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दून डिफेंस ड्रीमर्स में अध्यनरत छात्रा के साथ हुई घटना का राज्य बाल संरक्षण आयोग ने लिया गंभीरता से संज्ञान 

 

हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुई थी छात्रा : अभिभावकों ने लगाया आरोप , संस्थान द्वारा देर से दी गई जानकारी, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

अभिभावकों को नहीं लगाया आरोप: तीसरी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के पश्चात संस्थान अथवा छात्रावास प्रबंधन द्वारा उन्हें तत्काल कोई सूचना नहीं दी गई। अभिभावकों को घटना की जानकारी किसी अन्य छात्रा के दूरभाष के माध्यम से प्राप्त हुई। शिकायत के


आज दिनांक 11 जून 2026 को डून डिफेंस ड्रीमर्स में अध्ययनरत एक बालिका के माता-पिता श्री राहुल भगौरे एवं श्रीमती गगौर, निवासी आगरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना से मिले तथा अपनी पुत्री के साथ घटित अत्यंत गंभीर घटना के संबंध में विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की।

अभिभावकों द्वारा अवगत कराया गया कि उनकी पुत्री डून डिफेंस ड्रीमर्स से संबद्ध छात्रावास की तीसरी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के पश्चात संस्थान अथवा छात्रावास प्रबंधन द्वारा उन्हें तत्काल कोई सूचना नहीं दी गई। अभिभावकों को घटना की जानकारी किसी अन्य छात्रा के दूरभाष के माध्यम से प्राप्त हुई। शिकायत के अनुसार बालिका को गंभीर अवस्था में दून अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से उसे मैक्स अस्पताल रेफर किया गया और वर्तमान में उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।

अभिभावकों ने आयोग को बताया कि घटना के समय छात्रावास में सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कमजोर थी। रात्रिकाल में छात्रावास परिसर के बाहर कोई सुरक्षा कर्मी अथवा चौकीदार मौजूद नहीं था। बालिका को अस्पताल पहुँचाने में संस्थान प्रबंधन की अपेक्षा स्थानीय लोगों एवं एक रसोइए की भूमिका रही। साथ ही घटना की सूचना समय पर अभिभावकों, पुलिस अथवा अन्य संबंधित अधिकारियों को नहीं दी गई।

बालिका के परिजनों ने आयोग को यह भी अवगत कराया कि उन्हें वर्तमान में चल रही जांच की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह है। उनके अनुसार अब तक की जांच में सभी तथ्यों को समुचित रूप से नहीं देखा जा रहा है तथा मामले की वस्तुस्थिति सामने लाने के लिए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है। परिजनों ने उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग से अनुरोध किया है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इस संबंध में आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है, जिसमें एक बालिका का जीवन संकट में है। किसी भी आवासीय छात्रावास अथवा शैक्षणिक संस्थान में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि किसी प्रकार की लापरवाही, सुरक्षा मानकों की अनदेखी अथवा बाल संरक्षण प्रावधानों का उल्लंघन पाया जाता है तो आयोग आवश्यक कार्रवाई की संस्तुति करेगा।

डॉ. खन्ना ने कहा कि पूर्व में भी उक्त कोचिंग संस्थान के संबंध में विभिन्न प्रकार की शिकायतें आयोग के संज्ञान में आती रही हैं। इसके अतिरिक्त आयोग को समय-समय पर विभिन्न कोचिंग संस्थानों एवं उनसे संबद्ध छात्रावासों के संबंध में बच्चों की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य, आवासीय सुविधाओं तथा बाल अधिकारों के संरक्षण से जुड़ी शिकायतें प्राप्त होती रहती हैं। यह विषय अत्यंत गंभीर है तथा ऐसे संस्थानों के संचालन में बाल संरक्षण मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

देहरादून देशभर में अपनी शैक्षणिक पहचान के लिए जाना जाता है, किन्तु तेजी से बढ़ रहे कोचिंग संस्थानों एवं छात्रावासों के बीच बच्चों की सुरक्षा एवं कल्याण को लेकर विशेष सतर्कता अपेक्षित है। आयोग इस मामले को केवल एक व्यक्तिगत घटना के रूप में नहीं बल्कि व्यापक बाल सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी देख रहा है।

आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से विस्तृत आख्या एवं आवश्यक अभिलेख तलब करने का निर्णय लिया है तथा प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

**डॉ. गीता खन्ना**
अध्यक्ष
उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग

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