यूकॉस्ट द्वारा “रिवर रिजुविनेशन यूजिंग जीआईएसः कॉन्सेप्ट्स एंड स्ट्रेटेजीज विद स्पेसिफिक रेफरेंस टू द रेनफेड रिवर्स (भौगोलिक सूचना तंत्र द्वारा नदी पुनर्जनन: वर्षा जल आधारित नदियों के विशेष संदर्भ में सिद्धांत एवं कार्यनीति)” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन
उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा संचालित “मां धरा नमन के अंतर्गत जल शिक्षा कार्यक्रम” में आज दिनांक 30 अप्रैल 2026 को “रिवर रिजुविनेशन यूजिंग जीआईएसः कॉन्सेप्ट्स एंड स्ट्रेटेजीज विद स्पेसिफिक रेफरेंस टू द रेनफेड रिवर्स (भौगोलिक सूचना तंत्र द्वारा नदी पुनर्जनन: वर्षा जल आधारित नदियों के विशेष संदर्भ में सिद्धांत एवं कार्यनीति) विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन परिषद के सभागार में किया गया ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि यूकॉस्ट द्वारा जल स्रोतों के महत्व को देखते हुए आम जनमानस एवं विद्यार्थियों को जोड़ने के उद्देश्य से “मां धरा नमन के अंतर्गत वाटर एजुकेशन कार्यक्रम प्रादेशिक स्तर पर चलाया जा रहा है जिसका उद्देश्य प्रदेश के जल संसाधनों का संरक्षण एवं उनके वैज्ञानिक अध्ययन कम्युनिटी पार्टिसिपेशन के माध्यम से आगे बढ़ाया जाए ।
प्रो. पंत ने कहा कि भविष्य की जल चुनौतियों से निपटने के लिए जल स्रोतों का वैज्ञानिक अध्ययन बहुत आवश्यक है । उन्होंने कहा कि यूकॉस्ट द्वारा ‘मां धरा नमन’ कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश के जल स्रोतों का संरक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन प्रारंभ किया गया है।
इस अवसर पर यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ डी.पी. उनियाल ने यूकॉस्ट द्वारा राज्य भर में चलाए जा रहे विभिन्न वैज्ञानिक कार्यक्रमों व परियोजनाओं पर प्रकाश डाला ।
कार्यक्रम संयोजक यूकॉस्ट वैज्ञानिक डॉ भवतोष शर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की एवं विषय विशेषज्ञ प्रोफेसर जे. एस. रावत पूर्व विभागाध्यक्ष भूगोल विभाग, कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल का परिचय कराया।
तकनीकी सत्र में प्रोफेसर जे. एस. रावत ने “रिवर रिजुविनेशन यूजिंग जीआईएसः कॉन्सेप्ट्स एंड स्ट्रेटेजीज विद स्पेसिफिक रेफरेंस टू द रेनफेड रिवर्स (भौगोलिक सूचना तंत्र द्वारा नदी पुनर्जनन: वर्षा जल आधारित नदियों के विशेष संदर्भ में सिद्धांत एवं कार्यनीति) विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया।
उन्होंने अपने व्याख्यान में भारतीय हिमालयी क्षेत्र से निकलने वाली नदियों, स्प्रिंग्स की स्थिति, जल से संबंधित समस्याओं, उसके निराकरण पर प्रकाश डालते हुए विस्तार से बताया। उन्होंने नौले धारे एवं नदियों का जल विज्ञान, ग्रीष्म ऋतु में वर्षा जल पोषित नदियों की स्थिति, कोसी जलागम क्षेत्र में भूजल प्रबंधन, जल स्रोतों के पुनर्जन्म में जीआईएस के अनुप्रयोग, साई रिवर जलागम, जाट गंगा व सरयू नदी जलागम क्षेत्र में रिचार्ज, वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज, जलागम क्षेत्र में रिचार्ज, रिचार्ज क्षेत्र में सैटेलाइट डाटा के अनुप्रयोग, भूजल रिचार्ज से संबंधित भूगर्भ विज्ञान भूविज्ञान की वैज्ञानिक जानकारी आदि को विस्तार से बताया।
उन्होंने विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के साथ मिलकर जन सहभागिता के आधार पर जल स्रोतों के प्रबंधन एवं भूजल रिचार्ज से संबंधित धरातलीय कार्यों को आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने राज्य सरकार के अन्य संस्थान जैसे ‘सारा’ आदि द्वारा स्प्रिंग्स के रिजुविनेशन की दिशा में किए जा रहे विभिन्न वैज्ञानिक कार्यों के बारे में भी बताया।
कार्यक्रम में उत्तराखंड के पर्वतीय भूभाग के विभिन्न विद्यालयों में विद्यार्थियों द्वारा सामूहिक रूप से प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रतिभाग किया गया।
कार्यक्रम में साइंस सिटी देहरादून के सलाहकार डॉ. जी. एस. रौतेला, यूकोस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ डीपी उनियाल, यूकॉस्ट के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी बृजेश आगरी, डॉ भवतोष शर्मा, डॉ ओम प्रकाश नौटियाल, डॉ पीयूष जोशी, डॉ मंजू सुंदरियाल, डॉ मनमोहन सिंह रावत, डॉ जगबीर असवाल, परियोजना अधिकारी श्री नरेश चंद्र गौर, वैज्ञानिक अधिकारी श्रीमती जागृति उनियाल, श्रीमती प्रियंका अधिकारी, मनोज कन्याल, रामदेव घुनियाल, विकास नौटियाल, ओम जोशी, उमेश जोशी, राजदीप जंग, अर्चित पांडे, मानसखंड साइंस सेंटर अल्मोड़ा के वैज्ञानिक, उत्तराखंड राज्य के विभिन्न शिक्षण संस्थाओं, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों के स्नातक स्नातकोत्तर छात्र-छात्राएं, शोधार्थी एवं राज्य के विभिन्न जनपदों पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पौड़ी, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, चमोली एवं देहरादून जिलों से यूकॉस्ट के ‘पर्यावरण एवं विज्ञान चेतना केंद्र’ के शिक्षक एवं विद्यार्थियों, यूकॉस्ट स्टेम प्रयोगशालाओं से विद्यार्थी एवं शिक्षक, पीएमयू की राज्य में स्थित 26 प्रयोगशालाओं के कार्मिक सहित 160 अधिक लोगों ने सामूहिक एवं व्यक्तिगत रूप से ऑफलाइन व ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ मुकेश शर्मा एमिरेट्स वैज्ञानिक डॉक्टर जीसीएस नेगी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे एवं जल विज्ञान के विमर्श में सहभागिता की। कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान उपस्थित विषय विशेषज्ञों द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का संचालन यूकॉस्ट वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ भवतोष शर्मा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन वैज्ञानिक डॉ मंजू सुंदरियाल ने किया।
