
देहरादून, 30 जुलाई 2026। क्लेमेंटाउन, देहरादून में नाले में बहने के कारण दो मासूम बच्चों की हुई दुखद मृत्यु के मामले का समाचार पत्रों के माध्यम से संज्ञान लेते हुए **उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग * की अध्यक्ष **डॉ. गीता खन्ना** के नेतृत्व में आयोग की टीम द्वारा घटनास्थल का स्थलीय निरीक्षण किया गया।


अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया तथा स्थानीय लोगों एवं स्वयंसेवकों से घटना के संबंध में जानकारी प्राप्त की। इसके उपरांत उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर बच्चों की दुखद मृत्यु पर गहरी संवेदना व्यक्त की और परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
स्थलीय निरीक्षण के दौरान आयोग की टीम के संज्ञान में आया कि पीड़ित परिवार शहर के बीचों-बीच अत्यंत दयनीय एवं असुरक्षित परिस्थितियों में **प्लास्टिक और लकड़ी से बनी कच्ची झोपड़ी** में रह रहा है। झोपड़ी की स्थिति ऐसी है कि वहां पर्याप्त धूप और हवा का भी समुचित आवागमन नहीं हो पाता। परिवार में कुल **पांच बच्चे** थे, जिनमें से दो मासूम बच्चों की नाले में बहने के कारण दुखद मृत्यु हो गई।
निरीक्षण के दौरान स्थानीय निवासियों एवं स्वयंसेवकों ने बताया कि निकट स्थित **तिब्बती बस्ती** के बड़े क्षेत्र से बरसात के समय पानी तेज गति से बहकर घटनास्थल के समीप स्थित नाले की ओर आता है। स्थानीय लोगों के अनुसार पूर्व में तिब्बती बस्ती और इस क्षेत्र के बीच पानी के बहाव को रोकने/अलग करने के लिए एक दीवार बनी हुई थी, जो तेज जल प्रवाह के कारण गिर गई थी। उस समय भी वहां जान-माल के नुकसान की जानकारी सामने आई थी।
आयोग की अध्यक्ष **डॉ. गीता खन्ना** ने कहा कि दो मासूम बच्चों की इस प्रकार असुरक्षित परिस्थितियों में जान जाना अत्यंत गंभीर एवं हृदयविदारक घटना है। उन्होंने कहा कि **हर बच्चे को सुरक्षित वातावरण में रहने और जीवन जीने का अधिकार है तथा किसी भी बच्चे का जीवन केवल प्रशासनिक लापरवाही या असुरक्षित भौतिक परिस्थितियों के कारण खतरे में नहीं पड़ना चाहिए।**
उन्होंने संबंधित प्रशासन से निम्न बिंदुओं पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपेक्षा की—
1. घटनास्थल एवं आसपास के नाले का तत्काल **सुरक्षा निरीक्षण एवं तकनीकी सर्वेक्षण** कराया जाए।
2. बरसात के दौरान पानी के तेज बहाव को रोकने के लिए **जल निकासी एवं सुरक्षा व्यवस्था** को दुरुस्त किया जाए।
3. नाले के आसपास आवश्यकतानुसार **सुरक्षा दीवार, बैरिकेडिंग एवं चेतावनी संकेतक** लगाए जाएं, ताकि भविष्य में कोई बच्चा या अन्य व्यक्ति हादसे का शिकार न हो।
4. पीड़ित परिवार की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का तत्काल आकलन कर उसे **आवास, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं अन्य पात्र सरकारी योजनाओं** से जोड़ा जाए।
5. परिवार के शेष बच्चों की **सुरक्षा, शिक्षा एवं मानसिक स्वास्थ्य** को सुनिश्चित किया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाए।
6. प्रशासन द्वारा इस क्षेत्र में रहने वाले अन्य बच्चों एवं परिवारों की सुरक्षा का भी सर्वेक्षण कराया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो।
डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि आयोग इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और बच्चों के अधिकारों एवं सुरक्षा से संबंधित सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। **किसी भी बच्चे का जीवन असुरक्षित आवास, जलभराव, खुले नाले अथवा प्रशासनिक उपेक्षा के कारण संकट में न पड़े, यह सुनिश्चित करना शासन एवं प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।**
उन्होंने संबंधित विभागों से तत्काल समन्वय स्थापित कर आवश्यक सुरक्षा उपाय करने तथा घटना की परिस्थितियों की विस्तृत रिपोर्ट आयोग को उपलब्ध कराने की अपेक्षा की।
**डॉ. गीता खन्ना**
**अध्यक्ष**
**उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग
