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अच्छी पहल: यूकॉस्ट द्वारा नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष “ गंगा विज्ञान संवाद” किया गया आयोजित

उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट), विज्ञान धाम, देहरादून में आज दिनांक 10 सितम्बर 2025 को भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली द्वारा गंगा नदी के हितधारकों हेतु नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत एक विशेष “गंगा विज्ञान संवाद” आयोजित किया गया।


इस अवसर पर देश के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सैनानी एवं देश के पूर्व ग्रह मंत्री रहे पंडित गोविंद बल्लभ पंत की जयंती पर उनके द्वारा किए गए सरहानिया कार्यों को याद किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के तौर पे प्रो. दुर्गेश पंत, महानिदेशक, यूकॉस्ट ने गंगा पुनर्जीवन हेतु सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और परिषदों को समुदायों के साथ जुड़कर इस दिशा में सक्रिय योगदान देना चाहिए। प्रो. पंत ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम ज्ञान-विनिमय को सुदृढ़ करते हैं और नदी बेसिन प्रबंधन को सतत बनाए रखने में सहायक सिद्ध होते हैं।
इस अवसर पर यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ. डी. पी. उनियाल ने कहा कि “यदि हिमालय सुरक्षित है तो सम्पूर्ण विश्व सुरक्षित है”। डॉ. उनियाल द्वारा जैव विविधता के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए गंगा की पवित्रता बनाए रखने हेतु सतत प्रयासों की महत्ता को रेखांकित किया गया ।
श्री प्रहलाद अधिकारी, शिक्षाविद्, ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “गंगा मात्र एक नदी नहीं है, यह आय, भोजन और आजीविका का प्रमुख स्रोत है।”


इसके उपरान्त आई.आई.पी.ए. टीम की ओर से एक वीडियो प्रस्तुति प्रदर्शित की गई जिसमें मिशन की विभिन्न गतिविधियों का परिचय दिया गया।
डॉ. महियान कुसलूम, शोध अधिकारी, आई.आई.पी.ए. ने नमामि गंगे मिशन के उद्देश्यों, प्रमुख विशेषताओं, गंगा पुनर्जीवन की रणनीतियों और जिला गंगा समितियों के माध्यम से सामुदायिक सहभागिता पर विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान सुश्री गुलनार फातिमा, आई.आई.पी.ए., नई दिल्ली ने ब्लेंडेड क्षमता निर्माण कार्यक्रम की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कार्यक्रम न केवल गंगा बल्कि उसकी सहायक नदियों और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए भी महत्त्वपूर्ण है।
श्री जी. एस. रौतेला, सलाहकार, साइंस सिटी ने कहा कि गंगा संरक्षण के लिए जन-जागरूकता बढ़ाने में विज्ञान संचार एवं सोशल मीडिया प्लेटफार्मों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
अंत में, यूकॉस्ट के आंचलिक विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. ओ. पी. नौटियाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी विशिष्ट वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं हितधारकों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन यूकॉस्ट के वैज्ञानिक डॉ. भवतोष शर्मा द्वारा किया गया।

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