
निजी सचिव पर ईडी कार्रवाई के बाद शक्ति प्रदर्शन की चर्चा, समर्थकों ने जगह-जगह किया स्वागत
देहरादून। करीब तीन महीने की अस्वस्थता के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखंड में सक्रिय राजनीतिक वापसी का संकेत दिया है। निजी सचिव चंदन सिंह जीना से जुड़े ईडी प्रकरण के बाद उनकी यह पहली बड़ी सार्वजनिक मौजूदगी रही, जिसे राजनीतिक गलियारों में शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।

उन्होंने मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा पर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों को नमन किया, हरिद्वार में गंगा पूजन किया और देहरादून कचहरी परिसर स्थित शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। सोमवार को उनका कार्यक्रम धार्मिक रहा। वे विधायकों और कार्यकर्ताओं के साथ देहरादून के चार सिद्ध मंदिरों—कालू सिद्ध (भानियावाला), लक्ष्मण सिद्ध (हर्रावाला), माणक सिद्ध (बड़ोवाला) और मांडू सिद्ध (झाझरा)—पहुंचे। इन स्थलों पर पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।
ईडी ने चंदन सिंह जीना के आवास से नकदी, सोना और लग्जरी घड़ियां बरामद करने का दावा किया है। मामला 2016 की यूकेएसएसएससी भर्ती परीक्षा से जुड़ा बताया जा रहा है। इसके बाद रावत ने कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन अब वे फिर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने सरकार को चुनौती दी है कि उनके तीन वर्ष के मुख्यमंत्रित्वकाल की जांच के लिए आयोग बैठाया जाए।
भाजपा इसे फ्लॉप रोड शो और राजनीतिक नाटक बता रही है। विपक्ष का आरोप है कि मुस्लिम यूनिवर्सिटी जैसे पुराने विवादों के बाद रावत मंदिरों के जरिए संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। रावत पक्ष इसे जनता से जुड़ने और आस्था का कार्यक्रम बता रहा है।
अस्वस्थता के बावजूद उनका यह अचानक सक्रिय होना राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए दोनों पक्ष इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं।
