कालीगंगा और मद्महेश्वर परियोजनाओं में बढ़ेगा बिजली उत्पादन, अतिरिक्त मशीनें लगाने की तैयारी
लघु जल विद्युत परियोजनाओं से मजबूत होगी उत्तराखंड की ऊर्जा आत्मनिर्भरता: अजय कुमार सिंह


देहरादून/रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) के प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह ने सोमवार को रुद्रप्रयाग जनपद में निगम की तीन लघु जल विद्युत परियोजनाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने 4 मेगावाट क्षमता की कालीगंगा प्रथम, 4.5 मेगावाट क्षमता की कालीगंगा द्वितीय और 15 मेगावाट क्षमता की मद्महेश्वर जल विद्युत परियोजनाओं की परिचालन एवं रखरखाव व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने विद्युत उत्पादन बढ़ाने और उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
निरीक्षण के दौरान प्रबंध निदेशक ने परियोजनाओं में कार्यरत कार्मिकों से संवाद कर उनके कार्य अनुभव, समस्याओं और दुर्गम पर्वतीय परिस्थितियों में काम करने के दौरान आने वाली चुनौतियों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बीच परियोजनाओं का सुचारु संचालन करने वाले कार्मिक सराहनीय कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कार्मिकों के समर्पण, परिश्रम और प्रतिबद्धता की प्रशंसा की।
विद्युत निकासी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
अजय कुमार सिंह ने मद्महेश्वर और कालीगंगा द्वितीय जल विद्युत परियोजनाओं में उपलब्ध जल संसाधनों तथा विद्युत उत्पादन की संभावनाओं का आकलन किया। उन्होंने दोनों परियोजनाओं में एक-एक अतिरिक्त मशीन स्थापित करने की संभावनाओं पर तकनीकी एवं व्यावहारिक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं में उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के लिए विद्युत निकासी यानी पावर इवैक्युएशन व्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक है। विद्युत निकासी की पर्याप्त क्षमता नहीं होने से उपलब्ध जल संसाधनों के अनुरूप उत्पादन का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में विद्युत निकासी तंत्र की क्षमता बढ़ाने और उत्पादित बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने की व्यवस्था को सुदृढ़ करना जरूरी है।
प्रबंध निदेशक ने संबंधित अधिकारियों को अतिरिक्त मशीनें स्थापित करने की तकनीकी व्यवहार्यता, आवश्यक बुनियादी ढांचे और ग्रिड कनेक्टिविटी से जुड़े पहलुओं का परीक्षण कर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से विद्युत उत्पादन बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।
स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास में अहम भूमिका
प्रबंध निदेशक ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में जल विद्युत ऊर्जा उत्पादन का महत्वपूर्ण और स्वच्छ स्रोत है। हिमालयी क्षेत्रों में स्थापित लघु जल विद्युत परियोजनाएं स्थानीय जल संसाधनों का उपयोग कर बिजली उत्पादन में योगदान देती हैं। साथ ही राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में जल विद्युत परियोजनाओं का संचालन कई भौगोलिक और मौसमी चुनौतियों के बीच किया जाता है। इसलिए परियोजनाओं की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए नियमित रखरखाव, तकनीकी दक्षता, सुरक्षा मानकों का पालन और विद्युत निकासी व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण आवश्यक है।
अजय कुमार सिंह ने कहा कि यूजेवीएनएल राज्य में जल विद्युत उत्पादन को मजबूत करने और उपलब्ध जल संसाधनों का सतत एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। परियोजनाओं में कार्यरत कार्मिक इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को परियोजनाओं के सुचारु संचालन, समयबद्ध रखरखाव और कार्मिकों की समस्याओं के समाधान पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
प्रबंध निदेशक का यह निरीक्षण परियोजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन करने, कार्मिकों से सीधा संवाद स्थापित करने और विद्युत उत्पादन की संभावनाओं को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अतिरिक्त मशीनों की स्थापना और विद्युत निकासी व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों से राज्य में स्वच्छऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं हैं।
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