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माया देवी विश्वविद्यालय में ‘मेरे सपनों का भारत’ थीम पर विविध कार्यक्रम आयोजित

विकसित भारत-2047, भारतीय संस्कृति, योग, मानसिक स्वास्थ्य एवं प्राथमिक चिकित्सा के प्रति विद्यार्थियों को किया जागरूक

माया देवी विश्वविद्यालय में मेरे सपनों का भारत’ थीम के तहत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को विकसित भारत-2047, भारतीय संस्कृति, योग और स्वास्थ्य के प्रति किया गया जागरूक

माया देवी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने उनमें राष्ट्रीय चेतना विकसित करने तथा भारतीय संस्कृति परंपराओं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से *मेरे सपनों का भारत विषय के अंतर्गत विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं* *रचनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड ह्यूमैनिटीज तथा स्कूल ऑफ फार्मेसी एंड पैरामेडिकल साइंसेज, स्कूल ऑफ बी एड एंड स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट द्वारा आयोजित इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।* इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उनके व्यक्तित्व विकास, विचार अभिव्यक्ति, रचनात्मक क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना रहा। *कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को विकसित भारत-2047 के संकल्प, युवा शक्ति की भूमिका और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी के प्रति प्रेरित किया गया।

*विकसित भारत-2047 पर निबंध, चित्रकला एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताएं*
स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी द्वारा ‘विकसित भारत-2047’ विषय पर निबंध लेखन, चित्रकला एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को भारत के उज्ज्वल भविष्य, सतत विकास, कृषि एवं तकनीकी नवाचारों और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता, तार्किक क्षमता और विचारों के माध्यम से एक विकसित, आत्मनिर्भर एवं समृद्ध भारत की परिकल्पना को अभिव्यक्त किया।
*योग और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष सत्र*
स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड ह्यूमैनिटीज द्वारा नवरात्रि युवा संस्कार अभियान के अंतर्गत विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ योग एवं मानसिक स्वास्थ्य पर एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। *इस सत्र में प्रसिद्ध योगाचार्य एवं योगपीठ के संस्थापक डॉ. विपिन जोशी ने विद्यार्थियों को योग के शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।डॉ. विपिन जोशी ने कहा आज के प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण में विद्यार्थियों के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी अत्यंत आवश्यक है। योग, प्राणायाम और ध्यान व्यक्ति को तनाव प्रबंधन, एकाग्रता बढ़ाने तथा भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में सहायता करते हैं।* युवाओं को अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करना चाहिए ताकि वे स्वस्थ शरीर शांत मन और सकारात्मक सोच के साथ अपने शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें। भारतीय योग परंपरा केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि संतुलित और अनुशासित जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है।”
*नवरात्रि के अवसर पर ‘नवदिशा’ कार्यक्रम का आयोजन*
स्कूल ऑफ फार्मेसी एंड पैरामेडिकल साइंसेज द्वारा नवरात्रि उत्सव के अंतर्गत ‘नवदिशा’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने उन्हें भारतीय परंपराओं एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने तथा भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को आपातकालीन परिस्थितियों में प्राथमिक सहायता एवं जीवनरक्षक उपायों की महत्ता समझाई गई। उन्हें बताया गया कि किसी दुर्घटना या अचानक उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में सही समय पर उचित सहायता उपलब्ध कराना किसी व्यक्ति की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों में स्वास्थ्य जागरूकता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया।नवदिशा कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ भारतीय ज्ञान, परंपराओं और स्वास्थ्य संबंधी व्यावहारिक जानकारी प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया।
*विश्वविद्यालय की उपाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) तृप्ति जुयाल सेमवाल ने कहा भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं में प्रतिभा, नवाचार, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वय ही विकसित भारत के सपने को साकार करने का आधार बनेगा*। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं बल्कि विद्यार्थियों को संवेदनशील आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। ऐसे कार्यक्रम युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
*विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) आशीष सेमवाल ने कहा* माया देवी विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान रचनात्मकता और जीवनोपयोगी कौशल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। *मेरे सपनों का भारत जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को राष्ट्र के भविष्य के प्रति अपनी*जिम्मेदारी समझने तथा विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में योगदान देने के लिए प्रेरित करते हैं*। योग मानसिक स्वास्थ्य, भारतीय संस्कृति, कृषि नवाचार और प्राथमिक चिकित्सा जैसे विषयों को शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ना विद्यार्थियों के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विश्वविद्यालय में आयोजित इन विभिन्न कार्यक्रमों ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने नए विचारों को साझा करने तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय विकास के संकल्प को समझने का अवसर प्रदान किया। इन पहलों के माध्यम से माया देवी विश्वविद्यालय ने शिक्षा, संस्कार, स्वास्थ्य जागरूकता और राष्ट्र निर्माण के बीच समन्वय स्थापित करने की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
इस अवसर पर वाइस प्रेसिडेंट प्रो डॉ तृप्ति जुयाल सेमवाल, वाइस चांसलर प्रो डॉ आशीष सेमवाल, रजिस्ट्रार श्रीमती अंबिका जुयाल, डीन एकेडमिक्स प्रो डॉ आर बी सिंह, प्रिंसिपल बीएड डॉ सीता जुयाल, डीन एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी प्रो डॉ महेंद्र सिंह पाल , प्रिंसिपल फार्मेसी डॉ विक्रम सिंह, डीन आर्ट्स एंड ह्यूमैनिटीज डॉ अशद अहमद, डीन मैनेजमेंट डॉ अंजू गैरोला थपलियाल सहित सभी स्कूल के शिक्षक एवं छात्र उपस्थित थे।

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