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स्वर्गीय दिवाकर भट्ट का संघर्षशील व्यक्तित्व और निर्भीक नेतृत्व उत्तराखंड की जनराजनीति की पहचान: सीएम धामी 

 

गैरसैण। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को विधानसभा में देवप्रयाग के पूर्व विधायक स्वर्गीय दिवाकर भट्ट को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका संघर्षशील व्यक्तित्व और निर्भीक नेतृत्व उत्तराखंड की जनराजनीति की सशक्त पहचान रहा है। उन्होंने कहा कि साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद दिवाकर भट्ट जी ने अपने विचारों, संघर्ष और नेतृत्व से प्रदेश की राजनीति में विशिष्ट स्थान बनाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की राजनीति में उन्हें “फील्ड मार्शल” के नाम से जाना जाता था, जो उनके दृढ़ और संघर्षशील नेतृत्व का परिचायक था। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय भट्ट जी का जीवन इस बात की प्रेरणा देता है कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का मार्ग भी है।
मुख्यमंत्री ने उनके जीवनवृत्त का उल्लेख करते हुए कहा कि टिहरी जनपद के बडियारगढ़ क्षेत्र के सुपार गांव में वर्ष 1946 में जन्मे दिवाकर भट्ट जी ने कम उम्र में ही जन आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी थी। मात्र 19 वर्ष की आयु से ही वे जनहित के मुद्दों को लेकर आंदोलनों में जुट गए थे। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के कठिन दौर में उन्होंने अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर आंदोलन को नई ऊर्जा और दिशा दी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1995 का श्रीयंत्र टापू आंदोलन और खैट पर्वत पर किया गया उनका अनशन राज्य आंदोलन के इतिहास में आज भी याद किया जाता है। ट्रेड यूनियन आंदोलन से अपनी पहचान बनाने वाले दिवाकर भट्ट ने बीएचईएल की नौकरी छोड़कर उत्तराखंड आंदोलन को मजबूत करने का निर्णय लिया और पहाड़ की आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय भट्ट ने “घेरा डालो-डेरा डालो” जैसे प्रभावी नारों के माध्यम से जनआंदोलन को नई धार दी। यह नारा केवल एक आह्वान नहीं, बल्कि जनदबाव की प्रभावी रणनीति बन गया, जिसने युवाओं और आम लोगों को आंदोलन से जोड़ने का काम किया।
उन्होंने बताया कि दिवाकर भट्ट जी का राजनीतिक सफर भी पूरी तरह जमीनी स्तर से शुरू हुआ। वर्ष 1983 में वे कीर्तिनगर के ब्लॉक प्रमुख चुने गए और लगभग एक दशक तक इस पद पर रहते हुए जनसेवा का कार्य किया। इसके बाद वे जिला पंचायत सदस्य भी रहे और लगातार जनहित के मुद्दों को उठाते रहे।
राज्य गठन के बाद वर्ष 2007 में देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र की जनता ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनकर विधानसभा भेजा। विधायक के रूप में उन्होंने क्षेत्र और राज्य के मुद्दों को सदन में प्रभावी ढंग से उठाया। बाद में उन्होंने राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में राजस्व, भू-प्रबंधन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा सैनिक कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व संभाला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण, वन कानूनों में संशोधन, पंचायत परिसीमन, हिल कैडर के क्रियान्वयन और पर्वतीय क्षेत्रों के अधिकारों के मुद्दों पर दिवाकर भट्ट जी हमेशा मजबूती से खड़े रहे। वे उत्तराखंड क्रांति दल के संस्थापक सदस्यों में भी शामिल रहे और लंबे समय तक संगठन व राज्यहित के मुद्दों को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महत्वपूर्ण पदों पर रहने के बावजूद वे सादगी, स्पष्टवादिता और जनसमर्पण के प्रतीक बने रहे। उन्होंने हमेशा उत्तराखंड के हितों को सर्वोपरि रखा।
उन्होंने कहा कि 25 नवंबर 2025 को उनका निधन प्रदेश के सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने सदन की ओर से दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक-संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को विधानसभा में पुरोला के पूर्व विधायक स्वर्गीय राजेश जुवांठा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निधन को उत्तराखंड के राजनीतिक और सामाजिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि राजेश जुवांठा जी एक युवा, ऊर्जावान और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्ध जनप्रतिनिधि थे, जिन्होंने अपने क्षेत्र की समस्याओं को सदन में पूरी मजबूती के साथ उठाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 7 जुलाई 1977 को जनपद उत्तरकाशी के पुरोला क्षेत्र में जन्मे राजेश जुवांठा को जनसेवा के संस्कार अपने परिवार से ही प्राप्त हुए थे। उनके पिता स्वर्गीय बर्फिया लाल जुवांठा जी उत्तर प्रदेश सरकार में पर्वतीय विकास मंत्री रहे, जबकि उनकी माताजी शांति जुवांठा जी विकासनगर नगर पालिका की दो बार अध्यक्ष रहीं।
उन्होंने कहा कि राजेश जुवांठा जी ने इन संस्कारों को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2002 से 2007 तक पुरोला क्षेत्र से क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में कार्य किया और जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को गति दी। इसी जनसंपर्क और सक्रियता के बल पर वर्ष 2007 में वे पुरोला विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायक के रूप में उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को सदन में प्रभावी ढंग से उठाया। वर्ष 2007-08 में वे प्राक्कलन समिति के सदस्य रहे, जबकि वर्ष 2008 से 2010 तक अनुसूचित जाति, जनजाति एवं विमुक्त जाति संबंधी समिति में सदस्य के रूप में कार्य करते हुए वंचित वर्गों की आवाज को मजबूत करने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि स्वर्गीय जुवांठा जी अपने सरल, ईमानदार और मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते थे तथा आमजन के प्रति उनकी संवेदनशीलता उन्हें एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि बनाती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 22 दिसंबर 2025 को हृदयगति रुकने से 48 वर्ष की आयु में उनका असमय निधन हो गया।
मुख्यमंत्री ने सदन की ओर से दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक-संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को विधानसभा में टिहरी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक स्वर्गीय बलवीर सिंह नेगी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निधन को उत्तराखंड की राजनीति और सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि बलवीर सिंह नेगी का पूरा जीवन जनसेवा, सादगी और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित रहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टिहरी गढ़वाल जनपद के ग्राम थाती में 8 दिसंबर 1947 को जन्मे बलवीर सिंह नेगी जी साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर जनसेवा के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान बनाने में सफल रहे। 1970 के दशक से ही वे टिहरी क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे और जीवन के अंतिम समय तक क्षेत्रीय विकास तथा जनहित के मुद्दों के लिए निरंतर प्रयास करते रहे।
उन्होंने बताया कि स्वर्गीय नेगी भिलंगना क्षेत्र से दो बार ब्लॉक प्रमुख रहे और स्थानीय विकास की मजबूत नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही वे जिला पंचायत सदस्य भी रहे और ग्रामीण समस्याओं के समाधान के लिए लगातार सक्रिय रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बलवीर सिंह नेगी जी ने लखनऊ विश्वविद्यालय से बी.ए. और एल.एल.बी. की शिक्षा प्राप्त की थी। वे पहली बार वर्ष 1989 में जनता दल के टिकट पर टिहरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद वर्ष 2002 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के टिकट पर घनसाली से तथा वर्ष 2007 में कांग्रेस के टिकट पर पुनः विधायक चुने गए।
उन्होंने कहा कि अपनी संगठनात्मक क्षमता और जनसेवा के अनुभव के आधार पर उन्हें गढ़वाल मंडल विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य करने का अवसर मिला। इसके अलावा वे विधानसभा की विभिन्न समितियों में सदस्य रहते हुए सदन की गरिमा और जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 जनवरी 2026 को 78 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उन्होंने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक-संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की

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