रुद्रप्रयाग विधानसभा से पूर्व विधायक प्रत्याशी और युवा नेता मोहित डिमरी ने कहा कि आजकल हमारी चारधाम यात्रा चल रही है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन के लिए आ रहे हैं। इस पावन यात्रा का सफल संचालन हमारे राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन आज इस यात्रा व्यवस्था में कुछ ऐसी गंभीर कमियां आ गई हैं, जिन पर तुरंत ध्यान देना बेहद जरूरी हो गया है।
मोहित डिमरी ने कहा कि पहला और सबसे बड़ा मुद्दा ‘निजी वाहनों का अवैध व्यावसायिक उपयोग’ है।
आज बाहरी राज्यों से आने वाली अनगिनत प्राइवेट गाड़ियां (White Plate) हमारे पहाड़ों में धड़ल्ले से टैक्सियां बनकर चल रही हैं, यानी कमर्शियल उपयोग कर रही हैं। यह पूरी तरह से गैर-कानूनी है। इससे दो बड़े नुकसान हो रहे हैं। पहला नुकसान हमारी सरकार को हो रहा है, जो करोड़ों रुपये के टैक्स से महरुम रह जाती है और दूसरा सबसे बड़ा और दर्दनाक नुकसान हमारे स्थानीय टैक्सी चालकों को हो रहा है। जो काम हमारे स्थानीय चालकों को मिलना चाहिए था, उसे ये अवैध गाड़ियां छीन रही हैं। हमारे स्थानीय भाइयों ने बैंकों से लोन लेकर, जमीन गिरवी रखकर गाड़ियां फाइनेंस करवाई हैं। उन्हें हर महीने गाड़ी की किस्त (EMI) देनी है, भारी-भरकम कमर्शियल टैक्स भरना है, इंश्योरेंस देना है और गाड़ी का मेंटेनेंस देखना है। लेकिन आज स्थिति यह है कि स्थानीय चालकों के पास काम ही नहीं बचा है, उनके लिए अपने परिवार का पेट पालना और गाड़ी की किस्त चुकाना भी एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है।
युवा नेता ने आगे कहा कि दूसरा और सबसे संवेदनशील मुद्दा ‘सुरक्षा और हिल ड्राइविंग का अनुभव’ है। हम सब जानते हैं कि पहाड़ों के रास्ते कितने संकरे, घुमावदार और खतरनाक होते हैं। यहाँ गाड़ी चलाना कोई आम बात नहीं है। इसके लिए सालों के अनुभव और धैर्य की जरूरत होती है। लेकिन आज क्या हो रहा है? ऋषिकेश और अन्य मैदानी इलाकों में ‘हिल एरिया का परमिट’ बहुत आसानी से बांट दिया जा रहा है। बिना किसी कड़े प्रैक्टिकल टेस्ट या ट्रेनिंग के, महज एक ‘मोहर’ मारकर मैदानी इलाके के चालकों को पहाड़ों में गाड़ी चलाने का पास दे दिया जाता है। नतीजा क्या होता है? जिन्हें कभी पहाड़ों का अनुभव नहीं रहा, वे इन खतरनाक रास्तों पर गाड़ियां लेकर आ जाते हैं, जिससे आए दिन दर्दनाक हादसे होते हैं और कई मासूम जानें चली जाती हैं। यह व्यवस्था यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ है, इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार से मांग है कि चारधाम यात्रा रूट के सभी एंट्री पॉइंट्स पर प्राइवेट गाड़ियों की सघन चेकिंग की जाए। जो भी प्राइवेट गाड़ी कमर्शियल रूप से यात्रियों को लाती या ले जाती पाई जाए, उस पर भारी जुर्माना लगाया जाए और गाड़ी सीज की जाए। ऋषिकेश या कहीं भी, बिना वास्तविक ट्रेनिंग और कठिन ड्राइविंग टेस्ट के हिल परमिट की मोहर लगाना तुरंत बंद हो। सिर्फ उन्हीं चालकों को अनुमति मिले जिन्हें वास्तव में पर्वतीय क्षेत्रों में गाड़ी चलाने का लंबा अनुभव हो। इस चारधाम यात्रा पर पहला हक हमारे उत्तराखंड के स्थानीय वाहन चालकों का है। नियमों में ऐसा प्रावधान किया जाए कि यात्रा सीजन के दौरान स्थानीय चालकों और उनकी गाड़ियों को काम में पहली प्राथमिकता मिले, ताकि देवभूमि का पैसा और रोजगार देवभूमि के ही काम आए।
मोहित डिमरी ने स्पष्ट किया कि हम अपने स्थानीय चालकों के हक के लिए, उनके रोजगार को बचाने के लिए और चारधाम यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए आवाज़ उठा रहे हैं। हम सरकार से मांग करते हैं कि इन नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए।
