NAAC मूल्यांकन एवं प्रत्यायन प्रक्रिया, गुणवत्ता संवर्धन और उच्च शिक्षा में शैक्षणिक उत्कृष्टता के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी

माया देवी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) के मूल्यांकन एवं प्रत्यायन की प्रक्रिया को समझने तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता संवर्धन के उद्देश्य से यूनिवर्सिटी के मिनी ऑडिटोरियम में तीन दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकों एवं कर्मचारी ने प्रतिभाग किया।
*इस कार्यक्रम के दौरान मुख्य रिसोर्स पर्सन डॉ. संजीव सेठ ने NAAC के मूल्यांकन एवं प्रत्यायन से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने NAAC के मूल्यांकन मानदंडों, संस्थागत गुणवत्ता आश्वासन, गुणवत्ता संबंधी दस्तावेजों के संकलन, डेटा प्रबंधन, अकादमिक एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं तथा आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) की भूमिका पर प्रकाश डाला।* उन्होंने कहा कि NAAC प्रत्यायन केवल एक मूल्यांकन प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह विश्वविद्यालय में निरंतर गुणवत्ता सुधार, पारदर्शिता और शैक्षणिक उत्कृष्टता सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने सभी शिक्षकों को गुणवत्ता आधारित शैक्षणिक वातावरण विकसित करने और संस्थागत विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
*इस अवसर पर विश्वविद्यालय की वाइस प्रेसिडेंट प्रो. (डॉ.) तृप्ति जूयाल सेमवाल ने कहा कि वर्तमान उच्च शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। NAAC प्रत्यायन विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गुणवत्ता को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक शिक्षक एवं कर्मचारी की सामूहिक भागीदारी से ही गुणवत्ता के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है।* उन्होंने इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को संस्थागत विकास के लिए उपयोगी बताया।
*विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) आशीष सेमवाल ने अपने संबोधन में कहा कि NAAC की तैयारी केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे विश्वविद्यालय की दैनिक शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए*। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, विद्यार्थियों का समग्र विकास और प्रभावी प्रशासन किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की पहचान हैं। उन्होंने सभी विभागों से निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कार्य करने तथा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को और अधिक सुदृढ़ बनाने का आह्वान किया।
*तीन दिवसीय इस FDP के माध्यम से प्रतिभागियों को NAAC मूल्यांकन प्रक्रिया, गुणवत्ता आश्वासन, संस्थागत प्रदर्शन और आवश्यक दस्तावेजीकरण के संबंध में व्यावहारिक एवं महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय में गुणवत्ता की संस्कृति विकसित करना तथा NAAC प्रत्यायन की दिशा में सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना रहा।*
इस अवसर पर वाइस प्रेसिडेंट प्रो डॉ तृप्ति जुयाल सेमवाल, वाइस चांसलर प्रो डॉ आशीष सेमवाल, रजिस्ट्रार श्रीमती अंबिका जुयाल, डीन एकेडमिक्स प्रो डॉ आर बी सिंह, प्रिंसिपल बीएड डॉ सीता जुयाल, आईक्यूएसी कोऑर्डिनेटर प्रो. डॉ अंजू गैरोला थपलियाल सहित सभी स्कूल के प्रिंसिपल, डीन एवं शिक्षक उपस्थित थे।

