यात्रा प्रबंधन पर रिपोर्टिंग के खिलाफ कानूनी कार्रवाई बेहद चिंताजनक
देहरादून। देहरादून स्थित एसडीसी फाउंडेशन ने चार धाम यात्रा 2026 के पहले सप्ताह के रुझानों पर एक प्रारंभिक विश्लेषण जारी किया है जिसमें पिछले वर्षों की तुलना के साथ-साथ आंकड़ों के पीछे के महत्वपूर्ण संदर्भों को रेखांकित किया गया है।
विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2026 में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों में पहले सप्ताह के दौरान कुल 2,38,590 श्रद्धालु पहुंचे। यह संख्या वर्ष 2024 के 3,98,010 और वर्ष 2025 के 2,93,386 श्रद्धालुओं की तुलना में कम है।
एसडीसी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल ने कहा कि यात्रा के पहले सप्ताह में दिखाई देने वाली यह कमी सही संदर्भ में समझी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि 2026 में पहले सप्ताह के आंकड़े कम होने का एक प्रमुख कारण यह है कि इस वर्ष यात्रा पिछले वर्षों की तुलना में पहले शुरू हो गई है। इसके साथ ही 2026 में पहले सप्ताह के कुल संचालित दिनों की संख्या भी 2025 और 2024 की तुलना में कम है।
वर्ष 2026 में धामों के कपाट अपेक्षाकृत पहले खुले—गंगोत्री और यमुनोत्री 19 अप्रैल को, केदारनाथ 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ 23 अप्रैल को। इसके विपरीत, 2025 में धाम 30 अप्रैल से 4 मई के बीच खुले थे, जबकि 2024 में यह अवधि 10 मई से 12 मई के बीच रही थी।
इस बदलाव का सीधा असर “पहले सप्ताह” के आंकड़ों की गणना पर पड़ा है। वर्ष 2024 में पहले सप्ताह के दौरान चारों धामों में कुल 26 संचालित यात्रा दिवस थे, 2025 में यह संख्या 22 दिन रही, जबकि 2026 में यह घटकर 21 दिन रह गई। स्वाभाविक रूप से, संचालित दिनों की कम संख्या का असर कुल यात्रियों की संख्या पर पड़ता है।
उन्होंने कहा, “यदि हम आंकड़ों को नॉर्मलाइज करके देखें तो स्थिति उतनी चिंताजनक नहीं है जितनी पहली नजर में प्रतीत होती है। 2026 के पहले सप्ताह का आंकड़ा 2024 के स्तर का लगभग 60% और 2025 के स्तर का लगभग 81% है। यह स्पष्ट करता है कि यह अंतर मुख्य रूप से समय और संचालित दिनों के कारण है न कि श्रद्धालुओं की रुचि में कमी के कारण।”
एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे पर बोलते हुए अनूप नौटियाल ने यात्रा प्रबंधन में अव्यवस्थाओं को लेकर किए जा रहे मीडिया और पब्लिक फीडबैक, सोशल मीडिया पोस्ट और जमीनी रिपोर्टिंग पर कानूनी कार्रवाई और नोटिस जारी किए जाने की खबरों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “यह बेहद चिंताजनक है। ऐसे समय में जब प्रैक्टिकल सुझावों की सबसे अधिक आवश्यकता है, उत्तराखंड में वास्तविक समस्याओं को उजागर करने वाली आवाज़ों को निशाना बनाना गलत है और ये गलत संदेश देता है।”
उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस दृष्टिकोण को तत्काल बंद करने की अपील की। उन्होंने कहा, “सरकार, शासन और प्रशासन का ध्यान व्यवस्थाओं की कमियों को दूर करने पर होना चाहिए, न कि संदेश देने वालों को दबाने पर। जो स्पष्ट रूप से कमियां हैं, उन्हें पारदर्शिता के साथ स्वीकार कर सुधार किया जाना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि इतने बड़े स्तर की यात्रा के लिए फीडबैक के प्रति खुलापन, जवाबदेही और निरंतर सुधार अत्यंत आवश्यक हैं। खबरों और सोशल मीडिया को दबाने से जमीनी हालात नहीं सुधरेंगे, बल्कि अविश्वास बढ़ेगा और सुधार की प्रक्रिया और कठिन हो जाएगी।
फाउंडेशन ने दोहराया कि प्रारंभिक रुझानों को अलग-थलग करके नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि यात्रा कई सप्ताह तक चलती है और इस पर मौसम, आपदाएं, बुनियादी ढांचा, पहुंच और प्रशासनिक समन्वय जैसे कई कारकों का प्रभाव पड़ता है।
एसडीसी फाउंडेशन ने लगातार उत्तराखंड की चार धाम यात्रा का डाटा बेस्ड आंकलन किया है और व्यवस्थागत कमियों की पहचान करने की कोशिश की है। इसी के साथ संस्था ने निरंतर सुरक्षित एवं सतत यात्रा प्रबंधन की एडवोकेसी की है।
सादर, आभार
अनूप नौटियाल
anoop.nautiyal@gmail.com
28 अप्रैल, 2026
