
नदी पुनर्जीवन के ‘हेवल मॉडल’ को राष्ट्रीय सम्मान, धर्म सिंह मीणा बने Eco-Warrior 2026
वैज्ञानिक वन प्रबंधन और जल संरक्षण के लिए धर्म सिंह मीणा सम्मानित
वैज्ञानिक वन प्रबंधन, स्प्रिंगशेड विकास और जनभागीदारी के अभिनव मॉडल के लिए मिला राष्ट्रीय सम्मान
नई दिल्ली। उत्तराखंड कैडर के 2009 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी श्री धर्म सिंह मीणा को पर्यावरण संरक्षण एवं नदी पुनर्जीवन के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित Eco-Warrior Award 2026 से सम्मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र सिंह यादव जी द्वारा प्रदान किया गया।

पुरस्कार समारोह में महानिदेशक वन श्री सुशील अवस्थी, श्री भारत लाल, IFS Association की अध्यक्ष श्रीमती अनिता कर्ण, देशभर से आए भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं अधिकारीगण, Indian Masterminds की टीम तथा पर्यावरण एवं वन संरक्षण के क्षेत्र से जुड़े अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
श्री धर्म सिंह मीणा देश में वन संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण, जलस्रोत पुनर्जीवन और सामुदायिक भागीदारी आधारित पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में अपने अभिनव कार्यों के लिए पहचाने जाते हैं। उनके कार्यों को विभिन्न राष्ट्रीय मंचों पर भी स्थान मिला है। विशेष रूप से हेवल नदी पुनर्जीवन परियोजना ने उन्हें एक ऐसे वन अधिकारी के रूप में पहचान दिलाई है, जिन्होंने वन प्रबंधन को जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन के साथ जोड़कर एक समग्र मॉडल विकसित किया।
हेवल नदी को मिला नया जीवन
टिहरी गढ़वाल में श्री मीणा द्वारा प्रारंभ की गई हेवल नदी पुनर्जीवन पहल का मूल विचार था कि किसी नदी को केवल नदी के रूप में नहीं, बल्कि उसके संपूर्ण जलागम, जंगलों, स्प्रिंग, स्ट्रीम, रिचार्ज जोन और उससे जुड़े समुदायों के एकीकृत तंत्र के रूप में देखा जाए।
इस दृष्टिकोण के तहत वैज्ञानिक स्प्रिंगशेड एवं वाटरशेड प्रबंधन, वन पुनर्स्थापन, जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, स्ट्रीम एवं नदी तल पुनर्जीवन तथा सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़ा गया।
परियोजना के विभिन्न चरणों में 126 स्प्रिंग, 28 स्ट्रीम और 16 रिचार्ज जोन में कार्य किए गए। 1,58,572 जल संरक्षण एवं जल-संग्रहण संरचनाओं का निर्माण किया गया तथा 20.62 लाख स्थानीय एवं जल-संरक्षण में सहायक पौधों का रोपण किया गया। इन प्रयासों से अनुमानित 438.66 मिलियन लीटर भूजल पुनर्भरण की क्षमता विकसित हुई।
इस पहल की विशेषता केवल कार्यों का व्यापक पैमाना नहीं, बल्कि उनका वैज्ञानिक मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन भी रहा। National Institute of Hydrology तथा IIT Roorkee जैसे संस्थानों के सहयोग से जल प्रवाह की निगरानी, हाइड्रोग्राफ और हाइड्रोलॉजिकल आकलन किए गए।
संरक्षण के साथ समुदाय और आजीविका
श्री मीणा के दृष्टिकोण में स्थानीय समुदायों को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों का भागीदार और संरक्षक बनाया गया। ग्रामीणों, महिलाओं, Van Panchayats और स्थानीय संस्थाओं को जलस्रोत संरक्षण, आक्रामक प्रजातियों के नियंत्रण, आजीविका गतिविधियों तथा पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा गया।
हेवल मॉडल में जल संरक्षण को कृषि, आजीविका, जैव विविधता, इको-टूरिज्म और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व से जोड़ने का प्रयास किया गया। इस प्रकार नदी पुनर्जीवन को एक व्यापक Integrated Landscape Restoration Approach के रूप में विकसित किया गया।
हेवल से राज्यव्यापी मॉडल तक
हेवल में विकसित अनुभवों को आगे बढ़ाते हुए श्री मीणा ने राज्य स्तर पर स्प्रिंग एवं नदी पुनर्जीवन के लिए एक संस्थागत व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी योगदान दिया। उनके द्वारा विकसित दृष्टिकोण ने आगे चलकर उत्तराखंड में Spring and River Rejuvenation Authority (SARRA) जैसे संस्थागत प्रयासों के लिए आधार प्रदान किया।
श्री मीणा के कार्यों को इससे पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की जल चर्चा में उनके हेवल क्षेत्र के कार्यों को “Water Warrior” के रूप में रेखांकित किया गया था।
Eco-Warrior Award 2026 प्राप्त करते हुए श्री मीणा ने इस सम्मान को व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय उत्तराखंड सरकार, माननीय मुख्यमंत्री जी, माननीय वन मंत्री जी, वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन, सहकर्मियों एवं फील्ड स्टाफ के समर्पण तथा स्थानीय समुदायों की सहभागिता का सामूहिक सम्मान बताया।
उनकी कार्यशैली का मूल संदेश स्पष्ट है—वनों को केवल पेड़ों के रूप में नहीं, बल्कि जल, जैव विविधता और मानव जीवन को सहारा देने वाले जीवंत पारिस्थितिक तंत्र के रूप में प्रबंधित किया जाना चाहिए।
हेवल नदी की कहानी इसी सोच का उदाहरण है कि नदी को पुनर्जीवित करने के लिए केवल नदी में काम करना पर्याप्त नहीं; उसके स्रोत, जंगल, स्प्रिंग, रिचार्ज क्षेत्र और उससे जुड़े समुदायों को एक साथ पुनर्जीवित करना आवश्यक है।
