टनल द्वारा यात्रा मार्ग पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम से मिलेगी निजात
उत्तराखंड में इस वर्ष चार धाम यात्रा ऐतिहासिक रूप से श्रद्धालुओं का आस्था के केंद्र बन रही है। लाखों की संख्या में देश-विदेश की श्रद्धालु भगवान केदारनाथ पर भगवान बदरीनाथ के दर्शन करने पहाड़ों का रुख कर रहे हैं, ऐसे में यात्रा को व्यवस्थित और सुगम बनाये रखने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार द्वारा लगातार महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री के स्पेशल निर्देशन पर केदारनाथ हाईवे और बद्रीनाथ हाईवे को जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण टनल को जिला प्रशासन द्वारा स्थाई रूप से खोल दिया गया है। यह टनल का लाभ यात्रियों के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में कार्य करेगी। इससे यात्रा मार्ग पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम से निजात मिल जाएगी। टनल के खुलने से विशेष कर उन श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा जो केदारनाथ हाईवे से यात्रा कर रहे हैं। वह अब बेलनी पोखरी मार्ग होते हुए सीधे बदरीनाथ हाईवे से जुड़ सकेंगे। इसके अलावा यह मार्ग रुद्रप्रयाग के मुख्य बाजार तक भी आसानी से पहुंच प्रदान करेगा। जिससे न केवल यात्रियों को सहूलियत होगी बल्कि स्थानीय व्यापारियों और निवासियों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। प्रशासन की ओर से इस टनल के रख रखाव और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से यात्रियों को बचाया जा सके। संबंधित विभागों को सतर्क रहने और मार्ग की निगरानी करते रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि चार धाम यात्रा उत्तराखंड के आस्था, संस्कृति और अर्थव्यवस्था का केंद्र है। सरकार की प्राथमिकता है कि हर यात्री को सुरक्षित, सुविधाजनक और अविस्मरणीय यात्रा का अनुभव मिले, इसी उद्देश्य से राज्य में यात्रा मार्गो को चौड़ा करने, वैकल्पिक मार्ग तैयार करने और आपातकालीन व्यवस्थाएं सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहे हैं। टनल खुलने से यात्रा मार्ग की भीड़ कम होगी, जिससे विशेष कर आपातकालीन सेवाओं , एंबुलेंस, पुलिस और राहत वाहनों की आवाजाही भी सहज हो सकेगी। स्थानीय प्रशासन , पुलिस विभाग, लोक निर्माण विभाग द्वारा इस मार्ग पर संयुक्त निगरानी रखी जा रही है। यह यात्रा सीजन के दौरान इस तरह के कदम राज्य सरकार के सतत प्रयासों का प्रमाण है कि चार धाम यात्रा को न केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बल्कि एक सुव्यवस्थित प्रशासनिक मॉडल के रूप में भी स्थापित किया जा रहा है।