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Wednesday, February 4, 2026
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योग मानसिक शांति और आत्मानुशासन का आधार :  “स्वामी विश्वपाल जयन्त”

कण्वाश्रम में योग प्रतियोगिता का भव्य आयोजन

कण्वाश्रम स्थित वैदिक गुरुकुल महाविद्यालय में वैदिक वटुओं द्वारा सार्थक योगशाला, क्रेडिल पब्लिक स्कूल तथा गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर (हरिद्वार) के छात्र-छात्राओं के माध्यम से विभिन्न योगासनों का सुंदर प्रदर्शन किया गया। इस योग प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर के प्रतिभागियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। बच्चों और बालिकाओं के योग प्रदर्शन को देखकर दर्शक अत्यंत प्रभावित और विस्मित हुए।


कार्यक्रम की निर्णायक मंडली में प्रशिक्षिका संतोषी रावत, सोनम रावत, शुभम रावत, कविता कण्डवाल तथा प्राचार्य श्री संजय रावत ने निर्णायक की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वैदिक गुरुकुल, कण्वाश्रम में आयोजित यह योग प्रतियोगिता आश्रम के संस्थापक स्वामी विश्वपाल जयन्त के सान्निध्य में संपन्न हुई। प्रतियोगिता का शुभारंभ स्वामी विश्वपाल जयन्त, गुरुकुल के प्रधानाचार्य मनमोहन नौटियाल, योग महाविद्यालय के प्राचार्य संजय रावत, डॉ. राजवीर, डॉ. रमाकांत कुकरेती, हेमन्त तिवारी, स्वामी विरक्त देव, पूजा अग्रवाल, डॉ. मेजर वीरपाल विद्यालंकार, जयवीर रावत, सचिन रावत, रविन्द्र रावत, सार्थक योगशाला के संरक्षक राकेश कण्डवाल, संस्कृत भारती के नगर अध्यक्ष डॉ. रमाकांत कुकरेती, विभाग सह-संयोजक कुलदीप मैन्दोला एवं गुरुकुल के आचार्यों तथा गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।
कार्यक्रम के आरंभ में वैदिक वटुओं द्वारा सरस्वती वंदना एवं मंत्रोच्चारण किया गया। साथ ही सार्थक कण्डवाल द्वारा संगीतमय योग तथा सौम्या संस्कृति द्वारा योगमय प्रारंभिक प्रस्तुति दी गई।
इस अवसर पर वक्ताओं ने योग के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। सभी ने एक स्वर में कहा कि योग से जीवन स्वस्थ, संयमित और संतुलित बनता है। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा सभी प्रतिभागियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
आश्रम के संस्थापक स्वामी विश्वपाल जयन्त ने अपने उद्बोधन में कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य का साधन नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति और आत्मानुशासन का आधार है। योग अभ्यास से जीवन संतुलित होता है, मन प्रसन्न रहता है और व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होता है।
डॉ. मेजर वीरपाल विद्यालंकार ने विद्यार्थियों को “ऑपरेशन सिंदूर” के उदाहरण के माध्यम से योग से मिलने वाले अनुशासन, साहस और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा दी। डॉ. रमाकांत कुकरेती ने कहा कि योग जीवन को दृढ़ बनाता है, कठिन परिस्थितियों में धैर्य प्रदान करता है तथा स्वास्थ्य को सुदृढ़ करता है। कार्यक्रम में हेमन्त तिवारी, स्वामी विरक्त देव, पूजा अग्रवाल, जयवीर रावत, सचिन रावत एवं रविन्द्र रावत ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
योग प्रतियोगिता का संचालन कुलदीप मैन्दोला द्वारा किया गया तथा मंचीय कार्यक्रम का सुचारु संचालन डॉ. राजवीर ने किया। योग के त्रिविध संयोजन का कुशल प्रदर्शन राकेश कण्डवाल द्वारा किया गया, जिससे उपस्थित जनसमूह अत्यंत प्रसन्न और उत्साहित दिखाई दिया।

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