उत्तराखंड के रुद्रपुर में फैक्ट्री में काम करने वाली एक बहन के साथ हुई दरिंदगी सिर्फ़ एक अपराध नहीं है, यह पूरे सिस्टम के मुँह पर तमाचा है। लिफ्ट देने के नाम पर गाड़ी में बैठाकर सामूहिक बलात्कार करना और फिर उसे सड़क पर फेंक देना..यह किसी एक व्यक्ति की हैवानियत नहीं, बल्कि उस शासन की असफलता है जो दिन-रात “सुशासन” और “कानून-व्यवस्था” का ढोल पीटता है। सवाल यह है कि अगर एक मेहनतकश महिला अपने काम से लौटते समय सुरक्षित नहीं है, तो फिर यह सरकार किसके लिए है?
भाजपा सरकार के कार्यकाल में उत्तराखंड महिलाओं के लिए लगातार असुरक्षित होता जा रहा है। देहरादून पहले ही सवालों के घेरे में है, अब रुद्रपुर, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर जैसे मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ तक अपराध की घटनाएं आम होती जा रही हैं। सरकार की प्राथमिकताओं में न तो महिला सुरक्षा है, न ही अपराधियों के भीतर कानून का डर। नतीजा यह है कि अपराधी बेखौफ हैं और बेटियाँ डरी हुई।
सबसे शर्मनाक बात यह है कि हर घटना के बाद वही रटा-रटाया बयान आता है कि “जांच होगी”, “कड़ी कार्रवाई की जाएगी”, “कानून अपना काम करेगा”। लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि न तो पुलिस व्यवस्था मजबूत हुई, न ही अपराधियों को समय पर सज़ा मिली। सत्ता के संरक्षण में अपराध पनप रहे हैं और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
यह भी सच है कि उत्तराखंड को कभी देवभूमि कहा जाता था, जहाँ नारी को शक्ति और सम्मान का प्रतीक माना जाता था। आज उसी देवभूमि में बेटियाँ सड़क पर फेंकी जा रही हैं और सरकार कुर्सी बचाने की राजनीति में व्यस्त है। यह सिर्फ़ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं, यह पहाड़ की अस्मिता, सम्मान और सामाजिक ताने-बाने पर सीधा हमला है।
अब बहुत हो चुका। अगर आज भी सरकार नहीं जागी, तो आने वाले समय में उत्तराखंड महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित राज्यों में गिना जाएगा। भाजपा सरकार को जवाब देना होगा कि आखिर कब तक बहनों-बेटियों की इज्ज़त की कीमत पर यह सत्ता चलती रहेगी? जनता सब देख रही है, और यह अन्याय ज्यादा दिन तक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
—— श्री करन माहरा
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी एवं CWC सदस्य
