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लेखक गाँव की सृजनधारा से सजी ‘स्वयंदीपा’: विरासत कला उत्सव में प्रेम, संघर्ष और पुनर्जन्म की भावपूर्ण गाथा

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केद्र, प्रयागराज
(संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार)

 

देहरादून।मंच पर जैसे ही दीप की लौ प्रज्वलित हुई, वातावरण में एक अलौकिक आभा फैल गई—और उसी के साथ आरंभ हुई प्रेम, संघर्ष और पुनर्जन्म की एक ऐसी कथा, जिसने दर्शकों को समय की सीमाओं से परे ले जाकर पौराणिक युग में पहुँचा दिया। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं लेखक गाँव, थानों, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “विरासत कला उत्सव” के पाँचवें दिन प्रस्तुत नाटक ‘स्वयंदीपा’ ने भावनाओं के गहरे उतार-चढ़ाव के साथ दर्शकों के हृदय को झकझोर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मनोज कुमार झा, संपादक, दैनिक जागरण उत्तराखंड द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।


मंगलवार की शाम अरविंद सिंह चंद्रवंशी के निर्देशन में प्रस्तुत नाटक ‘स्वयंदीपा’ ने दर्शकों को एक ऐसी पौराणिक प्रेम गाथा से रूबरू कराया, जिसमें प्रेम, त्याग और पुनर्जन्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। लेखिका माधुरी सुबोध की इस रचना ने मंच पर एक जीवंत कथा का रूप ले लिया।
नाटक की कहानी देवयानी और कच के निष्कलुष प्रेम के इर्द-गिर्द घूमती है, जो देवताओं और असुरों के शाश्वत संघर्ष की पृष्ठभूमि में विकसित होती है। राक्षसों के गुरु शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी और देवगुरु बृहस्पति के पुत्र कच का प्रेम, युद्ध और षड्यंत्रों के बीच बार-बार परीक्षा से गुजरता है।
मृतसंजीवनी विद्या को पाने के उद्देश्य से कच का शुक्राचार्य के आश्रम में प्रवेश, असुरों द्वारा बार-बार उसकी हत्या, और हर बार देवयानी के आग्रह पर उसका पुनर्जीवन—इन दृश्यों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। चरम दृश्य तब आया जब कच स्वयं शुक्राचार्य के उदर में पहुँच जाता है और उन्हें जीवित करने के लिए स्वयं को बलिदान की स्थिति में ला खड़ा करता है। यह दृश्य दर्शकों के हृदय को गहराई तक छू गया।
कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को खूब गुदगुदाया। शुक्राचार्य की भूमिका में मुकेश झा, कच के रूप में हिमांशु और देवयानी के रूप में सपना ने भावनाओं को सजीव कर दिया। सूत्रधार के रूप में अक्सा सैफी तथा शर्मिष्ठा की भूमिका में हर्षिता ने भी अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
कार्यक्रम का सफल संचालन शिवम ढोंडियाल द्वारा किया गया।
इस अवसर पर नीलकंठ भट्ट प्रबंधक डिफेंस पब्लिक स्कूल सहसपुर, साहित्यकार बेचैन कन्डियाल, डॉ. पूजा भारद्वाज पूर्व महानिदेशक आयुष, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. राकेश सुंदरियाल, सचिव बालकृष्ण चमोली, संयुक्त निदेशक डॉ प्रदीप कोठियाल सहित कई लोग उपस्थित रहे।

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