
डॉ. आर. राजेश कुमार की पहल से रेलवे फ्रीज जोन की समीक्षा शुरू, पहाड़ों में विकास की नई उम्मीद
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल कॉरिडोर के 400 मीटर फ्रीज जोन पर पुनर्विचार, निवेश के रास्ते खुलेंगे
रेलवे सुरक्षा के साथ विकास का संतुलन, फ्रीज जोन समीक्षा से पर्यटन और कारोबार को मिल सकती है रफ्तार
रेल परियोजना के आसपास रुका विकास अब पकड़ सकता है गति, सरकार ने शुरू की फ्रीज जोन समीक्षा
डॉ. आर. राजेश कुमार की पहल से रेलवे फ्रीज जोन की समीक्षा शुरू, पहाड़ों में विकास और निवेश की नई राह खुलने की उम्मीद
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल कॉरिडोर के 400 मीटर फ्रीज जोन की समीक्षा शुरू, विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन पर सरकार का जोर
देहरादून। उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अब केवल पहाड़ों में रेल पहुंचाने की योजना नहीं रह गई है, बल्कि इसे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और रोजगार के लिए बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। परियोजना का अधिकांश निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही राज्य सरकार ने रेलवे कॉरिडोर से जुड़े 400 मीटर फ्रीज जोन में लागू निर्माण प्रतिबंधों की समीक्षा शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आवास एवं शहरी विकास विभाग ने इस दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने संबंधित जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को ऐसे क्षेत्रों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जहां रेलवे ट्रैक एवं इससे जुड़े निर्माण कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं। उद्देश्य यह आकलन करना है कि सुरक्षा मानकों के अनुरूप किन क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से विकास गतिविधियों को अनुमति दी जा सकती है।
परियोजना की सुरक्षा के लिए लगाया गया था फ्रीज जोन
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में बन रही देश की महत्वपूर्ण पर्वतीय रेल परियोजनाओं में शामिल है। निर्माण के दौरान रेलवे ट्रैक, सुरंगों और अन्य तकनीकी ढांचों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 9 जनवरी 2024 को परियोजना से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में फ्रीज जोन लागू किया गया था।
योगनगरी ऋषिकेश, शिवपुरी, व्यासी, सिराला, तिलवाड़ मल्ला, मलेथा, श्रीनगर, धारीदेवी, तिलनी, घोलतीर और गौचर समेत कई क्षेत्रों में रेलवे परियोजना की परिसीमा से 400 मीटर तक निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाए गए थे।
इन प्रतिबंधों का उद्देश्य अनियंत्रित निर्माण से रेलवे की सुरक्षा और परियोजना के तकनीकी ढांचे पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को रोकना था। हालांकि, लंबे समय तक प्रतिबंध लागू रहने के कारण स्थानीय स्तर पर होटल, होमस्टे, रिसॉर्ट, आवासीय भवन और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े लोगों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
पर्यटन और निवेश को मिल सकती है नई रफ्तार
गढ़वाल के जिन क्षेत्रों से रेल परियोजना गुजर रही है, वे धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में रेल सेवा शुरू होने के बाद इन क्षेत्रों में पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की आवाजाही बढ़ने की संभावना है।
फ्रीज जोन की समीक्षा के बाद यदि तकनीकी और सुरक्षा मानकों के आधार पर प्रतिबंधों में नियंत्रित ढील मिलती है, तो रेलवे कॉरिडोर के आसपास होटल, होमस्टे, रिसॉर्ट, आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे स्थानीय निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के रास्ते भी खुल सकते हैं।
जनहित के साथ रेलवे सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि विकास की अनुमति रेलवे सुरक्षा से समझौता करके नहीं दी जाएगी। समीक्षा के दौरान रेलवे से जुड़े तकनीकी पहलुओं, भूगर्भीय परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखा जाएगा।
डॉ. आर. राजेश कुमार के निर्देश पर जिलों से उन क्षेत्रों की जानकारी जुटाई जा रही है, जहां परियोजना का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि कहां और किस स्तर पर विकास गतिविधियों को नियंत्रित तरीके से अनुमति दी जा सकती है।
पहाड़ की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है नया आधार
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को उत्तराखंड के लिए विकास का गेम चेंजर माना जा रहा है। रेल कनेक्टिविटी से चारधाम यात्रा और पर्यटन को गति मिलने के साथ ही रेलवे कॉरिडोर के आसपास आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की उम्मीद है।
ऐसे में फ्रीज जोन की समीक्षा को स्थानीय लोगों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि तकनीकी परीक्षण के बाद प्रतिबंधों में चरणबद्ध और सुरक्षित तरीके से राहत मिलती है, तो लंबे समय से रुकी कई विकास योजनाओं को नई रफ्तार मिल सकती है।
डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव आवास ने कहा—
“मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रेलवे फ्रीज जोन में लागू प्रतिबंधों की समीक्षा की जा रही है। जहां रेलवे परियोजना का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, वहां की स्थिति का तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर आकलन कराया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि रेलवे सुरक्षा और तकनीकी मानकों से किसी प्रकार का समझौता किए बिना स्थानीय नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों को विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं। जनहित और परियोजना हित दोनों को समान प्राथमिकता देते हुए व्यावहारिक समाधान तैयार किए जाएंगे।”
