
जंतर-मंतर पर युवा प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचकर सार्वजानिक रूप से दिया था इस्तीफा : कुख्यात वाल्मीकि गैंग का करीबी सिपाही शेर सिंह हो चुका है गिरफ्तार
देहरादून/नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में उत्तराखंड पुलिस का निलंबित सिपाही शेर सिंह मंच पर पहुंचने के बाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। आंदोलन के दौरान उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के साथ ही उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि और विभागीय रिकॉर्ड को लेकर चर्चाओं में है कुख्यात वाल्मीकि गैंग का करीबी सिपाही शेर सिंह गिरफ्तार हो चुका है

जानकारी के अनुसार शेर सिंह हरिद्वार जिले के रुड़की क्षेत्र का निवासी है और उत्तराखंड पुलिस में तैनात रहते हुए गढ़वाल रेंज के तत्कालीन आईजी का गनर भी रह चुका है। वर्ष 2025 में उसे विभागीय कार्रवाई के तहत निलंबित कर दिया गया था।
इसके बाद शेर सिंह का नाम जमीन से जुड़े एक चर्चित विवाद में सामने आया। आरोप है कि वह कुख्यात प्रवीण वाल्मीकि गैंग की कथित मुखबिरी और सहयोग से जुड़े मामले में एसटीएफ की जांच के दायरे में आया। इसी मामले में उत्तराखंड एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद वह न्यायिक हिरासत में जेल भी रहा और वर्तमान में जमानत पर बाहर है। मामले की न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।
सिपाही शेर सिंह का जंतर मंतर पर CJP के मंच पर इस्तीफा देने सम्बन्धी वीडियो वॉयरल होते ही उत्तराखण्ड पुलिस ने उसकी पूरी कुंडली निकाल ली।
आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती ने प्रेस को जारी वीडियो बयान में बताया कि सियाही शेर सिंह का आपराधिक इतिहास रहा है। और उसे 20 जुलाई 2026 को निलंबित किया गया था।
बीते साल 16 सितंबर को शेर सिंह व एक अन्य सिपाही हसन जैदी को प्रवीण वाल्मीकि गैंग से एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने सिपाही शेर सिंह को जेल भेज दिया था। आईजी निवेदिता कुकरेती ने सिपाही शेर सिंह से जुड़े पुराने आपराधिक मामले भी गिनाए।
उल्लेखनीय है कि शेर सिंह सितंबर 2025 से एक गंभीर आपराधिक प्रकरण में नामजद होने के बाद उत्तराखंड पुलिस से निलंबित चल रहा है। उसके विरुद्ध थाना गंगनहर, जनपद हरिद्वार में मु०अ०सं० 415/2025 के अंतर्गत भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 111(2)(बी), 351(2) एवं 352 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था।
