
विधिक व्यवसाय में सफलता की कोई सीमा नहीं : न्यायमूर्ति रविन्द्र सिंह
आपराधिक विधिशास्त्र और संवैधानिक नैतिकता पर न्यायमूर्ति रविन्द्र सिंह का विशेष व्याख्यान
रजत जयंती वर्ष में उत्तरांचल विश्वविद्यालय की नई पहल, शुरू हुई लॉ लेक्चर सीरीज
मेहनत और बुद्धिमत्ता से विधि क्षेत्र में छू सकते हैं असीम ऊंचाइयां : न्यायमूर्ति रविन्द्र सिंहविधिक व्यवसाय में सफलता की कोई सीमा नहींः न्यायमूर्ति रविन्द्र सिंह
विधि-विद्वानों के नियमित व्याख्यान लाॅ काॅलेज देहरादून का अनुकरणीय कदमः न्यायमूर्ति रविन्द्र सिंह
देहरादून 26 सितम्बर। उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लाॅ काॅलेज देहरादून द्वारा आज अपनी स्थापना के 25वें वर्ष को मनाते हुए उत्तरांचल विश्वविद्यालय रजत जयंती लाॅ लेक्चर सीरिज का शुभारम्भ किया गया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधीश न्यायमूर्ति रविन्द्र सिंह इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता थे। सीरिज के उद्घाटन भाषण का विषय था ‘अपराधिक विधिशास्त्र एवं संविधानिक नैतिकता’। विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकनंद आॅडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में 800 से अधिक विधि के छात्रों ने भागीदारी की।
विश्वविद्यालय के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र जोशी ने न्यायमूर्ति का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया। उन्होंने कहा कि भौतिकतावाद के इस दौर में संविधानिक नैतिकता की सर्वाधिक प्रसांगिकता के साथ-साथ अपेक्षा भी है। उन्होंने युवाओं को न्यायमूर्ति के वचनों को आत्मसात करने की सलाह दी।
न्यायमूर्ति रविन्द्र सिंह ने अपना सम्बोधन संवैधानिक नैतिकता के परिपेक्ष में आपराधिक विधिशास्त्र की व्याख्या से प्रारम्भ किया। उन्होंने किसी भी आपराधिक मामलें की प्रथम सूचना रिपोर्ट से लेकर उसके ट्रायल और निर्णय तक की समस्त प्रक्रिया को बढ़े ही सरल तरीके से समझाया। विदित हो कि न्यायमूर्ति रविन्द्र सिंह आपराधिक मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए न्यायपालिका का एक जाना माना नाम है। अपने कार्यकाल में एक लाख से अधिक और एक वर्ष में 30,000 से अधिक आपराधिक मामलों को निपटाने का कीर्तिमान भी आपके नाम है। उन्होंने कहा कि विधि व्यवसाय के क्षेत्र में सफलता, कैरियर ग्रोथ व कमाई की कोई तय सीमा नहीं है। आप जितनी मेहनत, बुद्धिमत्ता और लगन से काम करेंगे, उतनी ही ऊंचाइयों को छू सकते हैं। उन्होंने छात्रों को आपराधिक मामलों की वकालत के साथ-साथ न्याययिक अधिकारी बनने के गुर भी सिखाये। उन्होंने कहा कि विधि-विद्वानों के नियमित व्याख्यान लाॅ काॅलेज देहरादून का अनुकरणीय कदम है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 धर्मबुद्धि, उपकुलपति प्रो0 राजेश बहुगुणा एवं प्राचार्य प्रो0 पूनम रावत ने भी छात्रों को सम्बोधित किया। उन्होंने छात्रों, शिक्षकों व कर्मचारियों को रजत जयंती वर्ष की बधाईयां दी और अपने-अपने स्तर से शुभकामना संदेश दिये।
कार्यक्रम का संचालन लाॅ काॅलेज देहरादून की मूट कोर्ट सोसाइटी के छात्रों द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से विभागाध्यक्ष प्रो0 राधेश्याम झा, डा0 एश्वर्य सिंह, डा0 अभिरंजन दीक्षित, अमित चैधरी, नंदनी मजूमदार, अशोक डोभाल सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
प्रो0 राजेश बहुगुणा
उपकुलपति
