
*NAAC मानदंडों के प्रभावी क्रियान्वयन से शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के समग्र विकास को मिलेगा नया आयाम*
माया देवी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फार्मेसी द्वारा ऑनलाइन एवं ऑफलाइन मोड पर *इनहांसिंग दी क्वालिटी ऑफ़ एजुकेशन एंड स्टूडेंट डेवलपमेंट थ्रू दी एडॉप्शन ऑफ नेक क्राइटेरिया* विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का आज विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में उत्साहपूर्ण एवं गरिमामय वातावरण में सफलतापूर्वक समापन हुआ। पाँच दिनों तक चले इस अकादमिक कार्यक्रम में शिक्षकों को उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन, NAAC के विभिन्न मानदंडों, प्रभावी शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, अनुसंधान एवं नवाचार तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।



*समापन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. सौरभ कोसे, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, फार्मेसी विभाग, मोगा, पंजाब ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान उच्च शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। किसी भी शिक्षण संस्थान की सफलता केवल परीक्षा परिणाम अथवा डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं होती बल्कि यह इस बात से निर्धारित होती है कि संस्था अपने विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल, व्यावहारिक दक्षता, नवाचार की क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए कितना तैयार कर रही है।उन्होंने कहा कि NAAC के मानदंड उच्च शिक्षण संस्थानों को अपनी शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का आत्म-मूल्यांकन करने और निरंतर सुधार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं*। उन्होंने विशेष रूप से फार्मेसी शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, अनुसंधान, उद्योग-अकादमिक सहयोग तथा नवीनतम तकनीकों के उपयोग को आवश्यक बताया। डॉ. सौरभ कोसे ने कहा कि फार्मेसी एक ऐसा क्षेत्र है जिसका सीधा संबंध मानव स्वास्थ्य एवं समाज से है इसलिए फार्मेसी के विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम आधारित ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है बल्कि उन्हें अनुसंधान, प्रयोगशाला कौशल, समस्या समाधान, नैतिक मूल्यों और व्यावसायिक दक्षताओं से भी सशक्त करना आवश्यक है। उन्होंने FDP के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों को अपने ज्ञान एवं शिक्षण कौशल को निरंतर अद्यतन करने तथा उच्च शिक्षा में हो रहे बदलावों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का अवसर प्रदान करते हैं।
*विश्वविद्यालय की वाइस प्रेसिडेंट प्रो. डॉ. तृप्ति जुयाल सेमवाल ने कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र के सामाजिक, आर्थिक एवं बौद्धिक विकास की आधारशिला है*। उन्होंने कहा कि आज के बदलते शैक्षणिक परिवेश में विद्यार्थियों को केवल विषयगत ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें रचनात्मक सोच, नेतृत्व क्षमता, संचार कौशल, तकनीकी दक्षता, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ना भी आवश्यक है।उन्होंने कहा कि NAAC के मानदंडों को केवल मूल्यांकन अथवा मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि इन्हें संस्थागत गुणवत्ता में निरंतर सुधार के एक प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की गुणवत्ता सीधे तौर पर विद्यार्थियों की शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत प्रगति को प्रभावित करती है। इसलिए फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम विश्वविद्यालय की अकादमिक संस्कृति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
*प्रो. डॉ. तृप्ति जुयाल सेमवाल ने कहा कि माया देवी विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, मूल्यपरक एवं भविष्य उन्मुख शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय में शिक्षण के साथ अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और विद्यार्थी-केंद्रित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने FDP के सफल आयोजन के लिए स्कूल ऑफ फार्मेसी एवं आयोजन समिति को बधाई दी।*
*विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. आशीष सेमवाल ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए गुणवत्ता अब केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि NAAC के मानदंड विश्वविद्यालयों को अपनी शैक्षणिक, शोध, प्रशासनिक और विद्यार्थी सहायता प्रणालियों का व्यवस्थित मूल्यांकन करने तथा उनमें निरंतर सुधार करने की दिशा प्रदान करते हैं।कुलपति ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक उपलब्धि उसके विद्यार्थियों की सफलता, उनके ज्ञान एवं कौशल, अनुसंधान क्षमता तथा समाज के प्रति उनके योगदान से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बदलते समय के साथ अपनी शिक्षण पद्धतियों को भी विकसित करना होगा। *आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल लर्निंग, आधुनिक शोध उपकरण और नवीन शिक्षण तकनीकें आज उच्च शिक्षा के महत्वपूर्ण अंग बन चुकी हैं। ऐसे में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शिक्षकों को नई तकनीकों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।* प्रो. डॉ. आशीष सेमवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार, विद्यार्थी विकास, उद्योग-अकादमिक सहयोग और संस्थागत उत्कृष्टता को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पाँच दिवसीय FDP के दौरान प्राप्त ज्ञान एवं अनुभव को शिक्षक अपने-अपने विभागों में प्रभावी रूप से लागू करेंगे और इसका सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास पर दिखाई देगा।
*पाँच दिवसीय FDP के दौरान उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। कार्यक्रम में NAAC के विभिन्न मानदंड, शिक्षण-अधिगम एवं मूल्यांकन, शोध नवाचार, विद्यार्थी प्रगति एवं सहायता, संस्थागत मूल्य एवं सर्वोत्तम प्रथाएं तथा गुणवत्ता आश्वासन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।* विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को NAAC की गुणवत्ता रूपरेखा को संस्थागत स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया।
प्रतिभागियों ने विभिन्न सत्रों में सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने अनुभव साझा किए तथा उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने यह भी समझा कि NAAC की प्रक्रिया केवल दस्तावेजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य संस्थान की वास्तविक शैक्षणिक गुणवत्ता, विद्यार्थी-केंद्रित गतिविधियों, शोध संस्कृति और निरंतर सुधार की प्रक्रिया को मजबूत करना है। *समापन समारोह के अवसर पर FDP में सक्रिय सहभागिता करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।*
समापन अवसर पर स्कूल ऑफ फार्मेसी के प्रिंसिपल प्रो डॉ विक्रम सिंह द्वारा सभी अतिथियों, फैकल्टी सदस्यों, विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकगण, अधिकारी एवं कर्मचारी इस सफल आयोजन के लिए धन्यवाद प्रेषित किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो सौरभ कोसे , डॉ महेश जैसवाल हेड विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी जयपुर, डॉ शालिनी शर्मा डायरेक्टर एसडीजी ग्लोबल यूनिवर्सिटी गाजियाबाद, डॉ अमित सेमवाल डॉ उज्जवल नौटियाल प्रोफेसर स्वामी राम हिमालय यूनिवर्सिटी डॉ समीर रस्तोगी विश्वविद्यालय की वाइस प्रेसिडेंट प्रोफेसर डॉक्टर तृप्ति जुयाल सेमवाल वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. आशीष सेमवाल ,रजिस्ट्रार श्रीमती अंबिका जुयाल , डीन एकेडमिक्स डॉ आरबी सिंह, प्रिंसिपल बीएड डॉ सीता जुयाल,डॉ रेखा चौहान सहित सभी स्कूल के प्रिंसिपल, डीन, शिक्षक उपस्थित थे।
