कांग्रेस की भूमि बचाओ यात्रा पर भाजपा का पलटवार, बोली- जमीन नहीं, अपनी सियासी जमीन बचाने निकली कांग्रेस
निवेश, बढ़ते रोजगार और पर्यटन आदि विकास कार्यों पर झूठ फैलाने की कोशिश हैं कांग्रेसी यात्रा ; भाजपा*
*भूमाफिया संस्कृति वाली कांग्रेस को भूमि यात्रा बचाओ का नैतिक अधिकार ही नही : भाजपा*

*कांग्रेस ने भूमाफियाओं को पनपाया, भाजपा ने सख्त भू कानून एवं कार्रवाइयों से हजारों एकड़ जमीन बचाई : चमोली*
*जनता की जमीन भाजपा बचा रही, कांग्रेस अपनी राजनैतिक जमीन बचाए: चमोली*
देहरादून 3 नवंबर। भाजपा ने कांग्रेस की भूमि बचाओ यात्रा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, प्रदेश में भूमाफिया संस्कृति पैदा करने और उसे पालने पोसने का काम कांग्रेस की सरकारें ने किया है। पार्टी के वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेश प्रवक्ता श्री विनोद चमोली ने कहा, भाजपा की सरकारों ने तो सख्त भू कानून लागू किया एवं अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई कर हजारों एकड़ जमीनों को बचाया है। कांग्रेस की पहली निर्वाचित सरकार में भूमि खरीद के अवैध तरीकों को करोबार बनाने से लेकर घोटालों के दर्जनों बड़े प्रकरण इनकी सरकारों में सामने आए, लिहाजा उन्हें तो ऐसी यात्रा निकालने का कोई नैतिक अधिकार ही नहीं है। दरअसल कांग्रेस की मंशा इस यात्रा के पीछे, प्रदेश में हो रहे निवेश, बढ़ते रोजगार के अवसरों और पर्यटन आदि विकास के कामों को बाधित एवं बदनाम करने की है।
पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए श्री चमोली ने कहा, जानकारी में आया है कि प्रदेश में भूमि बचाओ यात्रा निकालने जा रहे है। उसमें बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि निकालने वाली पार्टी कांग्रेस है, जो अपनी सरकारों में भूमाफिया संस्कृति को पनपाने और 4 दर्जन से अधिक भूमि घोटालों की जनक रही है। हाल में राजधानी के ही धोलास में मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने की कांग्रेसी सरकारों की कोशिशों में नया खुलासा हुआ था। क्योंकि वहां एक जमीन पर प्लॉटिंग हुई, बाद में पता चला कि वही भूमि थी, जो एन.डी. तिवारी के कार्यकाल में शेखुल्ल एजुकेशनल ट्रस्ट को आवंटित हुई थी। जो लगभग 20 एकड़ की भूमि थी, सस्ती दरों पर दी गई थी। उसमें तमाम उतार-चढ़ाव के बाद उस प्लॉटिंग को कोई 15 लोगों को बेचा गया और बाद में वो लगभग 80 लोगों में आगे आवंटित हुई। उसके तमाम कानूनी पहलू भी हैं। लेकिन कुल मिलाकर ये बात साबित हो गई कि आखिर यहाँ पर मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए जमीन आवंटित हुई थी, सरकार ने उसकी सहमति दी थी।
उन्होंने बताया कि ऐसे एक और बड़ा विवादित मसला रहा है नैनीसार अल्मोड़ा में, जहां एक जिंदल ग्रुप के एक एजुकेशनल ट्रस्ट को एक भूमि आवंटित हुई थी उस समय, लगभग 7 हेक्टेयर भूमि थी वो, लगभग 17 एकड़ से ऊपर की भूमि थी। और उसमें स्थानीय लोगों को बड़ा संघर्ष करना पड़ा, यहाँ तक हुआ कि जब सरकार ने उन पर सख्ती की, उनको प्रताड़ित किया , तो उनको कोर्ट तक जाना पड़ा और न्यायालय ने सरकार को रोका। तो उस समय तात्कालिक मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि हम पहाड़ों में निवेश करने के लिए, शिक्षा और पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ये सब कर रहे हैं। ऐसे उन्होंने सवाल उठाया कि अब आप तो अगर कोई जमीन आवंटित करते हैं, तो वो निवेश करने के लिए और बाद में जब वर्तमान सरकार अगर कोई कदम इस तरह से आगे बढ़ाती है तो आप उसका विरोध करते हैं। ये दोहरा मापदंड क्यों है? कांग्रेस की मंशा हमेशा से राज्य के निर्माण और विकास के विरोधी की रही है। यही वजह है कि राज्य में पहली निर्वाचित सरकार में औद्योगिक निवेश का अवसर आया तो घोटाले किए, फिर जब भाजपा की सरकार आई तो अटल सरकार के दिए औद्योगिक पैकेज को मनमोहन सरकार से बंद करवाने का पाप किया। क्योंकि कांग्रेस नहीं चाहती कि पहाड़ों में निवेश आए, पलायन के चलते खाली हो रहे गांव को दोबारा आबाद किया जाए, पहाड़ों में रोजगार के अवसर स्थानीय स्तर पर युवाओं को मिले, कृषि में नई-नई तकनीक आए, विश्व स्तरीय पर्यटन सुविधा विकसित हो ताकि ग्रामीण आर्थिकी को भी नई ऊंचाई मिले। इस यात्रा के पीछे भी कांग्रेस की मंशा, प्रदेश में हो रहे निवेश, बढ़ते रोजगार के अवसरों और विकास के कामों को बाधित एवं बदनाम करने की है।
वहीं कहा कि हमारी सरकार मुख्यमंत्री धामी ने सख्त भू-कानून लेकर आई और आज भी जिस भू-कानून की बड़ी चर्चा होती है वो खंडूड़ी के मुख्यमंत्री काल में आया था। आज फिर धामी सरकार में हम लोग एक नया भू-कानून लेकर आए और उसमें हम लोगों ने काफी सख्ती के साथ जमीनों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने का प्रयास किया है। इसी तरह प्रदेश में धार्मिक गतिविधियों के नाम पर अवैध तरीके से कब्जाई 13 हजार एकड़ से अधिक भूमि को भी हमारी ही सरकार ने मुक्त करने का कार्य किया है। हल्द्वानी के वनभूलपुरा क्षेत्र में 80 एकड़ भूमि रेलवे की मुक्त करने की प्रक्रिया में भी हमारी ही सरकार निर्णायक रूप से आगे बढ़ रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड की जमीनों को खुर्द-बुर्द होने का एक सिलसिलेवार ब्योरा तैयार करे तो समझ में आता है कि एन.डी. तिवारी की सरकार से ये प्रारंभ हुआ। तमाम आवंटन उस समय से लगभग 57 आवंटन हुए पूरे उत्तराखंड के अंदर, जिसमें 52 तो सिर्फ गढ़वाल क्षेत्र में हैं। 5 कुमाऊँ में हैं। इन भूमियों का आवंटन कौड़ियों के भाव हुआ, यहाँ तक कि ₹1-₹1 में भी जमीन दे दी गई और ₹120, ₹125 में जमीन दे दी गई। इसी तरह उधमसिंहनगर में एनएच जमीन घोटाला हुआ जिसने बाजार रेट से भी 20-20 गुना अधिक मुआवजा दे दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश अगर डिरेल हुआ है तो ये इसीलिए हुआ है कि जो पहली चुनी हुई सरकार थी, वो कांग्रेस की सरकार थी। उसने उत्तराखंड के संसाधनों का अपने निजी हित और अपने लोगों के हित में अंधाधुंध दोहन किया, नियम-कानूनों को तोड़-मरोड़ कर के अपने लोगों को लाभ पहुँचाया। उसके बाद खंडूड़ी की सरकार आई, हमने कुछ ठीक करने का प्रयास किया, बाद में फिर कांग्रेस की सरकार आ गई, फिर वही हाल हो गए। आज हमारी सरकार ने नीतियों को सही दिशा में ले जाने का काम किया है और जमीनों की बंदरबाँट और खरीद-फरोख्त हो रही है, उसको रोकने का गंभीर प्रयास किया है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की जो भूमि बचाओ यात्रा है, ये उत्तराखंड की जमीन बचाने के लिए नहीं है, क्योंकि जमीन तो उन्होंने ही खुद खुर्द-बुर्द की थी। उनकी ये यात्रा अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए है और वे कितने भी प्रयास कर लें जनता उन्हें माफ नहीं करने वाली है। वहीं विश्वास जताया कि जनता का हम पर आशीर्वाद है लिहाजा भाजपा की तीसरी बार सरकार आने से कोई रोक नहीं सकता है। कांग्रेस तमाम नारे देकर, लोगों को भ्रमित करने का प्रयास जरूर करते हैं, लेकिन जैसे ही चार कदम जाते हैं, एक्सपोज हो जाते हैं। इस मामले में वे पहले से ही एक्सपोज हैं और इनकी राजनीतिक जमीन अब बचने वाली नहीं है। जहां तक सवाल है उत्तराखंड की जमीन का तो भाजपा उसे जनता के सहयोग से कहीं नहीं जाने देंगे, ये हमारा संकल्प है।
इस दौरान पत्रकार वार्ता में प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री मनवीर सिंह चौहान, सह प्रभारी श्री राजेंद्र सिंह नेगी, प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती हनी पाठक एवं प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती कमलेश रमन भी मौजूद रहे।

