Homeराज्य समाचारउत्तराखंडलॉ कॉलेज देहरादून में 10वीं राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का शुभारंभ

लॉ कॉलेज देहरादून में 10वीं राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का शुभारंभ

संविधान के मूल में न्याय की परिकल्पना निहित: न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया

न्यायपूर्ण समाज के बिना न्याय की कल्पना अधूरी: न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया

मूट कोर्ट से निखरती है भावी वकीलों की प्रतिभा: न्यायमूर्ति धुलिया

किताबों से करें दोस्ती, स्क्रीन टाइम पर लगाएं लगाम: न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया

संविधान की प्रस्तावना का आधार है न्याय: न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया

संविधान के मूल में है न्याय की परिकल्पनाः सुधांशु धुलिया
देहरादून 9 अक्टूबर। उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लाॅ काॅलेज देहरादून में आज तीन दिवसीय राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के 10वें संस्करण का शुभारम्भ किया गया। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। इस अवसर पर उत्तरांचल रजत जयंती व्याख्यान श्रंृखला के क्रम में न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया द्वारा एक महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया गया जिसका विषय था ‘भारत के संविधान में न्याय की परिकल्पना’
विश्वविद्यालय के अध्यक्ष जितेन्द्र जोशी ने न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया और उन्हे स्मृति चिन्ह भेंट किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विधि जगत की सर्वोच्च विभूतियों को आमंत्रित कर अपने भावी विधिक व्यवसाइयों से रुबरु कराने को कटिबद्ध है। उन्होंने छात्रों को इस क्षेत्र के सफलतम महानुभावों के पद कमलों पर चलने की सलाह दी।


अपने सम्बोधन में न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया ने कहा कि भारत का संविधान मुख्य रूप से एक सामाजिक देस्तावेज है। इसके मूल में न्याय की परिकल्पना निहित है और न्याय के लिए न्यायपूर्ण समाज का होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि न्यायपूर्ण समाज यानि एक ऐसा समाज जहाँ हर व्यक्ति को समान अधिकार, सुरक्षा, अवसर व सम्मान मिलें। कानून के समक्ष समानता और मानवीय गरीमा एक न्यायपूर्ण समाज के गहने है। भारत के संविधान ने हमे वह एकजूटता व एकता प्रदान की है जिसका अन्य देशों में अभाव है। हमारे संविधान की प्रस्तावना का आधार ही न्याय है। उन्होंने कहा कि विधि व्यवसाय आपको समाज के निकट लाता है और समाज को समझने व परखने का अवसर प्रदान करता है, किन्तु यह करने के लिए पहले आप अपने स्क्रीन टाइम को नियंत्रित कर लाइब्रेरी जाना शुरू करे और किताबों से प्यार करना सीखे।
उन्होंने कहा कि मूट कोर्ट छात्रों की बद्धिमता, अभिव्यक्ति और शिष्टाचार को निखारता है। यह उन्हे वकालत के अभ्यास के लिए आवश्यक बुनियादी शुरूआत और विचार प्रदान करता है। उन्होंने छात्र जीवन में मूटकोर्ट में भागीदारी की सीख दी। देशभर के विख्यात विश्वविद्यालयों को देहरादून में लाकर एक प्लेटफाॅर्म पर खड़ा करने के लाॅ काॅलेज देहरादून के प्रयास को उन्होंने अनूठा कदम बताया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से कुलपति प्रो0 धर्मबुद्धि, उपकुलपति प्रो0 राजेश बहुगुणा, प्राचार्य प्रो0 पूनम रावत, डा0 ऐश्वर्य सिंह, प्रो0 जितेन्द्र सिंह, अशोक डोभाल, प्रो0 वी0 भुवनेश्वरी, डा0 कुलजीत सिंह, डा0 अभिरंजन दीक्षित, डा0 अमित चैधरी, डा0 पूर्णिमा त्यागी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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