
गोदियाल ने उठाया सवाल— क्या लोकतंत्र में दलित नेता की सभा के बाद ‘शुद्धिकरण’ स्वीकार्य है?
*हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ प्रकरण के विरोध में आज कांग्रेस का सचिवालय घेराव
भाजपा बताए क्या लोकतंत्र में किसी दलित नेता की सभा के बाद भी ‘शुद्धिकरण’ की राजनीति स्वीकार्य है? – गोदियाल
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आज कांग्रेस भवन से सचिवालय तक मार्च करते हुए सचिवालय का घेराव किया। यह प्रदर्शन हल्द्वानी के रामलीला मैदान में 8 अगस्त 2026 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे जी की विशाल जनसभा के बाद कथित रूप से किए गए ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ के विरोध में किया गया।
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि हल्द्वानी की घटना ने भाजपा की उस मानसिकता को उजागर कर दिया है, जो राजनीतिक विरोध को सामाजिक और जातिगत अपमान में बदलने से भी पीछे नहीं हटती। उन्होंने कहा कि यदि किसी लोकतांत्रिक राजनीतिक सभा के बाद यह कहकर धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है कि स्थान को ‘शुद्ध’ करना है, तो सवाल केवल कांग्रेस का नहीं, बल्कि भारत के संविधान, सामाजिक औसमानता और लोकतांत्रिक मूल्यों का है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह जानना चाहती है कि आखिर वह कौन-सी मानसिकता है, जो देश के वरिष्ठ दलित नेता और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष द्वारा संबोधित सभा के बाद उसी स्थान को ‘अशुद्ध’ बताने का दुस्साहस करती है? क्या भाजपा इस मानसिकता को स्वीकार करती है? यदि नहीं, तो अब तक ऐसे तत्वों के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?


नेता प्रतिपक्ष श्री यशपाल आर्य ने कहा कि हल्द्वानी की घटना केवल एक राजनीतिक दल का अपमान नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संविधान की मूल भावना पर सवाल खड़ा करती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी नेता की सभा के बाद उसके सामाजिक परिचय या जाति के आधार पर स्थान को ‘अशुद्ध’ बताने की मानसिकता को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि वह ऐसी सोच के साथ खड़ी है या संविधान में निहित समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के साथ। कांग्रेस इस मुद्दे पर सदन से सड़क तक मजबूती से आवाज उठाएगी।
चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष श्री प्रीतम सिंह ने कहा कि भाजपा की राजनीति का असली चेहरा अब जनता के सामने है। जब देश के एक वरिष्ठ दलित नेता और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे जी की सभा के बाद ‘शुद्धिकरण’ जैसा आयोजन किया जाता है, तो यह महज राजनीतिक विरोध नहीं रह जाता, बल्कि सामाजिक अपमान का रूप ले लेता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धरती ने हमेशा सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश दिया है, इसलिए ऐसी विभाजनकारी मानसिकता के खिलाफ कांग्रेस मजबूती से खड़ी रहेगी।
चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री हरक सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड की जनता ने हमेशा जाति और धर्म से ऊपर उठकर लोकतांत्रिक मूल्यों को महत्व दिया है। हल्द्वानी की घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या भाजपा अपने राजनीतिक विरोधियों के प्रति इतनी असहिष्णु हो गई है कि उनके कार्यक्रम के बाद ‘शुद्धिकरण’ तक की नौबत आ गई? उन्होंने कहा कि भाजपा को इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि वह ऐसी सोच का समर्थन नहीं करती तो दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
कांग्रेस के सह-प्रभारी श्री मनोज यादव ने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे जी का अपमान देश के करोड़ों वंचित, दलित और शोषित वर्गों की भावनाओं से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि संविधान ने हर नागरिक को समान सम्मान और अधिकार दिया है, लेकिन ‘शुद्धिकरण’ जैसी घटनाएं उस संवैधानिक भावना के विपरीत हैं। कांग्रेस ऐसी मानसिकता के खिलाफ वैचारिक और लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगी।
श्री सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि ‘शुद्धिकरण’ के नाम पर किया गया यह कृत्य उत्तराखंड की समावेशी संस्कृति और लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी व्यक्ति की जाति और सामाजिक पहचान को आधार बनाकर उसके कार्यक्रम या उपस्थिति को ‘अशुद्ध’ बताना स्वीकार्य नहीं हो सकता। कांग्रेस की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
कांग्रेस नेताओं ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति से संविधान की मूल भावना—समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व—की रक्षा की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में कथित ‘शुद्धिकरण’ का समर्थन करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने भाजपा से स्पष्ट जवाब मांगते हुए कहा कि क्या भाजपा सामाजिक भेदभाव की इस सोच के साथ खड़ी है या संविधान के साथ?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र से ऊपर उठकर ‘सबका सम्मान और सबका अधिकार’ की राजनीति की है। संविधान ने अस्पृश्यता को अपराध घोषित कर सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव पर निर्णायक प्रहार किया। लेकिन आज भाजपा की राजनीति पर आरोप लग रहे हैं कि वह जनता को विकास और रोजगार के सवालों से भटकाकर जाति एवं धर्म के नाम पर बांटने का काम कर रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि भाजपा को यह समझ लेना चाहिए कि कांग्रेस संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी व्यक्ति की जाति या सामाजिक पहचान के आधार पर उसके कार्यक्रम को ‘अशुद्ध’ बताना लोकतांत्रिक भारत की आत्मा का अपमान है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने देश में सामाजिक न्याय और समान अधिकारों की नींव मजबूत की, जबकि आज कुछ ताकतें समाज को पीछे धकेलने वाली सोच को बढ़ावा दे रही हैं। कांग्रेस ऐसी विभाजनकारी राजनीति को सफल नहीं होने देगी।
उन्होंने कहा कि आज का सचिवालय घेराव केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संघर्ष है। कांग्रेस सरकार से मांग करती है कि हल्द्वानी प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, कथित रूप से शुद्धिकरण करने वाले लोगों की भूमिका की जांच हो तथा दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता विकास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य चाहती है, न कि जाति और धर्म के नाम पर नफरत की राजनीति। कांग्रेस भाजपा से पूछती है कि वह संविधान के साथ है या उन ताकतों के साथ जो समाज को बांटने का प्रयास कर रही हैं।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में प्रदेश पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने हल्ला बोल किया।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन और कार्यकर्ताओं में जमकर धक्का मुक्की और कहा सुनी हुई, तदोपरांत कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन ले जाया गया।
