
CSAM शिकायत के बाद बाल आयोग का छापा: रायपुर के निजी स्कूल में सुरक्षा और सुविधाओं की बड़ी खामियां उजागर
CSAM मामले ने खोली स्कूल की पोल, 450 बच्चों के बीच सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था फेल
रायपुर के निजी विद्यालय पर बाल आयोग सख्त, CSAM शिकायत के बाद मिली गंभीर अनियमितताएं
रायपुर क्षेत्र में CSAM (Child Sexual Abuse Material) से संबंधित एक गंभीर शिकायत क्षेत्रवासियों के माध्यम से उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के संज्ञान में आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग के सदस्य श्री दयाल सिंह एवं आयोग की टीम द्वारा तत्काल मौके पर पहुंचकर प्रकरण की जांच की गई तथा संबंधित निजी विद्यालय का निरीक्षण किया गया।



प्रारंभिक जांच के दौरान यह सामने आया कि संबंधित बच्चे रायपुर क्षेत्र के निवासी हैं। मामले की विस्तृत पड़ताल के क्रम में आयोग की टीम संबंधित निजी विद्यालय पहुंची, जहां बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं मूलभूत सुविधाओं से संबंधित कई गंभीर कमियां एवं अनियमितताएं पाई गईं।
आयोग के संज्ञान में यह भी आया कि संबंधित घटना की जानकारी विद्यालय के प्रधानाचार्य को पूर्व में प्राप्त हो चुकी थी, लेकिन पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप पुलिस को सूचना दिए जाने की बात सामने नहीं आई। यह भी जानकारी मिली कि संबंधित बच्चे की पहचान विद्यालय के छात्र के रूप में होने के बावजूद उसे विद्यालय आने से रोक दिया गया। आयोग ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई की संस्तुति की है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आयोग ने रायपुर थाना पुलिस को CSAM से संबंधित शिकायत की जांच तथा साइबर अपराध एवं पॉक्सो अधिनियम के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई किए जाने की संस्तुति की है। आयोग द्वारा पुलिस से प्रकरण में की गई कार्रवाई की आख्या भी प्राप्त की जाएगी।
जांच के दौरान आयोग की टीम ने विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा एवं मूलभूत सुविधाओं से संबंधित कई गंभीर कमियां भी पाईं। लगभग 250 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में करीब 450 बच्चे अध्ययनरत पाए गए। विद्यालय तक पहुंचने का मार्ग लगभग 15 फीट चौड़ी संकरी गली से होकर जाता है, जिससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में बच्चों की सुरक्षित निकासी को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न होती है।
विद्यालय परिसर में लगी लोहे की सीढ़ियां बिना किसी सुरक्षा कवर अथवा मैट के पाई गईं। विद्युत पैनल खुले एवं एक्सपोज्ड अवस्था में पाए गए। परिसर में अग्निशमन यंत्र उपलब्ध थे, किंतु निरीक्षण के दौरान वे कार्यशील स्थिति में नहीं पाए गए तथा उन पर स्पष्ट सुरक्षा चिह्न भी उपलब्ध नहीं थे।
निरीक्षण के दौरान लगभग 15 × 15 फीट के एक कक्ष में करीब 40 एलकेजी के बच्चों को बैठाया गया था। कक्ष में पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था नहीं थी। केवल एक एग्जॉस्ट फैन लगा था, जिसे अधिक शोर होने के कारण संचालित नहीं किया जा रहा था। कमरे में पर्याप्त खिड़की की व्यवस्था भी नहीं पाई गई, जिससे कक्ष का वातावरण बच्चों के लिए बंद, उमस भरा एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से प्रतिकूल प्रतीत हुआ।
विद्यालय में स्वच्छता व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई। शौचालय गंदे एवं अस्वच्छ स्थिति में थे। निरीक्षण के दौरान फर्स्ट एड बॉक्स उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाने पर संबंधित शिक्षिका उसे प्रस्तुत नहीं कर सकीं। इसके अतिरिक्त, एक शिक्षिका द्वारा एक बच्चे के साथ कठोर एवं अनुचित व्यवहार किए जाने की जानकारी भी आयोग के संज्ञान में आई।
विद्यालय परिसर में बच्चों के लिए खेल मैदान, प्रार्थना सभा अथवा सामूहिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त स्थान भी उपलब्ध नहीं पाया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार एलकेजी कक्षा के लिए लगभग ₹900 प्रतिमाह शुल्क लिया जा रहा है, जबकि बच्चों के लिए आवश्यक न्यूनतम सुविधाओं की उपलब्धता संतोषजनक नहीं पाई गई।
इन गंभीर कमियों को देखते हुए आयोग ने विद्यालय के प्रधानाचार्य को विद्यालय के समस्त अभिलेख, मान्यता संबंधी दस्तावेज, शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता एवं प्रमाणपत्रों सहित आयोग के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही, शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर विद्यालय की मान्यता, संचालन की परिस्थितियों तथा बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के संबंध में विस्तृत आख्या मांगी गई है।
आयोग की टीम ने क्षेत्रवासियों से भी बातचीत की तथा उनकी चिंताओं एवं समस्याओं को गंभीरता से सुना। आयोग द्वारा क्षेत्रवासियों को मामले में निष्पक्ष एवं उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
आयोग ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी विद्यालय में असुरक्षित भवन, अपर्याप्त स्थान, अग्नि एवं विद्युत सुरक्षा में लापरवाही, अस्वच्छ वातावरण अथवा पॉक्सो अधिनियम सहित बाल संरक्षण संबंधी कानूनों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
आयोग बच्चों के सुरक्षित, सम्मानजनक एवं अधिकार-आधारित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार की रक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
