“विकसित कृषि आत्मनिर्भर भारत” मेले में बोले कृषि मंत्री गणेश जोशी किसान मजबूत तो देश मजबूत
देहरादून 19 मार्च। उत्तरांचल विश्वविद्यालय के स्कूल आफ एग्रीकल्चर व अटल कम्यूनिटी इनोवेशन सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय परिसर में आज दो दिवसीय किसान मेले व कृषि औद्योगिक प्रदर्शन का शुभारम्भ किया गया। मेले का विषय था ‘विकसित कृषि आत्मनिर्भर भारत’। प्रदेश के कृषि व कृषक कल्याण मंत्री श्री गणेश जोशी इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे जबकि समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र जोशी जी ने की। कार्यक्रम में विभिन्न जनपदों से आये किसानों, कृषि वैज्ञानिकों विषय विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों ने भागीदारी की। प्रदेश के विभिन्न विभागों, बैंकों एवं कृषि कम्पनियों के 100 से अधिक संस्थानों ने मेले में अपने स्टाॅल लगाये। यहाँ उन्नत बीज, मिट्टी परीक्षण, जैविक खेती, पशुपालन, बागवानी, कृषि यंत्रों एवं खाद्य प्रसंस्करण से सम्बन्धित जानकारियाँ प्रदर्शित की गई।




इस अवसर पर मिट्टी स्वास्थ कार्ड का विमोचन भी किया गया।ं एक किसान गोस्ठी का आयोजन किया गया जिसमें किसानों और शोधकर्ताओं ने बढ़चढ़ कर भागीदारी की। इस अवसर पर पांच प्रगतिशील किसानों श्री अंकित (ग्राम रामनगर डांडा), श्रीमती ममता भट्ट (ग्राम नाहड), श्रीमती विनिता (ग्राम धारकोट), श्री नारायण सिंह (ग्राम हयोऊ), श्रीमती कांता देवी (ग्राम बिसोई) को सम्मानित किया गया
श्री गणेश जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि यदि किसान मजबूत है तो देश मजबूत है। राज्य निर्माण से अबतक प्रदेश का कृषि क्षेत्र 210,000 हेक्टेयर घटा है जबकि उत्पादन 3 लाख टन बढ़ा है। टिहरी व रूद्रप्रयाग जनपद पूर्ण रूप से जैविक खेती कर रहे है जबकि प्रदेश में 34 प्रतिशत जैविक खेती हो रही है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 50 प्रतिशत जैविक खेती रखा गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक तकनीक, जैविक खेती, मोटे अनाज के उत्पादन तथा संरक्षित खेती को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने ड्रोन तकनीक, मृदा स्वास्थ्य परीक्षण, डिजिटल परामर्श, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना तथा किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया तथा विश्वविद्यालयों से अनुसंधान एवं नवाचार के माध्यम से कृषि को नई दिशा देने का आह्वान किया। उन्होंने उन्होंने उत्तरांचल विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित विशाल कृषक मेले एवं प्रदर्शनी को अनुकरणीय उदाहरण बताया।
श्री जितेन्द्र जोशी जो कि शिक्षाविद के साथ-साथ प्रदेश के बड़े बागवान भी है ने कहा कि आधुनिक खेती का स्वरूप विस्तृत हो गया है। उत्तराखण्ड के परिपेक्ष में उन्नत किस्म के सेब, बेमोसमी सब्जियाँ, जड़ी-बुटियाँ नकदी फसलों में शामिल है। इनके साथ-साथ उत्तराखण्ड के किसान आॅरगेनिक उत्पादों के माध्यम से भी अपनी आमदनी बढ़ा सकते है। उन्होंने किसानों को नकदी फसलों का उत्पादन करने को प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम को विश्वविद्यालय की उपाध्यक्षा सुश्री अंकिता जोशी, कुलपति प्रो. धर्मबुद्धि, उप-कुलपति प्रो. राजेश बहुगुणा व स्कूल आॅफ एग्रीकल्चर के निदेशक डॉ. शरद पांडेय ने भी सम्बोधित किया।
कार्यक्रम में विशेष रूप से पदमश्री प्रेमचंद शर्मा, लोकी मैन डा0 एस0 पी0 सिंह, डा0 राजेन्द्र प्रसाद, प्रो0 राजेश सिंह, प्रो0 अनिता गेहलोत, डा0 रजत सिंह, डा0 संदीप कुमार, मानसी नौटियाल, जयन्ती बल्लभ भट्ट राजा जोशी सहित बड़ी संख्या में किसान और विद्यार्थी उपस्थित थे।
