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बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने प्रतिष्ठित NGO में यौन शोषण संबंधी शिकायत पर किया मदरसे का निरीक्षण 

 

आज विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों एवं एक प्रतिष्ठित एनजीओ द्वारा प्राप्त यौन शोषण संबंधी शिकायत के आधार पर आयोग द्वारा संबंधित मदरसे का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान अनेक गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं, जो अत्यंत चिंताजनक हैं।

निरीक्षण में पाया गया कि संस्थान में आवश्यक नक्शा पासिंग एवं अग्नि सुरक्षा मानकों का पूर्णतः अभाव है। बच्चों के रहने हेतु बेसमेंट में हॉस्टल संचालित किया जा रहा था, जहाँ अत्यंत छोटे कमरों में निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक संख्या में बच्चों को रखा गया था। यह बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं मानसिक स्थिति के दृष्टिकोण से गंभीर लापरवाही है।

निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि अधिकांश बच्चे बिहार सहित अन्य बाहरी राज्यों से लाए गए हैं, जबकि स्थानीय क्षेत्र के बच्चों की संख्या अत्यंत कम है। यह विषय अत्यधिक चिंता का है कि बार-बार ऐसे संस्थानों में बाहरी राज्यों के बच्चे पाए जा रहे हैं। बच्चों से बातचीत में यह जानकारी सामने आई कि उनके माता-पिता जीवित हैं और उन्हें यहाँ यह कहकर भेजा गया कि उन्हें शिक्षा एवं बेहतर व्यवस्था प्रदान की जाएगी।

डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि बच्चों को किस प्रकार का वातावरण दिया जा रहा है, उन्हें क्या शिक्षा दी जा रही है, उनके खान-पान एवं मानसिक विकास की स्थिति क्या है — यह सभी विषय गंभीर जांच के दायरे में हैं। किसी भी परिस्थिति में बच्चों का उपयोग धार्मिक, सामाजिक अथवा राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता। धर्म के नाम पर बच्चों की सोच एवं मानसिकता को प्रभावित करना अत्यंत गंभीर विषय है, जिसका आयोग सख्त विरोध करता है।

उन्होंने कहा कि राज्य में संचालित सभी प्रकार के हॉस्टल — चाहे वे मदरसे से संबंधित हों, कोचिंग संस्थानों से जुड़े हों अथवा अन्य निजी संस्थाओं द्वारा संचालित — उनके लिए स्पष्ट नियमावली बनाया जाना अत्यंत आवश्यक है। स्कूल हॉस्टलों पर लागू सुरक्षा एवं संचालन संबंधी नियम सभी संस्थानों पर समान रूप से लागू किए जाने चाहिए तथा सभी हॉस्टलों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाना चाहिए।

∆ आज प्रकाशित एनसीआरबी के आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि बच्चों से संबंधित अपराधों के मामलों में वृद्धि के पीछे एक ओर जहाँ रिपोर्टिंग पहले की तुलना में अधिक होने लगी है, वहीं दूसरी ओर मोबाइल और सोशल मीडिया से प्रभावित होकर बच्चे गलत एवं असामाजिक गतिविधियों की ओर भी प्रेरित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती राजनीतिक कटुता, आपसी रंजिश, समाज की घटती नैतिकता, टूटते पारिवारिक संबंध तथा तेजी से हो रहे डेमोग्राफिक बदलाव भी ऐसे अपराधों के प्रमुख कारण बनते जा रहे हैं।
∆ डॉ. गीता खन्ना ने हाल ही में चंपावत में आपसी राजनीतिक रंजिश के चलते हुए विवाद को भी अत्यंत चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि किसी नाबालिग बच्ची का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करना किशोर न्याय अधिनियम एवं बाल संरक्षण कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि कोई भी व्यक्ति ऐसे वीडियो अथवा सामग्री को आगे प्रसारित न करे। यदि किसी के पास ऐसा वीडियो या सामग्री प्राप्त हुई है तो उसे तत्काल डिलीट किया जाए और आगे साझा न किया जाए, ताकि बच्ची की पहचान एवं सम्मान सुरक्षित रह सके।

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग इस प्रकरण में संबंधित विभागों एवं प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करेगा, ताकि बच्चों अधिकारों एवं सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न हो।*

 

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