मूट कोर्ट में निरमा यूनिवर्सिटी का दबदबा, सिम्बायोसिस नोएडा उपविजेता
निरमा यूनिवर्सिटी, गुजरात बनी 10वीं लाॅ काॅलेज देहरादून मूट कोर्ट प्रतियोगिता 2026 की विजेता
डिजिटल मंचों केे अवरूद्ध के खिलाफ लाॅ काॅलेज देहरादून के मूटकोर्ट में याचिका दायर
लाॅ काॅलेज देहरादून के मूटकोर्ट में दिख सुप्रीम कोर्ट सा दृश्यः न्यायामूर्ति आशिष नैथानी





देहरादून 11 अक्टूबर। उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लाॅ काॅलेज देहरादून में आज सुप्रीम कोर्ट जैसा दृश्य देखने को मिला। अवसर था 10वीं लाॅ काॅलेज देहरादून राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के अन्तिम मुकाबले का। उत्तराखंड हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायामूर्ति आशीष नैथानी इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश व मुख्य अतिथि थे जबकि देहरादून के अधिवक्ता टी0एस0 बिन्द्रा, ओबरॉय लाॅ चेम्बर चंडीगढ़ के हेड अधिवक्ता गगन ओबराॅय, लाॅ काॅलेज देहरादून की प्राचार्य प्रो0 पूनम रावत व लाॅ काॅलेज देहरादून के डीन प्रो0 राजेश बहुणुणा बतौर जज की भूमिका में थे। तीन दिवसीय प्रतियोगिता का अन्तिम मुकाबला इंस्टीट्यूट ऑफ लाॅ, निरमा यूनिवर्सिटी बनाम सिम्बायोसिस लाॅ स्कूल, नोयडा के बीच हुआ।
प्रतियोगिता मे देश के सर्वाधिक समकालीन मुद्दे पर बहस की गई। जे़न जी आंदोलन और सरकार की चुनौतियों के बीच सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई जिसमे डिजिटल मंचों को अवरूद्ध करने, आपराधिक कार्यावाही करने, शान्तिपूर्व आंदोलन पर प्रतिबंध व सरकारी आश्वासनों की वैधता को चुनौती दी गई। प्रतियोगिता में याचिकाकर्ता व सरकार की ओर से संविधान के अनुच्छेद 19, 21, 22 व आई0टी एक्ट व राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अन्तर्गत अपने-अपने ठोस तर्क प्रस्तुत किये गये।
विजेता – इंस्टीट्यूट ऑफ लाॅ, निरमा यूनिवर्सिटी, गुजरात
उपविजेता – सिम्बायोसिस लाॅ स्कूल, नोयडा, उत्तरप्रदेश
सर्वश्रेष्ठ महिला अधिवक्ता – डा0 बी0 आर0 अम्बेडकर, नेशनल लाॅ यूनिवर्सिटी, सोनीपत, हरियाणा
सर्वश्रेष्ठ पुरूष अधिवक्ता – गुरूनानक लाॅ काॅलेज सियांवाला, पंजाब
सर्वश्रेष्ठ मेमोरियल – लाॅयड लाॅ काॅलेज, उत्तरप्रदेश
सर्वश्रेष्ठ रिसर्चर – डा0 बी0 आर0 अम्बेडकर, नेशनल लाॅ यूनिवर्सिटी, सोनीपत, हरियाणा
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष जितेन्द्र जोशी ने कहा कि लाॅ काॅलेज देहरादून के मूटकोर्ट का 10वां संस्करण कई मामलों में अभूतपूर्व रहा, मसलन देश के 15 राज्यों के 90 विश्वविद्यालयों की भागीदारी, 51 जजों द्वारा निर्णय व 39 न्यायालयों की रचना की गई। उन्होंने आयोजकों की जमकर प्रशंसा की और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
न्यायामूर्ति आशीष नैथानी ने अपने सम्बोधन में कहा कि हमारा संविधान जहाँ एक ओर मौलिक अधिकार देता है वहीं उन पर उचित प्रतिबंध व मौलिक कर्तव्यों की व्यवस्था भी करता हैं। अधिकारों और कर्तव्यों का समन्वय ही वास्तव में संविधान निर्माताओं की सच्ची भावना है। आज की याचिका एक महत्वपूर्ण व संवेदनशील विषय को लेकर थी। प्रतिभागियों ने याचिकाकर्ता व सरकार दोनों का पक्ष बड़े प्रभावी ढंग से रखा और ठोस तथ्य प्रस्तुत किये। उन्होनें कहा कि छात्र अधिवक्ताओं की प्रस्तुती ने लाॅ काॅलेज में सुप्रिम कोर्ट जैसा दृश्य प्रस्तुत किया। एक बार तो मुझे लगा कि मैं एक छात्र अधिवक्ता नहीं बल्कि किसी सीनियर एडवोकेट को सुन रहा हूँ।
अपने सम्बोधन में अधिवक्ता टी0एस0 बिन्द्रा ने कहा कि मूटकोर्ट में अधिवक्ता की भूमिका न्यायाधीश से कठिन होती है क्योंकि न्यायाधीश कोई भी प्रश्न पूछ सकता है और अधिवक्ता से उसके सही उत्तर की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने कहा कि विधि के क्षेत्र में अपार सम्भावनाएँ हैै। ए0 आई0 भी इस क्षेत्र की प्रभुता को प्रभावित नही कर पाएगी। उन्होंने ए0 आई0 की मदद लेने की मनाही नही की परन्तु इसके मिथ्याभास से सावधान रहने की सलाह दी।
कार्यक्रम को प्रो0 राजेश बहुगुणा, अधिवक्ता गगन ओबेराॅय व डाॅ0 पूनम रावत ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ0 ऐश्वर्या सिहं के नेतृत्व में मूट कोर्ट सोसाइटी के छात्रों द्वारा किया गया।
प्रो0 राजेश बहुगुणा
उपकुलपति

