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मदरसों और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के नियमन पर मंथन: विभागीय समन्वय के लिए SOP बनाने पर सहमति

बाल अधिकार संरक्षण आयोग, अल्पसंख्यक आयोग और शिक्षा विभाग की संयुक्त बैठक में पारदर्शिता, बाल सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर

आज उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा मदरसों एवं अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के विनियमन तथा विभागीय समन्वय के संबंध में अल्पसंख्यक आयोग एवं शिक्षा विभाग के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

### **प्रेस नोट

आज दिनांक **25 जुलाई 2026** को **उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग** द्वारा **मदरसों एवं अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के विनियमन तथा विभागीय समन्वय** के संबंध में **अल्पसंख्यक आयोग एवं शिक्षा विभाग** के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

**बैठक में उपस्थित अधिकारी/पदाधिकारी:**

* मा० सदस्य श्री दयाल सिंह
* मा० सदस्य श्रीमती बबीता सहौत्रा
* सचिव डॉ० शिव कुमार बरनवाल
* अनुसचिव डॉ० सतीश कुमार सिंह
* श्री बलजीत सिंह सोनी, उपाध्यक्ष, अल्पसंख्यक आयोग
* डॉ० सुरेन्द्र सिंह नेगी, उपशिक्षा निदेशक, शिक्षा विभाग
* श्री सुरजीत सिंह

### बैठक के प्रमुख उद्देश्य

* राज्य में संचालित मदरसों एवं अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा।
* वर्तमान कानूनों एवं नियमों के अनुरूप विभागीय समन्वय स्थापित करना।
* अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के पंजीकरण एवं नियामक तंत्र की समीक्षा।
* अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की भूमिका, अधिकार एवं उत्तरदायित्व स्पष्ट करना।
* शिक्षा विभाग, अल्पसंख्यक आयोग एवं बाल अधिकार संरक्षण आयोग के मध्य समन्वित कार्य प्रणाली विकसित करना।
* ऐसी **स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP)** तैयार करना जिससे किसी एक विभाग की कार्यवाही दूसरे विभाग के उद्देश्यों के विपरीत न हो।

### बैठक में लिए गए प्रमुख संज्ञान एवं सुझाव

1. कई शिक्षण संस्थान स्वयं को **अल्पसंख्यक (माइनॉरिटी) संस्थान** बताकर संचालित कर रहे हैं, जबकि उनके पास राज्य सरकार अथवा भारत सरकार द्वारा जारी वैध अल्पसंख्यक दर्जे का प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं है।
2. स्पष्ट किया गया कि बिना वैध प्रमाण-पत्र के कोई भी संस्थान स्वयं को अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान नहीं कह सकता।
3. भारतीय संविधान के **अनुच्छेद 30** के अंतर्गत अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा एवं धर्म के अनुरूप शिक्षण संस्थान स्थापित एवं संचालित करने का अधिकार प्राप्त है।
4. यह भी संज्ञान में आया कि कुछ कथित अल्पसंख्यक विद्यालयों में संबंधित अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों की संख्या अत्यंत कम या नगण्य है।
5. आईसीएसई, सीबीएसई एवं उत्तराखण्ड बोर्ड आदि केवल बोर्ड संबद्धता (Affiliation) प्रदान करते हैं, जबकि विद्यालयों की मान्यता देने का अधिकार शिक्षा विभाग के पास है।
6. सभी विद्यालयों द्वारा आयोग की **SOP**, ऑडिट प्रोफार्मा एवं समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए।
7. विद्यालयों में **वंदे मातरम्, राष्ट्रगान, मातृभाषा, राष्ट्रगीत, भारतीय संस्कृति के संवर्धन तथा टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों** की जानकारी का प्रभावी अनुपालन कराया जाए।
8. कक्षा-वार प्रवेश के समय प्रत्येक विद्यार्थी के **जन्म प्रमाण-पत्र का सत्यापन** अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि निर्धारित आयु मानकों का उल्लंघन न हो।
9. निजी विद्यालयों में छह वर्ष से कम आयु के बच्चों के प्रवेश संबंधी निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए।
10. **पॉक्सो अधिनियम (POCSO)** के प्रभावी अनुपालन हेतु संयुक्त निरीक्षण, निगरानी एवं विभागवार उत्तरदायित्व निर्धारित किए जाएं।
11. मदरसों में संचालित छात्रावासों, भोजन व्यवस्था तथा शयन (बेड) व्यवस्था के लिए निर्धारित मानकों का शिक्षा विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण एवं अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
12. विभिन्न विभागों के मध्य सूचना आदान-प्रदान हेतु प्रभावी समन्वय तंत्र विकसित किया जाए।
13. शिक्षा व्यवस्था एवं शिक्षण प्रणाली को अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों द्वारा संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति बनी।

बैठक में सभी प्रतिभागियों ने राज्य में संचालित मदरसों एवं अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में **पारदर्शिता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बाल अधिकारों की सुरक्षा तथा कानूनों के प्रभावी अनुपालन** के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करने पर सहमति व्यक्त की।

बैठक में उपस्थित अधिकारी/पदाधिकारी:

* मा० सदस्य श्री दयाल सिंह
* मा० सदस्य श्रीमती बबीता सहौत्रा
* सचिव डॉ० शिव कुमार बरनवाल
* अनुसचिव डॉ० सतीश कुमार सिंह
* श्री बलजीत सिंह सोनी, उपाध्यक्ष, अल्पसंख्यक आयोग
* डॉ० सुरेन्द्र सिंह नेगी, उपशिक्षा निदेशक, शिक्षा विभाग
* श्री सुरजीत सिंह

बैठक के प्रमुख उद्देश्य

* राज्य में संचालित मदरसों एवं अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा।
* वर्तमान कानूनों एवं नियमों के अनुरूप विभागीय समन्वय स्थापित करना।
* अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के पंजीकरण एवं नियामक तंत्र की समीक्षा।
* अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की भूमिका, अधिकार एवं उत्तरदायित्व स्पष्ट करना।
* शिक्षा विभाग, अल्पसंख्यक आयोग एवं बाल अधिकार संरक्षण आयोग के मध्य समन्वित कार्य प्रणाली विकसित करना।
* ऐसी **स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP)** तैयार करना जिससे किसी एक विभाग की कार्यवाही दूसरे विभाग के उद्देश्यों के विपरीत न हो।

### बैठक में लिए गए प्रमुख संज्ञान एवं सुझाव

1. कई शिक्षण संस्थान स्वयं को **अल्पसंख्यक (माइनॉरिटी) संस्थान** बताकर संचालित कर रहे हैं, जबकि उनके पास राज्य सरकार अथवा भारत सरकार द्वारा जारी वैध अल्पसंख्यक दर्जे का प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं है।
2. स्पष्ट किया गया कि बिना वैध प्रमाण-पत्र के कोई भी संस्थान स्वयं को अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान नहीं कह सकता।
3. भारतीय संविधान के **अनुच्छेद 30** के अंतर्गत अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा एवं धर्म के अनुरूप शिक्षण संस्थान स्थापित एवं संचालित करने का अधिकार प्राप्त है।
4. यह भी संज्ञान में आया कि कुछ कथित अल्पसंख्यक विद्यालयों में संबंधित अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों की संख्या अत्यंत कम या नगण्य है।
5. आईसीएसई, सीबीएसई एवं उत्तराखण्ड बोर्ड आदि केवल बोर्ड संबद्धता (Affiliation) प्रदान करते हैं, जबकि विद्यालयों की मान्यता देने का अधिकार शिक्षा विभाग के पास है।
6. सभी विद्यालयों द्वारा आयोग की **SOP**, ऑडिट प्रोफार्मा एवं समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए।
7. विद्यालयों में **वंदे मातरम्, राष्ट्रगान, मातृभाषा, राष्ट्रगीत, भारतीय संस्कृति के संवर्धन तथा टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों** की जानकारी का प्रभावी अनुपालन कराया जाए।
8. कक्षा-वार प्रवेश के समय प्रत्येक विद्यार्थी के **जन्म प्रमाण-पत्र का सत्यापन** अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि निर्धारित आयु मानकों का उल्लंघन न हो।
9. निजी विद्यालयों में छह वर्ष से कम आयु के बच्चों के प्रवेश संबंधी निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए।
10. **पॉक्सो अधिनियम (POCSO)** के प्रभावी अनुपालन हेतु संयुक्त निरीक्षण, निगरानी एवं विभागवार उत्तरदायित्व निर्धारित किए जाएं।
11. मदरसों में संचालित छात्रावासों, भोजन व्यवस्था तथा शयन (बेड) व्यवस्था के लिए निर्धारित मानकों का शिक्षा विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण एवं अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
12. विभिन्न विभागों के मध्य सूचना आदान-प्रदान हेतु प्रभावी समन्वय तंत्र विकसित किया जाए।
13. शिक्षा व्यवस्था एवं शिक्षण प्रणाली को अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों द्वारा संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति बनी।

बैठक में सभी प्रतिभागियों ने राज्य में संचालित मदरसों एवं अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में **पारदर्शिता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बाल अधिकारों की सुरक्षा तथा कानूनों के प्रभावी अनुपालन** के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करने पर सहमति व्यक्त की।

 

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