
देहरादून: जीएसटी में बदलाव के बाद बीजेपी आर्थिक प्रकोष्ठ के सह संयोजक राजेश्वर पैन्यूली की प्रतिक्रिया सामने आई है. CA पैन्यूली ने GST काउंसिल द्वारा मंजूर किए गए बड़े सुधारों की सराहना की. उन्होंने इसे ‘आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा फैसला’ बताया. यहाँ जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि GST अब और भी सरल हो गया है, उन्होंने इसे दिवाली से पहले का ‘डबल धमाका’ कहा. उन्होंने कहा कि “अब GST और भी सरल हो गया है. सिर्फ दो स्लैब बचे हैं 5% और 18% जिससे हर नागरिक और व्यापारी के लिए यह और आसान हो गया है.” उन्होंने आगे कहा कि GST 2.0 नाम की यह नई व्यवस्था घरों, छोटे व्यापारियों और उद्योगों, सभी को राहत देगी.
राजेश्वर पैन्यूली ने कहा कि जीएसटी सुधार के पीछे मंशा एकदम स्पष्ट है कि लोगों के पास अधिक से अधिक पैसा रहे, जो खर्च होकर आर्थिकी को गति प्रदान करे। जहां निजी उपभोग की जीडीपी में करीब 60 प्रतिशत की हिस्सेदारी है, वहां यह पहल मांग को तात्कालिक रूप से बढ़ाने का काम करेगी। कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जो कहते हैं, वो करते हैं। 15 अगस्त को उन्होंने लाल किले की प्राचीर से कहा था कि दिवाली से पहले देशवासियों को तोहफा देंगे और जीएसटी में सुधार करेंगे।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने किसानों और मध्यम वर्ग के लिए 175 से ज्यादा उत्पादों को जीएसटी मुक्त कर दिया है। किसानों के लिए कई चीजें सस्ती होने वाली हैं। मध्यम वर्ग और छात्रों को भी काफी लाभ मिलेगा। दशहरे से पहले ही देशवासियों को लाभ होगा। देश का उत्थान होगा। यह व्यापार को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आम आदमी की बुनियादी ज़रूरतों का ध्यान रखा गया है। इससे अर्थव्यवस्था को काफी बढ़ावा मिलेगा।
इस प्रकार की कटौती से अर्थव्यवस्था को जो बूस्ट मिलेगा, उससे हो सकता है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक ही भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाए। स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च भी इस सुधार से घटेगा। पहली बार जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा को कर मुक्त कर दिया गया है।
कई जीवनरक्षक दवाएं भी कर मुक्त हो गई हैं, जबकि स्वास्थ्य परीक्षण से जुड़े उपकरणों पर भी टैक्स घटा दिया गया है। यहां मुद्दा केवल कल्याण का नहीं, बल्कि विकास का भी है। किफायती स्वास्थ्य देखभाल और व्यापक बीमा कवरेज लोगों को चिकित्सा खर्च के झटकों से बचाने का काम करते हैं। इससे अन्य खर्चों के लिए संसाधन बचेंगे। साथ ही, स्वस्थ और अधिक सुरक्षित कार्यबल बनाकर उत्पादकता में सुधार की संभावनाएं भी बढ़ती हैं। इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के जरिये भी उत्पादकता बढ़ाने का प्रयास किया गया है। यह स्थिति तब बनती है जब इनपुट पर तैयार उत्पादों की तुलना में अधिक कर लगता है।
यह उद्यमों के लिए अनुपयोगी क्रेडिट जमा करने, तरलता पर दबाव डालने और प्रतिस्पर्धा गंवाने का कारण बनता है। कपड़ा क्षेत्र इस समस्या से बहुत प्रभावित था, जहां मानव निर्मित फाइबर पर 18 प्रतिशत, यार्न पर 12 प्रतिशत और तैयार कपड़े पर पांच प्रतिशत कर था। उर्वरकों को भी ऐसी विसंगतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें कच्चे माल पर 18 प्रतिशत, लेकिन अंतिम उत्पादों पर पांच प्रतिशत कर लागू था। अब इन विसंगतियों को सुधारा गया है।
ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी पर कर की दर को 12 से पांच प्रतिशत तक कम किया गया है, जिससे किसानों के लिए लागत घटेगी। नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों पांच प्रतिशत कर लगने से स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में कदमों को और मजबूती मिलेगी। एक महत्वपूर्ण सुधार संस्थागत स्तर पर भी है। जीएसटी प्रणाली की लंबे समय तक इसलिए आलोचना की गई कि उसमें राष्ट्रीय स्तर के उचित अपीलीय तंत्र का अभाव है। उद्यमों को अक्सर राज्यों के बीच असंगत निर्णयों का सामना करना पड़ा, जिसने अनिश्चितता को बढ़ाया। इस कड़ी में 2025 के अंत तक जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण यानी जीएसटैट को अमल में लाने का निर्णय महत्वपूर्ण है।
न्यायाधिकरण सितंबर से अपीलें स्वीकार करेगा और दिसंबर तक सुनवाई शुरू करेगा। जबकि बैकलाग यानी लंबित अपीलों के लिए जून 2026 की समयसीमा होगी। प्रिंसिपल बेंच भी अग्रिम निर्णयों के लिए राष्ट्रीय अपीलीय प्राधिकरण के रूप में कार्य करेगी, जिससे न्यायालयों के बीच स्थिरता बनेगी। यह संस्थागत सुधार विकास के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पूर्वानुमानित विवाद समाधान निवेश जोखिम घटाता है। कंपनियां अधिक निवेश और विस्तार करने के लिए तभी तैयार होती हैं, जब उन्हें पता होता है कि असहमतियों एवं विसंगतियों का तत्परता के साथ निरंतर समाधान संभव होगा।


