
उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष **डॉ. गीता खन्ना** की अध्यक्षता में आज आयोग कार्यालय, देहरादून में विभिन्न जनपदों से प्राप्त बाल अधिकारों से संबंधित शिकायतों पर विस्तृत सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, बाल संरक्षण, आरटीई, संस्थागत देखरेख, अग्नि सुरक्षा एवं अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर संबंधित अधिकारियों एवं पक्षकारों से जवाब-तलब करते हुए आवश्यक निर्देश जारी किए गए।
सुनवाई के दौरान **जीसस एंड मैरी स्कूल, क्लेमेन्टाउन, देहरादून** द्वारा आयोग के पूर्व निर्देशों के बावजूद **फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र एवं आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए**। आयोग ने इस पर गंभीर नाराज़गी व्यक्त करते हुए **अग्निशमन विभाग** को विद्यालय का तत्काल निरीक्षण कर अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन की विस्तृत आख्या आयोग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
**मसूरी स्थित अस्पताल में बालक के उपचार से संबंधित प्रकरण** में संबंधित चिकित्सकों द्वारा आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखा गया तथा सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत की गई। सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित चिकित्सक की शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता के संबंध में भी जांच अपेक्षित है। आयोग ने इस संबंध में विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं कि संबंधित चिकित्सक विधिवत अर्हताप्राप्त (Qualified) हैं अथवा नहीं।
आयोग अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने निर्देश दिए कि **नगर पालिका परिषद मसूरी** के सहयोग से बच्चों के स्वास्थ्य, बाल अधिकारों तथा रोगियों एवं तीमारदारों के व्यवहार संबंधी एक व्यापक जन-जागरूकता कार्यशाला आयोजित की जाए, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य एवं अधिकारों के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाई जा सके।
**नैनीताल जनपद** के प्रकरण में आयोग के माननीय सदस्य श्री **योगेश राजवर** के समक्ष अभिभावकों एवं विद्यालयों से संबंधित शिकायतों की सुनवाई कर उनका त्वरित निस्तारण एवं आवश्यक अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
**मेडिकल एम्बेसडर संस्था** से संबंधित प्रकरण, जिसमें पूर्व में धर्म परिवर्तन संबंधी शिकायतें प्राप्त हुई थीं, में आयोग को अवगत कराया गया कि संबंधित बच्चे को सकुशल निकाला जा चुका है। वहीं एक अन्य मामले में **एक नवजात बच्ची को तत्काल संरक्षण की आवश्यकता** होने की सूचना मिलने पर **बाल कल्याण समिति (CWC)** एवं **चाइल्ड हेल्पलाइन** के समन्वय से उसे तत्काल सुरक्षित स्थान पर भेजा गया। आयोग ने इस त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए बाल संरक्षण तंत्र को सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए।
एक अन्य मामले में यह पाया गया कि **ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के दस्तावेजों में अंतर तथा अभिभावकों के नाम संबंधी आवश्यक अभिलेख उपलब्ध न होने के कारण एक बच्चे का आरटीई के अंतर्गत प्रवेश नहीं हो सका था।** आयोग ने संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर बच्चे का आरटीई के अंतर्गत प्रवेश सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। साथ ही राज्य के **सभी केंद्रीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की बैठक आयोजित कर आरटीई से संबंधित प्रवेश प्रक्रियाओं में एकरूपता एवं बाल हित सर्वोपरि रखने** के निर्देश भी दिए गए।
एक अन्य महत्वपूर्ण प्रकरण में **देहरादून में कार्यरत एक सरकारी कर्मचारी** द्वारा अपनी गंभीर रूप से बीमार पुत्री, जिसका राजस्थान में उपचार चल रहा है और जिसकी **किडनी प्रभावित** है, के संबंध में आयोग को प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया गया। आयोग ने तत्काल **राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं संबंधित बाल कल्याण समिति (CWC)** को पत्र प्रेषित किया। साथ ही वीडियो कॉल के माध्यम से बच्ची की माता एवं नाना से संपर्क स्थापित कर उसके चिकित्सीय अभिलेख उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया, ताकि बच्ची को आवश्यक उपचार एवं स्वास्थ्य संबंधी सहायता समय पर उपलब्ध कराई जा सके।
आयोग अध्यक्ष **डॉ. गीता खन्ना** ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं गरिमा की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। बच्चों से जुड़े प्रत्येक प्रकरण की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए आयोग निष्पक्ष, संवेदनशील एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित कर रहा है तथा किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
सुनवाई के दौरान आयोग के सदस्य **श्री दयाल सिंह बिष्ट**, अनुसचिव **श्री एस. के. सिंह**, संबंधित विभागों के अधिकारी एवं पक्षकार उपस्थित रहे।
