ड्रिष्टिकोन – 2025 में वैश्विक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उद्योग- अकादमिक सहयोग की नई पहल
ड्रिष्टिकोन केवल एक इंडस्ट्री इंटरेक्शन नहीं, बल्कि शिक्षा जगत की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने का है प्रयास-कुलपति डॉ. राम शर्मा

देहरादून। उत्तराखंड ही नहीं बल्कि भारत की प्रसिद्ध संस्थान यूपीईएस ने अपने परिसर में ड्रिष्टिकोन -द इंडस्ट्री डे का पहला संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित किया। इस अवसर पर देश- विदेश की नामी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और छात्र एकत्रित हुए और उद्योग- अकादमिक सहयोग को मजबूत करने के लिए विचार-विमर्श किया। यह एक विशेष, निमंत्रण-आधारित मंच था, जिसका उद्देश्य भविष्य-तैयार प्रतिभा को विकसित करना और उद्योग के साथ सार्थक साझेदारी बनाना था।
इस आयोजन का नेतृत्व यूपीईएस के कुलपति डॉ. राम शर्मा तथा विश्वविद्यालय के डीन और अकादमिक नेताओं ने किया। इसमें कई प्रतिष्ठित कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिनमें थे: श्री हरीश मेहता (संस्थापक सदस्य और पहले चेयरमैन, नैस्कॉम, चेयरमैन, ऑनवर्ड टेक्नोलॉजीज़) आरती कपूर (डायरेक्टर – ग्लोबल एचआर ऑपरेशंस, मैकडॉनल्ड्स) सुरज छेत्री (वीपी और हेड एचआर -इंडिया व साउथ एशिया, एयरबस) पार्था पी. रॉय चौधरी (कॉमर्शियल लीड, लॉकहीड मार्टिन) तनु सिन्हा (हेड ऑफ डिजाइन- पेप्सीको), थाज मैथ्यू (जनरल काउंसल व वीपी, हनीवेल), डॉ. श्रवणी शाहापुरे (एसोसिएट डायरेक्टर, डेलॉइट), विराट शर्मा (सीनियर वीपी, जेपटो), अंकित भार्गव (हेड – डिजिटल प्रोजेक्ट्स, ओएनजीसी), देबज्योति मोहंती (कंट्री एचआर लीडर, बीटी ग्रुप), ध्रुव कोहली (वीपी- एचसीएल गवटेक), अर्चना श्रीवास्तव (हेड एचआर -टीई कनेक्टिविटी), स्वप्ना सांगरी (वीपी – एचआरए क्विक हील) और कपिल मुरलीधर शर्मा (एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर – स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप्स, माइक्रोसॉफ्ट)।
कार्यक्रम की शुरुआत लीडरशिप राउंडटेबल से हुई, जिसमें यूपीईएस नेतृत्व और कॉर्पोरेट जगत के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच भविष्य के शोध, प्रतिभा विकास और नवाचार के लिए सहयोग पर चर्चा हुई। इसके बाद यूपीईएस के विभिन्न स्कूलों के फैकल्टी ने उद्योग क्षेत्रों से जुड़े सत्र आयोजित किए और छात्रों के प्रोजेक्ट्स, शोध कार्य और विश्वविद्यालय की क्षमताओं को प्रस्तुत किया।
मुख्य संबोधन में श्री हरीश मेहता (संस्थापक सदस्य व पहले चेयरमैन, नैस्कॉम) ने कहा कि “ए आई” रोबोटिक्स, बायोटेक और क्वांटम तकनीकें गरीबी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी चुनौतियों को हल करने की क्षमता रखती हैं। इसके लिए हमें एक एक्सपोनेंशियल माइंडसेट विकसित करना होगा और बदलाव के प्रति अनुकूल रहना होगा। याद रखें, चाहे ए आई कितना भी शक्तिशाली क्यों न होए उसमें मानवीय निर्णय, रचनात्मकता और दृढ़ इच्छाशक्ति नहीं है। बड़े सपने देखें और मानवता, ऊर्जा और नए दृष्टिकोण को केंद्र में रखें।
कार्यक्रम के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा, “भारत को एक नवाचार,आधारित पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है जिसमें सरकार, उद्योग और अकादमिक जगत सभी शामिल हों। सभी को मिलकर एक शोध एवं विकास संस्कृति का निर्माण करना होगा। ड्रिष्टिकोन उस संस्कृति को भारत में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।”
इसके बाद दो पैनल चर्चाएँ आयोजित हुईं। पहली थी स्किल्स ऑफ द फ्यूचर जिसमें तेजी से बदलती तकनीकों के बीच प्रतिभा रणनीति पर चर्चा हुई। दूसरी थी डीकोडिंग जेन.जेड जिसमें छात्रों की अपेक्षाओं और उद्योग को उनके अनुरूप कैसे ढलना चाहिए, इस पर विचार किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर कुलपति डॉ. राम शर्मा ने कहा, ड्रिष्टिकोन केवल एक इंडस्ट्री इंटरेक्शन नहीं, बल्कि शिक्षा जगत की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने का प्रयास है। यूपीईएस को हम एक ऐसा जीवंत केंद्र मानते हैं, जहां विचार उद्योग और कक्षा के बीच सहजता से बहते हैं। इसी से भविष्य, तैयारी केवल नारा नही, बल्कि अनुभव बनती है।”
ड्रिष्टिकोन ने लंबे समय तक चलने वाले उद्योग सहयो, प्रतिभा पोषण और ज्ञान निर्माण के लिए एक नया मंच तैयार किया है। इसका उद्देश्य है दृ प्लेसमेंट, इंटर्नशिप और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में उद्योग की गहरी भागीदारी और छात्रों के लिए उद्योग.संलग्न सीखने का अनुभव सुनिश्चित करना।
यूपीईएस में अकादमिक उत्कृष्टता के साथ वैश्विक अनुभव, बहु.विषयक शिक्षा और उद्योग से गहरा जुड़ाव भी है। ऐसे प्रयास विश्वविद्यालय के छात्रों और फैकल्टी को आत्मविश्वास और उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व के साथ आगे बढ़ने के लिए सक्षम बनाते हैं।
अधिक जानकारी के लिए कृपया विजिट करें: www.upes.ac.in.



