
भाजपा के इंटरनल सर्वे की खबर पर उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने चुटकी ली है।
उन्होंने कहा कि भाजपा के 32 विधायकों के टिकट पर तलवार की खबर अपने आप में बहुत कुछ कहती है। अगर सरकार और विधायकों का काम इतना अच्छा है, तो भाजपा को अपने ही विधायकों के खिलाफ आंतरिक सर्वे कराने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
दसौनी ने कहा कि भाजपा आज “जीत की गारंटी वाले चेहरों” की तलाश में है, क्योंकि उसे अपने मौजूदा विधायकों के खिलाफ जनता की नाराजगी दिखाई दे रही है,
पर सवाल यह है कि 32 विधायक अचानक खराब कैसे हो गए? पांच साल तक भाजपा ने इन्हीं विधायकों को विकास का चेहरा बताया, अब चुनाव नजदीक आते ही इनसे किनारा करने की तैयारी क्यों?
गरिमा के अनुसार असल में यह 32 विधायकों का संकट नहीं, भाजपा सरकार के पांच साल के कामकाज पर जनता के भरोसे का संकट है। यहां तक की मुख्या की सिंहासन बत्तीसी को भी संकट बताया जा रहा है और उनके लिए भी पूरा संगठन सुरक्षित सीट खोज रही है ऐसा बताया जा रहा है
गरिमा ने कहा भाजपा कितने भी चेहरे बदल ले, जनता महंगाई, बेरोजगारी, भर्ती घोटालों, कानून-व्यवस्था, पलायन और भ्रष्टाचार जैसे सवालों को नहीं भूलेगी। चेहरा बदलने से सरकार की जवाबदेही नहीं बदल जाती।
अगर भाजपा सिर्फ “एंटी-इनकंबेंसी मैनेज” करने के लिए विधायकों के टिकट काटती है, तो यह स्वीकार करना होगा कि उसे अपने ही शासन के खिलाफ जनता के गुस्से का अंदाजा हो चुका है।
भाजपा के 32 विधायकों के टिकट पर तलवार नहीं लटकी है, दरअसल भाजपा के पांच साल के कामकाज पर जनता की नाराजगी की तलवार लटक रही है।गरिमा ने कहा कि
हमें भाजपा के टिकट कटने की खुशी नहीं, जनता के मुद्दों की चिंता है। भाजपा चेहरे बदलेगी, लेकिन उत्तराखंड की जनता अब सरकार बदलने का मन बना चुकी है।
गरिमा मेहरा दसौनी
