कोटी गाँव में कृषि एवं प्रौद्योगिकी विद्यालय का शैक्षणिक भ्रमण एवं कृषि विस्तार कार्यक्रम आयोजित
किसानों को वैज्ञानिक खेती, मृदा स्वास्थ्य, उन्नत बीजों एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति किया जागरूक



माया देवी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी द्वारा देहरादून जिले की विकासनगर तहसील के कोटी गाँव में शैक्षणिक भ्रमण एवं किसान–विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। *कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को कृषि की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना, किसानों की समस्याओं को समझना* तथा विश्वविद्यालय और कृषक समुदाय के बीच समन्वय एवं सहयोग को सुदृढ़ करना था।
*इस अवसर पर माया देवी विश्वविद्यालय की वाइस प्रेसिडेंट प्रो. (डॉ.) तृप्ति जुयाल सेमवाल ने कहा कि कृषि शिक्षा को केवल कक्षा तक सीमित न रखकर उसे खेतों और ग्रामीण समुदायों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को वास्तविक कृषि परिस्थितियों, किसानों की चुनौतियों और ग्रामीण जीवन की आवश्यकताओं को समझने का अवसर प्रदान करते हैं*। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थियों के ज्ञान एवं अनुसंधान का लाभ स्थानीय किसानों तक पहुँचे और कृषि क्षेत्र में नवाचार, आत्मनिर्भरता तथा टिकाऊ विकास को बढ़ावा मिले।
*विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) आशीष सेमवाल ने कहा कि किसान–विद्यार्थी संवाद विश्वविद्यालय की अनुभवात्मक एवं व्यावहारिक शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। किसानों के अनुभव और कृषि विशेषज्ञों का वैज्ञानिक मार्गदर्शन मिलकर कृषि उत्पादन में सुधार तथा स्थानीय समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं*। उन्होंने कहा कि माया देवी विश्वविद्यालय भविष्य में भी कृषि विस्तार गतिविधियों, खेत-स्तरीय प्रदर्शनों और ग्रामीण समुदायों के साथ नियमित संवाद के माध्यम से किसानों एवं विद्यार्थियों के हित में कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस भ्रमण में बी.एससी. कृषि एवं बी.एससी. खाद्य प्रौद्योगिकी के विद्यार्थियों के साथ संकाय सदस्यों ने भाग लिया। *विश्वविद्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित कोटी गाँव की लगभग 90 प्रतिशत आबादी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने मक्का, अरहर, चना, आलू, धान, सरसों, मटर, हल्दी, लहसुन, मिर्च, उड़द, राजमा, कद्दू, टमाटर, करेला एवं तोरई सहित विभिन्न फसलों का अवलोकन किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने चारा फसलों तथा तिमला, भीमल, शहतूत एवं बहेड़ा जैसे स्थानीय वृक्षों के बारे में जानकारी प्राप्त की*। विद्यार्थियों ने ग्रामीणों से संवाद किया तथा कृषि पद्धतियों, फसल उत्पादन से जुड़ी समस्याओं और कृषक परिवारों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को समझने के लिए घरेलू सर्वेक्षण भी किया। क्षेत्रीय भ्रमण के उपरांत ग्राम प्रधान श्रीमती कल्पना कोली, श्री विनोद कोली, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी श्री बी.एस. रावत तथा स्थानीय निवासियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों के सहयोग से कृषि विस्तार एवं किसान–विद्यार्थी संवाद सत्र आयोजित किया गया।
*कार्यक्रम के प्रारंभ में कृषि एवं प्रौद्योगिकी विद्यालय के डीन प्रो. महेंद्र सिंह पाल ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और किसानों को फसल उत्पादन से संबंधित अपनी समस्याएँ साझा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्नत फसल किस्मों, अनुशंसित बीज दर, वैज्ञानिक खेती की विधियों तथा समय पर सिंचाई के महत्व पर प्रकाश डाला*। डॉ. साहिल ठाकुर ने मृदा उर्वरता के आकलन एवं उचित पोषक तत्त्व प्रबंधन के लिए मृदा स्वास्थ्य परीक्षण के महत्व पर जोर दिया। डॉ. विनय ने गुणवत्तायुक्त बीजों के उपयोग तथा किसानों की बाजार तक पहुँच बेहतर बनाने के लिए विपणन संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। डॉ. शुभम समकरिया ने दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए उन्नत डेयरी प्रबंधन पद्धतियों की जानकारी दी। प्रो. पाल ने खेत में मृदा नमी का अनुमान लगाने की व्यावहारिक विधि का प्रदर्शन किया तथा सिंचाई प्रबंधन में इसके उपयोग को समझाया। सुश्री शिवानी एवं सुश्री अंबिका कपिल ने भी संवाद एवं कृषि विस्तार गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई। संवाद के दौरान किसानों ने फसल उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया पर व्यावहारिक प्रदर्शन, कीट एवं रोगों की पहचान और प्रभावी प्रबंधन, उन्नत बीज किस्मों की जानकारी तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए तकनीकी सहायता की आवश्यकता व्यक्त की।
*इस कार्यक्रम ने किसानों को अपनी खेत-स्तरीय समस्याएँ सीधे कृषि विशेषज्ञों के समक्ष रखने तथा वैज्ञानिक समाधान प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया*। अंत में गाँव के प्रतिनिधियों ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विश्वविद्यालय की इस पहल की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के निरंतर आयोजन की आशा व्यक्त की।, *स्कूल आफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी ने दीर्घकालिक कृषि विस्तार एवं ग्रामीण विकास गतिविधियों के संचालन के लिए सात गाँवों—कोटी, ढलानी, किनसाल, धारड़ा, मलेथा, द्वाथरा एवं कांडवाल—से मिलकर बनी कोटी ग्राम सभा को अपनाने का प्रस्ताव भी रखा। इस पहल के माध्यम से माया देवी विश्वविद्यालय ने वैज्ञानिक आवश्यकता-आधारित एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने तथा विश्वविद्यालय और ग्रामीण समुदायों के बीच सहयोग को मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।*

