैन्य अधिकारी की उपस्थिति से उत्साहित एनसीसी के कैडेटों द्वारा जोरदार गार्ड ऑफ ऑनर से स्वागत किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ विश्वविद्यालय की शौर्य-दीवार पर सफेद फूलों से बनी रीत चढ़ा कर किया। एनसीसी की अगवाई में सैन्य वेशभूषा में सुसज्जित अधिकारी का रीत समर्पित करना अपने आप में एक रोमांचित दृश्य था। लेफ्टिनेंट जनरल नागेन्द्र सिंह द्वारा छात्रों को भारत के संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ करवाया गया।
सैकड़ों रक्तदाताओं को देख ब्लड बैंकों के हाथ पैर फूले 1302 यूनिट रक्त संग्रह
इस अवसर पर विश्वविद्यालय में एक विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया गया। राजधानी के 7 ब्लड बैंकों ने रक्त संग्रह किया। सुबह से ही छात्र रक्तदान के लिए लाइनों में लगे थे। जिन छात्रों को किसी भी कारण रक्तदान का अवसर नही मिला वे बहुत उदास दिखाई दिये। 3000 से अधिक छात्रों, शिक्षकों व कर्मचारियों ने रक्तदान हेतु पंजीकरण करवाया। शाम होते-होते सभी ब्लड बैंकों ने अपनी क्षमता से अधिक लेने से मना कर दिया। कुल 1302 यूनिट रक्तदान किया गया जो कि किसी भी संस्थान द्वारा एक दिन में किये गये रक्तदान का कीर्तिमान है।
अपने सम्बोधन में लेफ्टिनेंट जनरल नागेन्द्र सिंह ने कहा कि उत्तरांचल विश्वविद्यालय द्वारा पारम्परिक कार्यक्रमों सहित बड़ी संख्या में रक्तदान कर संविधान दिवस सेलिब्रेशन का एक अनुकरणीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने हमें दुनिया का सर्वोत्तम संविधान दिया है जोकि लाख प्रतिकूलताओं के बावजूद भी हमारे अधिकारों की रक्षा करने और सरकारों को दिशा-निर्देश देने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि सशस्त्र सेना यदि वर्दीधारी सिपाही हैं तो देश का युवा भी बिना वर्दी के सिपाही है, जिन्हें देश और समाज को उचाईयों तक लेकर जाना है। विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न केवल भाषणों से नही अपितु कर्म पर ध्यान केन्द्रित करने से ही साकार होगा। देश को सुरक्षित बनाने एवं उन्नति के शिखर पर ले जाने के लिए सेना एवं जनता के समेकित प्रयास की आवश्यकता है। विधि के छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एक सैनिक और अधिवक्ता के कार्यों में बड़ी ही समानता है, सैनिक सीमा पर देश की रक्षा करता है एवं अधिवक्ता कोर्ट में न्याय की रक्षा करता है।
कार्यक्रम को विश्वविद्यालय की उपाध्यक्षा सुश्री अंकिता जोशी, कुलपति प्रो० धर्म बुद्धि व उपकुलपति प्रो० राजेश बहुगुणा ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से उपाध्यक्षा श्रीमती अनुराधा जोशी, प्रो० सोनल शर्मा, प्रो० अमित भट्ट, प्रो० राधेश्याम झा, प्रो० कार्तिकेय गौड़, प्रो० मिधु कुरिया, वत्सल चौधरी, डा० नितिन डुकलान, सर्वेश्वर प्रसाद, डा० अभिरंजन दीक्षित, डा० प्रेरणा कैंथोला, अशोक डोभाल व डा० रत्नेश श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
