जाने सांप के काटने पर क्या करें क्या ना करें
देवभूमि उत्तराखण्ड की प्राकृतिक संपदा जितनी अद्भुत है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी। यहां के पर्वतीय और तराई क्षेत्रों में सांपों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से कुछ बेहद जहरीली और घातक हैं। समाजसेवी पवन दूबे, जो वर्षों से सांपों का रेस्क्यू कर रहे हैं, अब तक सैकड़ों बार सांपों को बिना किसी आमजन को नुकसान के सुरक्षित निकाल चुके हैं। उन्होंने रसैल वाइपर, स्पेक्टिकल्ड कोबरा, मोनोकल्ड कोबरा, इंडियन काॅमन करैत, यलो ब्लैक बैण्डेड करैत जैसे अत्यंत विषैले सांपों के साथ-साथ पायथन, काॅमन वूल्फ स्नेक, ट्वीन स्पाॅटेड वूल्फ स्नेक, चैकर्ड कीलबैक, काॅमन कुकरी स्नेक और एशियन वाइन स्नेक (कम विषैला) जैसी गैर-विषैली प्रजातियों का भी सफल रेस्क्यू किया है।
सर्पदंश दिवस का महत्व –
पवन ने बताया कि विश्व स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय सर्पदंश दिवस का उद्देश्य लोगों में सांपों के प्रति जागरूकता फैलाना, अंधविश्वास को दूर करना और विषैले तथा गैर-विषैले सांपों में अंतर बताना है। साथ ही यह भी बताना जरूरी है कि सर्पदंश की स्थिति में तुरंत सही कदम उठाना जीवन बचाने के लिए निर्णायक हो सकता है।

उत्तराखण्ड में पाए जाने वाले प्रमुख सांप –
विषैले सांप – रसैल वाइपर, स्पेक्टिकल्ड कोबरा, मोनोकल्ड कोबरा, इंडियन काॅमन करैत, यलो-ब्लैक बैण्डेड करैत, पिट वाइपर।
गैर-विषैले सांप – इंडियन राॅक पायथन, कॉमन वूल्फ स्नेक, ट्वीन स्पाॅटेड वूल्फ स्नेक, कॉमन कुकरी स्नेक, चैकर्ड कीलबैक, बफ स्ट्रीप्ड कीलबैक, एशियन वाइन स्नेक, काॅमन ट्रिंकेट स्नेक, फॉरेस्ट कैट स्नेक।
सांप और इंसान: सहअस्तित्व का संदेश-
पवन दूबे बताते हैं कि सांप प्रकृति के पारिस्थितिकी संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं क्योंकि ये खेतों में उगने वाली फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले चूहों और कीट-पतंगों पर नियंत्रण रखते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार लोग डर के कारण सांपों को मार डालते हैं, जबकि जरूरत उन्हें सुरक्षित स्थानांतरित करने की होती है। जहाँ न आमजन मानस से उनको कोई खतरा पहुँचे और न ही सांपों से आमजन मानस को।
सर्पदंश से बचाव के उपाय –
रात में खेतों और झाड़ियों में जाते समय टॉर्च का उपयोग करें।
घास या लकड़ी का ढेर हाथ से हटाने से पहले लाठी से जांच लें।
सोते समय बिस्तर जमीनी स्तर से थोड़ा ऊँचा रखें।
खुले में पैर नंगे न रखें, मजबूत जूते और कपड़े पहनें।
सर्पदंश की स्थिति में क्या करें और क्या न करें
तुरंत शांत रहें और मरीज को ज्यादा हिलने-डुलने न दें।
प्रभावित अंग को हिलने-डुलने से रोकें और नीचे की ओर रखें।
किसी झाड़-फूंक या तांत्रिक उपाय पर भरोसा न करें।
काटे गए स्थान पर चीरा न लगाएँ और न ही जहर चूसने की कोशिश करें।
पीड़ित को यथाशीघ्र नजदीकी अस्पताल पहुँचाएँ जहाँ एंटीवेनम उपलब्ध हो।
समय पर चिकित्सकीय इलाज ही जीवन बचाता है।
संदेश –
अंतर्राष्ट्रीय सर्पदंश दिवस हमें यह सिखाता है कि सांप डर का नहीं, बल्कि समझ और सुरक्षा का विषय है। हमें इनके संरक्षण और सटीक जानकारी के साथ इन्हें पहचानना सीखना चाहिए। समाजसेवी पवन दूबे जैसे लोग अपने कार्य से यह संदेश दे रहे हैं कि इंसान और सांप दोनों का जीवन सुरक्षित रह सकता है – जरूरत है तो केवल सही जागरूकता की। साथ ही पवन ने सभी से अपील की है कि यदि आपके आस – पास कोई भी सांप निकले तो उसको मारने कि बजाय उस पर नजर रखें, संभव हो तो फोटो खींच कर विशेषज्ञ से जानकारी प्राप्त करें साथ ही रेस्क्यू करने वालों को अथवा वन विभाग को सूचना देकर उनको आबादी से दूर सुरक्षित छुड़वाने में सहयोग करें।

