Homeराज्य समाचारबेस्ट प्रैक्टिसः लाॅ काॅलेज देहरादून में छात्रों ने पढ़ाई संग शिक्षकों के...

बेस्ट प्रैक्टिसः लाॅ काॅलेज देहरादून में छात्रों ने पढ़ाई संग शिक्षकों के मार्गदर्शन में लिखी किताबें, हुआ विमोचन

लाॅ जर्नलः “देहरादून लाॅ रिव्यू” संग दस किताबों का विमोचन हुआ

देहरादून 14 मई। उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लाॅ काॅलेज देहरादून में आज एक अनोखी बेस्ट प्रैक्टिस को जन्म दिया गया। लाॅ के छात्रों द्वारा शिक्षकों के मार्गदर्शन में लिखी गई 10 किताबों का विमोचन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित लाॅ जर्नल, ‘देहरादून लाॅ रिव्यू’ जिसका प्रकाशन भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में हुआ का भी विमोचन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 धर्मबुद्धि इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे।
लाॅ काॅलेज के डीन एवं विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो0 राजेश बहुगुणा ने कहा कि पुस्तकें वर्तमान की धरोहर व भविष्य की पथप्रदर्शक होती है। उन्होंने बताया कि लाॅ के प्रत्येक छात्र को लेखन व प्रकाशन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ‘द स्काॅलर स्क्रिप्टः सहयोगात्मक विधिक प्रकाशन’ का शुभारम्भ किया गया है। यहाँ पढ़ रहे छात्र अब पढ़ाई के साथ-साथ छात्र जीवन में अपने लेखन व प्रकाशन को भी सुनिश्चित कर रहे है। छात्रों के लेखों के प्रकाशन पूर्व संपादन हेतु अनुभवी शिक्षकों का पैनल बनाया गया है। लक्ष्य रखा गया है कि यहाँ पढ़ने वाला हर छात्र अपने छात्र जीवन में कम से कम एक प्रकाशन अवश्य करें।
अपने सम्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 धर्मबुद्धि ने कहा कि छात्र जीवन में लेखक या सम्पादक की उपाधि पाना एक विशेष उपलब्धि है। ऐसे समय में जबकि युवा लिखने व पढ़ने जैसे कार्यों से विरक्त होता जा रहा है, लाॅ काॅलेज देहरादून द्वारा छात्र प्रकाशन का कार्य अपने आप में एक अनूठी बेस्ट प्रैक्टिस है। लाॅ के छात्रों ने 10 किताबों के माध्यम से सैकड़ों लेख लिखकर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
इन पुस्तकों का हुआ विमोचनः भारत का संविधानः 21वीं सदी में इसकी विकसित होती गति, भारत में आंतकवाद की उभरती सामाजिक-विधिक चुनौतियाँः एक विश्लेषणात्मक अध्ययन, भविष्य का विनियमनः कानून, प्रौद्योगिकी और संस्कृति के माध्यम से स्थिरता, सतत भविष्यः नवाचार, कानून और समुदाय का एकीकरण, लचीले मार्गः स्थिरता के कानूनी और तकनीकी आयाम, भारत और अंतर्राष्ट्रीय विधिक राजनीतिः बदलते विश्व में व्यवस्था का निर्धारण, पर्यावरणीय अपराधों के विरुद्ध अभियोजन, बौद्धिक संपदा अधिकार और पारंपरिक ज्ञान का निरंतरता का संगम, ऊर्जा, पर्यावरण और सतत विकास – विधिक आयाम,
कार्यक्रम में मुख्य रूप से निदेशक, प्रो0 राजेश सिंह, प्रो0 अनिता गेहलोत, प्रो0 राधेश्याम झा, प्रो0 रामवीर तंवर, कुमार आशुतोष, डा0 अंजुम परवेज, डा0 रमाकांत त्रिपाठी, डा0 लक्ष्मी प्रिया विंजामूरी, डा0 भावना अरोड़ा डा0 अभिरंजन दीक्षित, डा0 एश्वर्य सिंह, अशोक डोभाल, डा0 रमाकांत त्रिपाठी, वत्सल चैधरी, अमित कुमार, डा0 प्रेरणा कैन्थोला, अनुज सेठी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
प्रो0 राजेश बहुगुणा
उपकुलपति

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

STAY CONNECTED

123FansLike
234FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest News