देहरादून के ग्राफिक एरा अस्पताल में हार्मोनल कुशिंग डिजीज के दो जटिल मामलों का इलाज करने में सफलता दर्ज की गई है। ग्राफिक एरा अस्पताल की विशेषज्ञों ने अत्याधुनिक तकनीकों और सर्जिकल कौशल से इससे पीड़ित दो मरीजों को ब्रेन खोले बिना जीवन देकर एक कीर्तिमान बनाया।
ये दोनों मरीज कम उम्र की युवतियां हैं… इन्हें एसीटीएच डिपेंडेंट कुशिंग सिंड्रोम- पिट्यूटरी माइक्रोएडेनोमा से पीड़ित पाया गया था….
ग्राफिक एरा के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने एंडोस्कोपिक ट्रांस-नेजल न्यूरो-नेवीगेशनल तकनीक का उपयोग करते हुए इन युवतियों का ब्रेन खोले बिना इनका इलाज करने में सफलता पाई है। न्यूरो-नेविगेशन ने ट्यूमर को सटीक रूप से ढूंढने और पिट्यूटरी ग्रंथि को सुरक्षित रखने में मदद मिली। इस मल्टी स्पेशलिटी टीम में न्यूरोसाइंस एवं न्यूरोसर्जरी के हेड डॉ. पार्था पी. बिष्णु, सीनियर कंसल्टेंट डॉ अंकुर कपूर, सीनियर न्यूरोसर्जन एवं न्यूरो इंटरवेंशन स्पेशलिस्ट डॉ पायोज़ पांडे, ईएनटी सीनियर कंसल्टेंट डॉ पवेंद्र सिंह, एंडॉक्रिनलॉजी विभाग के निदेशक डॉ सुनील कुमार मिश्रा और न्यूरो-एनेस्थीसिया टीम शामिल रही।
इससे पहले ग्राफिक एरा अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सक ब्रेन में पेसमेकर लगाने, जटिल मामले में छोटे बच्चों को तीसरा पेसमेकर लगाने, बिना ऑपरेशन हार्ट के दो वाल्व एक साथ बदलने, बिना ऑपरेशन अवरुद्ध आहार नली खोलने, हड्डी को काटे बिना करीब ढाई इंच के चिरे के जरिए ओपन हार्ट सर्जरी करने जैसे कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं।
Medical Achievement: ग्राफिक एरा अस्पताल का नया कीर्तिमान, दो जटिल मामलों में ब्रेन खोले बिना सफल इलाज
RELATED ARTICLES