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डिजिटल युग में बच्चों के लिए सुरक्षित और संवेदनशील माहौल जरूरी : डॉ. गीता खन्ना

 

“हर बच्चा हमारा, उसकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी” : डॉ. गीता खन्ना

बच्चों को नहीं, उनके बचपन को भी सुरक्षित रखना होगा : डॉ. गीता खन्ना
बाल संरक्षण के लिए परिवार, समाज और प्रशासन को मिलकर निभानी होगी भूमिका

“हर बच्चा हमारी जिम्मेदारी है, उसके बचपन की सुरक्षा भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है”

उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अनुसचिव डॉक्टर सतीश कुमार सिंह उपस्थित रहे। उनके द्वारा सभी उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा बाल अधिकारों, बाल सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, बाल विवाह, बालश्रय आदि के सम्बन्ध मे किए जा रहे कार्यों से उपस्थित अतिथियों को जानकारी प्रदान की गई।
देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि वर्तमान डिजिटल एवं तकनीकी युग में बच्चों के सामने उत्पन्न हो रही नई चुनौतियों को केवल बच्चों के व्यवहार में आए बदलाव के रूप में देखने के बजाय, समाज को अपनी सामूहिक जिम्मेदारी को समझते हुए बच्चों के लिए सुरक्षित, संवेदनशील एवं सहयोगी वातावरण तैयार करना होगा।

उन्होंने कहा कि आज तकनीक, सोशल मीडिया, वर्चुअल वर्ल्ड और डिजिटल प्लेटफॉर्म बच्चों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में अभिभावकों और समाज के लिए यह चुनौती बढ़ गई है कि वे बच्चों की डिजिटल दुनिया, उनकी संगति, उनके विचारों को प्रभावित करने वाले माध्यमों तथा उनके सामने आने वाली समस्याओं को समझें।

उन्होंने कहा कि पहले छोटे शहरों और कस्बों में बच्चों की सुरक्षा में पूरा सामाजिक परिवेश सहभागी होता था। पड़ोसी, रिश्तेदार और परिवार के बड़े बच्चे की गतिविधियों पर ध्यान रखते थे। आज सामाजिक संरचना और जीवनशैली में आए बदलाव के कारण यह सामुदायिक निगरानी और सहभागिता कम हुई है। इसलिए आवश्यकता है कि समाज पुनः बच्चों के प्रति अपनी सामूहिक जिम्मेदारी को स्वीकार करे।

उन्होंने कहा कि जब किसी बच्चे के संबंध में समाज यह कहने लगे कि “हमें क्या?”, तो यह केवल बच्चे की नहीं, बल्कि पूरे समाज की चिंता का विषय है। प्रत्येक बच्चा भविष्य में हमारे समाज का चिकित्सक, शिक्षक, वकील, अधिकारी, वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता अथवा किसी अन्य क्षेत्र का जिम्मेदार नागरिक बन सकता है। इसलिए हर बच्चे की सुरक्षा और उसके अधिकारों की रक्षा हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में CWC की Chairperson श्रीमती नमिता ममगाईं, CWC सदस्य श्री दिवेश शर्मा एवं पार्षद श्रीमती देवकी नौटियाल, पार्षद श्रीमती मीरा कठैत, पार्षद श्री अंकित अग्रवाल, श्रीमती रमा गोयल, Harshil Foundation के प्रतिनिधियों सहित डॉ. संदीप, श्रीमती मीना बिष्ट, DPO, देहरादून तथा डॉ. टी.एन. जोहर, सामाजिक कार्यकर्ता, श्रीमती ममता रौथान, विधि अधिकारी, डॉ निशात इकबाल, बाल मनोवैज्ञानिक, श्रीमती शांति भट्ट, कनिष्ठ सहायक उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य तथा उनके समग्र विकास के लिए विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

बच्चे को ही नहीं, उसके बचपन को भी संभालना होगा

वक्ताओं ने कहा कि बच्चों की समस्याओं का समाधान केवल संस्थागत स्तर पर नहीं किया जा सकता। परिवार, विद्यालय, समुदाय, प्रशासन, बाल संरक्षण तंत्र, सामाजिक संस्थाओं तथा नागरिक समाज—सभी को अपनी-अपनी भूमिका निभानी होगी।

विशेष रूप से इस बात पर बल दिया गया कि बच्चों को केवल उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों और करियर के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य केवल डॉक्टर, इंजीनियर, वकील अथवा प्रशासनिक अधिकारी बनाना नहीं है, बल्कि बच्चों को जागरूक, संवेदनशील, जिम्मेदार, आत्मनिर्भर और सक्षम नागरिक बनाना भी है।

बच्चों में resilience, emotional regulation, problem-solving, decision-making, communication तथा life skills विकसित करना आज की आवश्यकता है, ताकि वे कठिन परिस्थितियों का सामना करने, असफलताओं से सीखने और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीवन में आगे बढ़ने में सक्षम हो सकें।

डिजिटल युग में अभिभावकों और समाज की भूमिका

कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि आज बच्चे इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसी दुनिया से जुड़े हैं, जिसकी जानकारी कई बार उनके अभिभावकों को भी पूरी तरह नहीं होती। इसलिए अभिभावकों को बच्चों पर केवल नियंत्रण रखने के बजाय उनके साथ संवाद स्थापित करना, उनकी डिजिटल गतिविधियों को समझना और उन्हें सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक करना आवश्यक है।

बच्चों को डराकर या केवल प्रतिबंध लगाकर नहीं, बल्कि संवाद, विश्वास, मार्गदर्शन और सकारात्मक सहभागिता के माध्यम से सुरक्षित किया जा सकता है।

सामूहिक संकल्प की आवश्यकता

कार्यक्रम में उपस्थित सभी हितधारकों ने इस बात पर जोर दिया कि बाल संरक्षण केवल किसी एक विभाग, आयोग या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए परिवार, समाज, विद्यालय, प्रशासन, पुलिस, बाल कल्याण समिति, स्थानीय निकाय, गैर-सरकारी संगठन तथा अन्य संबंधित संस्थाओं को मिलकर कार्य करना होगा।

यह संदेश दिया गया कि—

“हर बच्चा हमारा बच्चा है।
हर बच्चे की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है।
और केवल बच्चे को नहीं, उसके बचपन को भी सुरक्षित रखना हमारा सामूहिक दायित्व है।”

उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा बच्चों के सुरक्षित, स्वस्थ, सम्मानजनक एवं समग्र विकास के लिए सभी संबंधित हितधारकों से निरंतर सहयोग एवं सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया गया।

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