23 राज्यों के 150 से अधिक स्कूलों के छात्रों ने पेश किए 750 से अधिक स्टार्टअप आइडिया
स्कूली छात्रों को स्टार्टअप की दुनिया से जोड़ रहा यूपीईएस, फ्यूचर फाउंडर्स चैलेंज का दूसरा संस्करण संपन्न
यूपीईएस ने फ्यूचर फाउंडर्स चैलेंज 2026 के माध्यम से इनोवेटर्स की अगली पीढ़ी को सशक्त बनाया
देश के 23 राज्यों और 100 शहरों के 150 से अधिक स्कूलों की 500 से अधिक टीमों ने कैश प्राइज़ और इन्क्यूबेशन के अवसरों के लिए प्रतियोगिता में भाग लिया
देहरादून, 4 नवंबर 2026: यूपीईएस ने अपने रनवे इन्क्यूबेटर के माध्यम से फ्यूचर फाउंडर्स चैलेंज 2026 के दूसरे संस्करण का आयोजन किया। यह एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर की एंटरप्रेन्योरशिप प्रतियोगिता है, जिसमें भारत के कुछ होनहार युवा इनोवेटर्स और उभरते उद्यमियों ने भाग लिया। 1 से 3 नवंबर तक आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्देश्य कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को एंटरप्रेन्योरियल सोच विकसित करने और अपने इनोवेटिव आइडियाज़ को व्यावहारिक बिजनेस वेंचर्स में बदलने के लिए प्रेरित और सशक्त बनाना था।
इस वर्ष फ्यूचर फाउंडर्स चैलेंज यानी एफएफसी में देश के 23 राज्यों और 100 से अधिक शहरों के 150 से अधिक स्कूलों से 1,500 से अधिक छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। 500 से अधिक टीमों ने 750 से अधिक आइडियाज़ साझा किएए जिनमें से प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया के बाद शॉर्टलिस्ट की गई युवा इनोवेटर्स की 30 टीमें तीन दिवसीय राष्ट्रीय एंटरप्रेन्योरशिप चैलेंज के लिए यूपीईएस के देहरादून कैंपस पहुंचीं। इस आयोजन ने छात्रों को अपने आइडियाज़ को बिजनेस वेंचर्स में बदलने और फाउंडर्स तथा इंडस्ट्री लीडर्स की जूरी के सामने उन्हें पिच करने का अवसर दिया।
इस प्रतियोगिता में लगभग 5 लाख के प्राइज़ पूल के माध्यम से इनोवेटिव आइडियाज़ और एंटरप्रेन्योरियल क्षमताओं को सम्मानित किया गया। रायपुर के एन. एच. गोयल वर्ल्ड स्कूल की विजेता टीम के छात्रों ने 1.5 लाख का कैश प्राइज़ जीता। लुधियाना के बीसीएम आर्य मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की टीम ने फर्स्ट रनर-अप के रूप में ₹1 लाख का पुरस्कार हासिल कियाए जबकि लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल की टीम को सेकंड रनर-अप के रूप में 50,000 प्रदान किए गए। इसके अलावा सात अन्य टीमों को 25,000 प्रत्येक के मेरिट अवॉर्ड्स दिए गए।
टॉप तीन स्टार्टअप्स ने रनवे इन्क्यूबेटर के प्रमुख प्री.इन्क्यूबेशन प्रोग्रामए टेकऑफ 6.0 में भी अपनी जगह सुनिश्चित की। यह प्रोग्राम शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स के लिए तैयार किया गया हैए जो प्रतियोगिता के बाद भी युवा फाउंडर्स को अपने आइडियाज़ आगे विकसित करने का अवसर देगा। इसके अलावा टॉप 10 फाइनलिस्ट्स को आठ नॉन.फाइनेंशियल कैटेगरीज़ में भी सम्मानित किया गया। इनमें बेस्ट सीईओ, बेस्ट सीओओ, बेस्ट सीएफओ, बेस्ट सीएमओ, बेस्ट प्रेजेंटेशन, बेस्ट प्रोटोटाइप, बेस्ट टेक्नोलॉजी आइडिया और बेस्ट सस्टेनेबिलिटी आइडिया शामिल थे।
इस आयोजन में इंटरैक्टिव वर्कशॉप्स, एंटरप्रेन्योरियल स्टोरीटेलिंग सेशन्स और प्रतिस्पर्धी पिचिंग राउंड्स आयोजित किए गए। एफएफसी 2026 के प्रारंभिक राउंड की सात सदस्यीय जूरी में विभिन्न क्षेत्रों के फाउंडर्स और बिजनेस ऑपरेटर्स शामिल थे। इनमें एग्रीजॉय के अभिजीत राठौड़, सारथी की ऋचा बंसल, जूसीवर्स की श्रद्धा नेगी, साइनोटेक के उदित हांडा, पड़ाव की शिखा प्रकाश, स्विफ्ट के प्रयास मित्तल और जाग्रमाइंड के सौरभ सक्सेना शामिल थे।
टॉप 10 टीमों ने फाइनल राउंड में जगह बनाई, जहां उन्होंने क्षितिज डोभाल , यूएनएचयूय सौरव सिन्हा, फाउंडर होमवर्सिटी और शिवाली सुगंध, ग्रीन ग्राही की जूरी के सामने अपने आइडियाज़ प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में मनीष मदान, प्रो वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार, यूपीईएस, का उद्घाटन संबोधन भी शामिल था। इसके अलावा, राहुल नैनवाल, रनवे इन्क्यूबेटर के नेतृत्व में एक स्टोरीटेलिंग वर्कशॉप और सौरव सिन्हा का कीनोट संबोधन भी आयोजित किया गया।
2025 में आयोजित अपने पहले संस्करण की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, इस प्रतियोगिता ने लगभग 100 छात्रों को अनुभवी उद्यमियों, इंडस्ट्री मेंटर्स और इन्वेस्टर्स के साथ जुड़ने का मंच प्रदान किया। इससे छात्रों को स्टार्टअप बनाने और अपने आइडियाज़ को पिच करने की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव मिला। इस पहल का उद्देश्य स्कूली छात्रों को वास्तविक दुनिया की समस्याओं की पहचान करने, उनके लिए इनोवेटिव समाधान विकसित करने और अपने आइडियाज़ को संभावित बिजनेस वेंचर्स में बदलने के लिए प्रोत्साहित करके एंटरप्रेन्योरशिप से परिचित कराना है।
डॉ. सुनील राय, वाइस चांसलर, यूपीईएस ने कहा “एंटरप्रिन्योरशीप की शुरुआत किसी समस्या को अलग तरीके से हल करने के आत्मविश्वास और एक मजबूत समाधान विकसित करने के विश्वास से होती है। फ्यूचर फाउंडर्स चैलेंज यूपीईएस के इस विश्वास को दर्शाता है कि ऐसी सोच को कम उम्र से ही विकसित किया जा सकता है और किया जाना चाहिए। भारत के कुछ सबसे होनहार युवा इनोवेटर्स को एक साथ लाकर यह प्रतियोगिता स्कूली छात्रों को क्लासरूम से आगे बढ़ने, सोचने, विचार-मंथन करने और वास्तविक दुनिया के माहौल में अपने आइडियाज़ को परखने का अवसर देती है। इससे उन्हें अनुभवी उद्यमियों से सीखने और यह समझने का मौका मिलता है कि किसी आइडिया को वास्तविक रूप देने के लिए क्या करना पड़ता है।”
प्रो राहुल नैनवाल, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, रनवे इन्क्यूबेटर और सीनियर डायरेक्टर एवं हेड स्कूल ऑफ बिजनेस यूपीईएस ने कहा ‘फ्यूचर फाउंडर्स चैलेंज के दूसरे संस्करण में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली हैए जो स्कूली छात्रों के बीच बढ़ती एंटरप्रेन्योरियल महत्वाकांक्षा को दर्शाती है। इस प्लेटफॉर्म की खास बात यह है कि यह छात्रों को एंटरप्रेन्योरशिप की पूरी यात्रा से परिचित कराता है। इसकी शुरुआत किसी समस्या की पहचान करने और एक आइडिया विकसित करने से होती है, फिर उसे एक मजबूत बिजनेस प्रपोज़िशन में बदलनेए जूरी के सामने पिच करने और उन अनुभवी लोगों से फीडबैक प्राप्त करने तक जाती है, जिन्होंने खुद बिजनेस खड़े किए हैं। एफएफसी 2026 केवल एक प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि युवा इनोवेटर्स के लिए अपनी एंटरप्रेन्योरियल क्षमताओं को पहचानने, आत्मविश्वास विकसित करने और ऐसे समाधान बनाने की दिशा में पहला सार्थक कदम उठाने का मंच हैए जो वास्तविक बदलाव ला सकते हैं।”
फ्यूचर फाउंडर्स चैलेंज युवा इनोवेटर्स को मेंटर्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के साथ जुड़ने, हैंड्स-ऑन वर्कशॉप्स में भाग लेने और अपनी एंटरप्रेन्योरियल क्षमताओं को मजबूत करने का अवसर देता है। यह पहल यूपीईएस के ‘यूनिवर्सिटी ऑफ टुमारो के विज़न और ष्स्टार्टअप यूनिवर्सिटी” के रूप में इनोवेशन तथा एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह स्टार्टअप इंडिया, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी यानी एनईपी 2020 और अटल इनोवेशन मिशन सहित इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरियल टैलेंट को विकसित करने से जुड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को भी समर्थन देती है।
फ्यूचर फाउंडर्स चैलेंज के माध्यम से यूपीईएस और रनवे इन्क्यूबेटर का उद्देश्य स्कूल स्तर के इनोवेशन और व्यापक स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच एक मजबूत कड़ी बनाना है। इससे युवा प्रतिभाओं को समस्याओं की पहचान करने से लेकर उनके समाधान विकसित करने और संभावित रूप से भविष्य के बिजनेस वेंचर्स तैयार करने तक की यात्रा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
यूपीईएस के बारे में
उत्तराखंड राज्य विधानमंडल के यूपीईएस अधिनियम, 2003 के तहत स्थापित, यूपीईएस एक टॉप-रैंक्डए यूजीसी-मान्यता प्राप्त निजी यूनिवर्सिटी है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के नेशनल इंस्टिट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क यानी एनआईआरएफ 2025 के अनुसार, यूपीईएस को यूनिवर्सिटीज़ में 45वां स्थान मिला है। इसके साथ ही लॉ में 18वांए मैनेजमेंट में 36वां और इंजीनियरिंग में 43वां स्थान मिला है। टाइम्स हायर एजुकेशन यानी टीएचई वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 के अनुसार, यूपीईएस अब वैश्विक स्तर पर 501-600 बैंड में और भारत में 5वें स्थान पर है, जो 2025 में 7वें स्थान से बेहतर है। विशेष रूप सेए रिसर्च क्वालिटी में यूपीईएस ने केवल एक वर्ष में 57 स्थानों की छलांग लगाई और वैश्विक स्तर पर 299वां स्थान हासिल किया। इसके अलावाए यूनिवर्सिटी को क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 द्वारा भारत में अकादमिक रेप्युटेशन के आधार पर नंबर 1 निजी यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया है। यह दुनिया की टॉप 2ः यूनिवर्सिटीज़ में शामिल है।
यूपीईएस को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित क्यूएस रेटिंग द्वारा एम्प्लॉयबिलिटी यानी प्लेसमेंट्स में 5 स्टार मिले हैं। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की सूची के अनुसारए यूपीईएस के 50़ फैकल्टी मेंबर्स दुनिया के टॉप 2ः रिसर्चर्स में शामिल हैं।
यूपीईएस अपने सात स्कूलों के माध्यम से ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम्स प्रदान करता हैरू स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंजीनियरिंगए स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस, स्कूल ऑफ डिजाइन, स्कूल ऑफ लॉए स्कूल ऑफ बिजनेस, स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी और स्कूल ऑफ लिबरल स्टडीज़ एंड ह्यूमैनिटीज़। यूपीईएस परिवार में 20,000़ छात्र, 1,500़ फैकल्टी और स्टाफ मेंबर्स और 40,000़ एलुमनाई की एक मजबूत कम्युनिटी शामिल हैए जो अलग-अलग सेक्टर्स में ईवाई, केपीएमजी, बेन एंड कंपनी, मैकिन्से एंड कंपनी, कैपजेमिनी, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, ऑरेकल, नेस्ले, आईटीसी, अदाणी पावर, ओएनजीसी, जीएमआर, टीसीएस, विप्रो, इन्फोसिस, अमेज़न, फ्लिपकार्ट, एक्सेंचर, डेलॉइट और अन्य प्रमुख ब्रांड्स में काम करते हैं।

