ओपन माइक, योग, मनोवैज्ञानिक खेल और रेज रूम रहे आकर्षण का केंद्र, आत्मचिंतन के जरिए भावनाओं को समझने का मिला अवसर
शक्ति संस्थान में स्थित साइक लैब में आज दिनांक 25 अक्टूबर को अंतर्मन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अंतर्मन यानी मन की चेतना,मन का वह गहरा हिस्सा जिसमें हमारी सच्ची भावनाएं, दबे हुए विचार और इच्छाएं निहित होती हैं। जिन्हें हम अक्सर बाहर जाहिर नहीं कर पाते। अंतर्मन इन्हीं भावनाओं को उजागर करने का मौका प्रदान करने का एक प्रयास रहा जिसमें विभिन्न मनोवैज्ञानिक कार्यक्रमों के तहत युवाओं और किशोर को यह भावनाएं व्यक्त करने का मौका दिया गया। मनोवैज्ञानिक परीक्षणों का प्रदर्शन व क्रियान्वन, विविध प्रकार के मनोवैज्ञानिक संकेत आधारित खेल और क्रियाएं, मस्तिष्क को तेज करने वाली क्रियाएं, सेल्फी प्वाइंट, योग, रेंज रूम अपने मन की बात को पत्रों के माध्यम से व्यक्त करना, अपने मन के भावों को रंगों के द्वारा व्यक्त करना और ओपन माइक के द्वारा अपने मनोभावों को सबके साथ साझा करना कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण था। कार्यक्रम में विविध कॉलेज के छात्र और छात्राओं ने भाग लिया और जीवन,प्रेम और मानवीय अनुभवों से लेकर अंतर्मन पर कई गहरे विचार और लेख साझा किए ।इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को खुद को समझने का, अपने भीतर झांकने का, जीवन को नए नजरिए से देखने का मौका मिला । ओपन माइक में सभी ने अपनी ऐसी यादों को साझा किया जिसे वह कभी भूल नहीं पाएंगे, ऐसे दर्द इसके बारे में भी कभी बात नहीं कर पाते, ऐसे सवाल जिनके उनके पास जवाब नहीं होते और जब सब कुछ शांत हो जाता है और भीतर की खामोशी शुरू होती है उसे समय महसूस होने वाले दुखद अनुभवों को साझा करना जो अक्सर हमारे अस्तित्व के बारे में कुछ बड़ा प्रकट करते हैं, इन सभी बातों को ओपन माइक में अन्य लोगों के साथ साझा किया गया। मनोवैज्ञानिक डॉक्टर ऋचा सक्सैना ने सभी को बताया कि साइक लैब में सभी मनोवैज्ञानिक समस्याओं का समाधान काउंसलिंग द्वारा किया जाता है और हमे समय समय पर अपने पर कार्य करते रहना चाहिए ताकि मन में चलती नकारात्मकता शुरू में ही समाप्त की जा सके। डॉ अनुपम वर्धन ने हर्षपूर्वक बताया कि हरिद्वार में पहली बार अपने मन की नकारात्मकता को दूर करने के लिए रेज रूम शुरू किया गया है जिसका लाभ कोई भी उठा सकता है।इस कार्यक्रम का आयोजन करने में डॉ रीना वर्मा, प्रेक्षा मलिक,डॉ सुनीता रानी, डॉ पारुल मलिक ने अपना अभूतपूर्व सहयोग दिया।

