गुरुग्राम के सेक्टर-29 स्थित लेज़र वैली ग्राउंड में 13 से 26 फरवरी तक आयोजित ‘सरस आजीविका मेला 2026’ इस वर्ष सचमुच ग्रामीण भारत की जीवंत धड़कन बन गया। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित इस बहुप्रतीक्षित मेले में देशभर के लगभग 450 से अधिक स्टॉल सजे, जिनमें महिला स्वयं सहायता समूहों की सशक्त भागीदारी ने इसे “लखपति दीदियों” के महोत्सव का रूप दे दिया। इसी विशाल आयोजन के बीच स्टॉल नंबर 9 पर कोटद्वार, गढ़वाल से पहुँचा सिद्धबाबा FPO एक अलग ही ऊर्जा और पेशेवर अंदाज़ के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराता दिखाई दिया।
देवभूमि उत्तराखंड की पहचान लिए सिद्धबाबा कृषक उत्पादक संगठन ने शुद्ध पहाड़ी उत्पादों की ऐसी श्रृंखला प्रस्तुत की, जिसने गुरुग्राम जैसे मिलेनियम शहर के उपभोक्ताओं को आकर्षित कर लिया। दालों की सोंधी खुशबू, पहाड़ी गाय के शुद्ध घी की सुवास, प्राकृतिक शहद की मिठास और झँगोरे के लड्डू-बर्फ़ी, मिल्क चॉकलेट तथा मिल्क केक जैसी पारंपरिक मिठाइयों का स्वाद—हर दिन स्टॉल पर उमड़ती भीड़ इसकी गवाही देती रही। इसके साथ ही औषधीय वनस्पतियों जैसे आमला, गिलोय, अश्वगंधा, मूसली, सुपर गट पाउडर और फ्लैवर्ड नमक ने स्वास्थ्य-सचेत ग्राहकों को विशेष रूप से आकर्षित किया।
लगातार दो सप्ताह से अधिक चले इस उत्सव में सिद्धबाबा FPO ने यह साबित किया कि “ना थकते हैं, ना रुकते हैं” केवल नारा नहीं, बल्कि कार्यसंस्कृति है। संगठन ने नियमित रूप से अपनी टीम के सदस्यों को ऊर्जा और समर्थन के लिए भेजा, वहीं हर सप्ताह नया स्टॉक गुरुग्राम पहुँचाकर ग्राहकों की मांग को पूरा किया। यही कारण रहा कि स्टॉल नंबर 9 पर प्रतिदिन लोगों का तांता लगा रहा और उत्पादों की लगातार बिक्री होती रही।
आयोजकों ने भी सिद्धबाबा FPO के प्रतिनिधियों के पेशेवर कस्टमर केयर, विनम्र संवाद और सुसंगठित प्रस्तुति की सराहना की। मेले में सक्रिय सदस्य डॉ. नीता डंगवाल की उपस्थिति विशेष आकर्षण रही। उनकी प्राकृतिक चिकित्सा और पेन मैनेजमेंट थेरेपी की जानकारी ने कई आगंतुकों को प्रभावित किया, जिससे उत्पादों के साथ-साथ उत्तराखंड की समग्र स्वास्थ्य परंपरा की भी पहचान बनी।
सरस मेला केवल बिक्री का मंच नहीं, बल्कि ग्रामीण उद्यमिता, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक गौरव का उत्सव है। इस मंच पर सिद्धबाबा FPO कोटद्वार ने गढ़वाल-उत्तराखंड की एक सशक्त, पेशेवर और भरोसेमंद छवि प्रस्तुत की—जिसने यह संदेश दिया कि पहाड़ की शुद्धता और गुणवत्ता, महानगरों के दिलों को छूने की क्षमता रखती है। गुरुग्राम की रौनक के बीच देवभूमि की यह सादगी और गुणवत्ता सचमुच मेले की धड़कन बन गई।
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