
धराली, उत्तरकाशी की आपदा के बाद समस्त उत्तराखंड राज्य ने सीख ली है की नदियों के ऊपर किसी किस्म का निर्माण नहीं होना चाहिए।
आज देहरादून शहर के अलग-अलग हिस्सों में बरसात के रौद्र रूप ने 26 किलोमीटर प्रस्तावित रिस्पना बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर के ऊपर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
सवाल यह है क्लाइमेट क्राइसिस और एक्सट्रीम वेदर इवेंट के इस घातक दौर में क्या देहरादून शहर को इस परियोजना के साथ आगे बढ़ना चाहिए?
शहर के लिए ट्रैफिक एक बड़ी समस्या है लेकिन उसका समाधान हमें पब्लिक ट्रांसपोर्ट, वॉकिंग, साइकलिंग और अन्य माध्यम से निकलना चाहिए, लाखों टन सीमेंट और कंक्रीट को अपनी नदियों में पाट कर आगे नहीं बढ़ना चाहिए।
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