
सिख समाज के मुद्दों पर भाजपा खामोश, सम्मेलन से क्या निकला हासिल: कांग्रेस
नानकमत्ता से ज्ञान गोदड़ी तक, सिख समाज के सवालों का जवाब दे भाजपा: अमरजीत सिंह
सम्मेलन में प्रशंसा बहुत, लेकिन सिख समाज के लिए ठोस घोषणा नहीं: कांग्रेस
देहरादून। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के उत्तराखंड आगमन और विशेष रूप से ऊधमसिंह नगर में आयोजित कार्यक्रम से सिख और पंजाबी समाज को निराशा हाथ लगी है।
उम्मीद थी कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के उत्तराखंड दौरे के दौरान प्रदेश के लिए कोई बड़ी सौगात या महत्वपूर्ण घोषणा होगी। लेकिन उनके दौरे में कांग्रेस को निशाना बनाने और भाजपा की उपलब्धियों का प्रचार करने के अलावा उत्तराखंड के लिए कोई स्पष्ट नई और ठोस घोषणा सामने नहीं आई। उनके संबोधन में 1947 के विभाजन और 1984 के सिख विरोधी दंगों जैसे पुराने और संवेदनशील मुद्दों को उठाकर सिख समाज के जख्मों को कुरेदने और उसका राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास अधिक दिखाई दिया।
‘सिख पंजाबी गौरव सम्मेलन’ से ‘पंजाबी गौरव सम्मेलन’ तक, सवाल क्यों?
रुद्रपुर में आयोजित होने की चर्चा वाले ‘सिख पंजाबी गौरव सम्मेलन’ का नाम बदलकर ‘पंजाबी गौरव सम्मेलन’ कर दिया गया और इसमें से ‘सिख’ शब्द हटा दिया गया।
सवाल है कि सम्मेलन के नाम से ‘सिख’ शब्द क्यों हटाया गया?
कार्यक्रम में उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश के बिलासपुर, रामपुर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पंजाबी और सिख समाज के लोगों के शामिल होने की जानकारी सामने आई। देहरादून और हरिद्वार से भी मुख्य रूप से भाजपा से जुड़े कार्यकर्ता कार्यक्रम में पहुंचे।
स्वाभाविक रूप से समाज के लोगों को उम्मीद थी कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उत्तराखंड के सिख और पंजाबी समाज के लिए कोई विशेष घोषणा करेंगे। लेकिन उनके भाषण का बड़ा हिस्सा पंजाब और पुराने राजनीतिक मुद्दों पर केंद्रित रहा।
धार्मिक स्थलों का उल्लेख, लेकिन ठोस घोषणा नहीं
नितिन नबीन ने नानकमत्ता साहिब, हेमकुंड साहिब और रीठा साहिब का उल्लेख किया, लेकिन नानकमत्ता साहिब का उच्चारण बार-बार गलत किया।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कार्यक्रम में मौजूद किसी जिम्मेदार व्यक्ति ने उन्हें सही उच्चारण से अवगत नहीं कराया। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इन पवित्र स्थलों और उनसे जुड़े क्षेत्रों के विकास के लिए नई और ठोस घोषणा क्या की गई?
सिख समाज को इन मुद्दों पर थी घोषणा की उम्मीद
उत्तराखंड के सिख समाज को उम्मीद थी कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे पर प्रमुख मुद्दों पर ठोस निर्णय या घोषणा होगी, जिनमें शामिल हैं:
– सिख किसानों और ऊधमसिंह नगर के किसानों के लंबित मुद्दों का समाधान।
– नानकमत्ता साहिब, हेमकुंड साहिब और रीठा साहिब के विकास के लिए विशेष आर्थिक सहायता।
– सिख और पंजाबी बहुल क्षेत्रों के लिए विशेष विकास पैकेज।
– विस्थापित पंजाबी परिवारों के लंबित भूमि एवं कृषि मामलों पर निर्णय।
– सिख युवाओं के रोजगार के लिए विशेष कार्यक्रम।
– सिख शैक्षणिक एवं धार्मिक संस्थाओं के लिए सहायता।
– गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी मामले के समाधान के लिए समयबद्ध पहल।
लेकिन इनमें से किसी भी प्रमुख विषय पर कोई स्पष्ट नई राज्य-विशिष्ट नीति, आर्थिक पैकेज या ठोस घोषणा सामने नहीं आई।
सवाल यह है कि जब उत्तराखंड के सिख समाज का इतना महत्वपूर्ण सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक योगदान है, तो इस सम्मेलन के बाद उन्हें ठोस रूप से क्या मिला?
भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए:
नानकमत्ता साहिब के लिए नया क्या मिला?
ऊधमसिंह नगर के सिख किसानों के लिए क्या नई पहल हुई?
विस्थापित पंजाबी परिवारों के भूमि संबंधी मामलों पर क्या निर्णय हुआ?
सिख युवाओं और संस्थाओं के लिए क्या नई योजना घोषित हुई?
और उत्तराखंड में सिख समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भाजपा की क्या नीति है?
सम्मेलन में सिख और पंजाबी समाज के योगदान की प्रशंसा जरूर की गई, लेकिन प्रशंसा के बाद ठोस नीति, योजना, आर्थिक पैकेज या नई घोषणा का अभाव कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
आखिर इस सम्मेलन से उत्तराखंड के सिख समाज को ठोस उपलब्धि क्या मिली?
अमरजीत सिंह
महासचिव
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी
