स्यानाचट्टी कस्बा पूरी तरह जलमग्न, हाइवे और पुल डूबे, यातायात बाधित
ग्रामीणों ने लगाया आरोप 29 जून से चेतावनी देने के बावजूद नहीं हुई कोई सुनवाई
उत्तरकाशी। उत्तरकाशी में स्यानाचट्टी में शुक्रवार से जल प्रलय के कारण पूरा क्षेत्र पानी में डूब गया। आज क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला, ग्रामीणों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए झील में कूद कर नारेबाजी शुरू कर दी । गढग़ाड़ से आए भारी मलबे और बोल्डरों ने यमुना नदी का प्रवाह रोक दिया, जिससे नदी का पानी कस्बे में घुस गया। देखते ही देखते मकान, दुकानें, होटल और स्कूल तक पानी में समा गए। यमुनोत्री हाइवे का मोटर पुल भी जलमग्न हो गया, जिससे आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई।
हालांकि हालात बिगड़ते ही जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की और आसपास के घरों व होटलों को खाली करा दिया। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य, एसपी सरिता डोबालऔर यमुनोत्री विधायक संजय डोभाल खुद मौके पर डटे हुए हैं। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, लोनिवि और सिंचाई विभाग की टीमें झील को खोलने और पानी की निकासी के प्रयास में जुटी हैं।
आज घरों के डूबने और प्रशासनिक बेरूखी से नाराज क्षेत्रवासियों ने झील के पानी में उतरकर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। आपदा प्रभावित ज्यादातर क्षेत्रों में सरकार और प्रशासन के खिलाफ गुस्सा भी है, जो धीरे-धीरे विरोध-प्रदर्शन का रूप भी ले रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि 29 जून से किताबें देने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं की गई।
प्रशासन ने आसपास के गांवों को भी सतर्क रहने की अपील की है। सिंचाई विभाग और एनडीआरएफ की टीम झील के जलस्तर पर लगातार निगरानी कर रही है। जिलाधिकारी ने कहा कि हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। लोगों को नदी किनारे न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।
हालांकि शुक्रवार सुबह झील का जलस्तर करीब 2 फीट घटा, लेकिन खतरा अब भी बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि झील अचानक टूटी तो यमुना घाटी में तबाही मच सकती है। प्रशासन ने बैकअप के तौर पर खाली स्कूलों और धर्मशालाओं को राहत शिविरों में बदलने की तैयारी शुरू कर दी है।