देहरादून, 23 अगस्त 2025: आज उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में विद्यालयों एवं अन्य शिकायतों की सुनवाई आयोजित की गई। इस सुनवाई में विशेष रूप से ऋषिकेश एवं श्रीनगर क्षेत्र से संबंधित प्रकरणों पर विचार किया गया।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि सेंट थेरेसा विद्यालय, श्रीनगर द्वारा आयोग के पूर्व आदेशों का अनुपालन नहीं किया गया है। मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) द्वारा अवगत कराया गया कि अधिकांश अल्पसंख्यक विद्यालयों ने अभी तक स्वयं को आरटीई (RTE) अधिनियम में पंजीकृत नहीं कराया है। जबकि अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार सभी विद्यालयों, चाहे वे अल्पसंख्यक संस्थान हों या न हों, का RTE अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण कराना अनिवार्य है। केवल धारा 12(1)(c) के अंतर्गत 25% नि:शुल्क शिक्षा के प्रावधान से ही अल्पसंख्यक संस्थानों को छूट प्रदान की जाती है।
आयोग ने इस गंभीर लापरवाही पर कड़ी आपत्ति दर्ज की और निर्देशित किया कि CEO अपने अधीन सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (BEOs) से यह सुनिश्चित कराएं कि वे अपने-अपने जनपद के समस्त विद्यालयों का सोसायटी पंजीकरण, अल्पसंख्यक दर्जा तथा RTE अधिनियम में पंजीकरण की स्थिति की जाँच मिशन मोड में करें। यह रिपोर्ट 20 सितम्बर 2025 को आयोग में प्रस्तुत की जाएगी। साथ ही यह भी निर्देशित किया गया कि विकास खण्डों में जो विद्यालय बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं, उनकी सूची तैयार की जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि वे किन कारणों से बिना मान्यता के संचालित हैं। इसके अतिरिक्त, ऐसे विद्यालयों के विरुद्ध आपके स्तर से क्या कार्यवाही की गई है, इसकी स्थिति भी आयोग को उपलब्ध कराई जाए।
आयोग ने विद्यालयों द्वारा बार-बार टालमटोल, धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर RTE अधिनियम, शिक्षा विभाग तथा आयोग के निर्देशों की अवहेलना करने पर भी कड़ी नाराज़गी व्यक्त की। साथ ही PTA की बैठक के दस्तावेज़ों के स्थान पर PTM से संबंधित कागज़ प्रस्तुत करने जैसी भ्रामक जानकारी देने पर संबंधित विद्यालय को चेतावनी जारी की गई।
अन्य मामलों में, जहाँ माता-पिता के विवाद में एक नाबालिग पुत्र पर हमला हुआ, जिसमें माता ने बाहरी तत्वों के साथ मिलकर हमला किया तथा यह तथ्य भी प्रकाश में आया कि नाबालिग बच्चे के पिता भारतीय वायु सेना (Air Force) में अधिकारी हैं। इस गंभीर मामले पर आयोग ने पुलिस से बातचीत कर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, दूर राज्य में रहने वाली माता के विरुद्ध भी आवश्यक कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु आदेश दिए गए।
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