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स्पर्श हिमालय विश्विद्यालय में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय योग कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ: 300 से अधिक शोधार्थियों ने लिया भाग

 

स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के अध्यक्ष, सचिव एवं पूर्व कुलसचिव डॉ माधवी गोस्वामी ने हर्षिका रेखारी को किया सम्मानित

देहरादून। हिमालयीय आयुर्वेदिक पीजी कॉलेज, देहरादून एवं अष्टांग योग स्कूल, हरिद्वार के संयुक्त तत्वावधान में स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय, देहरादून में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। सम्मेलन का विषय “योग, आयुर्वेद, पारंपरिक ज्ञान परंपरा एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से स्वास्थ्य एवं नवाचार” रहा, जिसमें देश-विदेश के विशेषज्ञों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सम्मेलन में लगभग 300 शोधार्थियों ने भाग लिया, जिनमें भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी एवं विभिन्न देशों के प्रोफेसर वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

कार्यक्रम की अध्यक्षता स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार भारद्वाज द्वारा की गई। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि योग और आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति ही नहीं, बल्कि एक समग्र जीवन शैली है, जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाती है। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सोमवीर आर्या ने अपने वक्तव्य में कहा कि योग में सैद्धांतिक ज्ञान से अधिक प्रयोगात्मक क्रियाओं का महत्व है। उन्होंने छात्रों को योग के व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि नियमित अभ्यास से ही योग के वास्तविक लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

संस्था के सचिव बालकृष्ण चमोली ने कहा कि योग और आयुर्वेद भारत की प्राचीन धरोहर हैं, जो आज वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान बना रही हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इन विधाओं को केवल प्रचार-प्रसार तक सीमित न रखकर जन-जन तक पहुँचाना आवश्यक है, ताकि समाज का हर वर्ग इससे लाभान्वित हो सके।

सम्मेलन में विभिन्न वक्ताओं ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए और योग, आयुर्वेद तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समन्वय पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने बताया कि आधुनिक तकनीक, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान 9 वर्षीय बालिका हर्षिका रिखारी ने विभिन्न योग मुद्राओं की मनमोहक प्रस्तुति देकर उपस्थित शोधार्थियों एवं दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों ने योग और आयुर्वेद से जुड़ी अपनी सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक प्रस्तुतियों से सभी का ध्यान आकर्षित किया। आयोजन ने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के बीच एक सशक्त संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. आदित्य पंवार, रूपाली बरमोला, डॉ. कपिल, डॉ. मानस वर्मा एवं अन्य शिक्षकों द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य डॉ. नीरज श्रीवास्तव, प्रशासनिक अधिकारी डॉ. निशांत राय जैन, प्रो. जी.एस. इंदौरिया सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे।
अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का सफल समापन किया।

 

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